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सड़क से उठी एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में आवाज

Tue, 03 Apr 2018 09:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Tue, 03 Apr 2018 09:28 PM IST
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Voice against Supreme Court decision on the SC ST Act
Bharat Band over SC ST Act - फोटो : PTI
जन सम्मान पार्टी ने संसद के घेराव आयोजित करके बड़ा आंदोलन छेड़ने की धमकी दी तो कांग्रेस पार्टी ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। भाजपा सांसद सावित्री बाई फूले ने अपना विरोध दर्ज कराया तो अशोक भारती अंबेडकर ने 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिनियम पर दिए गए फैसले को दलितों, आदिवासियों के अधिकारों पर हमला बताया। इस तरह से दो अप्रैल को पूरे देश भर से एससी/एसटी एक्ट पर शीर्षस्थ अदालत के फैसले के विरोध में आवाज उठी।
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अशोक भारती ने दो अप्रैल से ही इस मुद्दे पर जन आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी। इसके लिए उन्होंने कांग्रेस, बसपा, सपा, भाजपा सभी से इस मुद्दे को लेकर संसद में कदम उठाने की अपील की। अशोक भारती ने कहा कि उच्चतम न्यायालय का काम कानून बनाना नहीं है। बल्कि संसद द्वारा बनाए गए कानून की व्याख्या करना और उसके आधार पर लोगों को न्याय देना है। लेकिन इसके विपरीत उच्चतम न्यायालय ने 20 मार्च को देश के 30 करोड़ दलितों, आदिवासियों के हक के खिलाफ अपना निर्णय सुना दिया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पूर्वाग्रह से प्रेरित है। 
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कांग्रेस के लोकसभा में नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने अदालत के फैसले को सरकार की मंशा पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केन्द्र की सरकार की नीयत साफ नहीं है। वह आरएसएस के एजेंडे पर काम कर रही है और सरकार की नीति आदिवासियों, अनुसूचित जाति के लोगों के हित में नहीं है।
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खड़गे ने कहा कि 20 मार्च को अदालत ने अनुसूचित जाति और जनजाति अधिनियम को लेकर अपना निर्णय दिया था। इसका कांग्रेस समेत देश में सभी राजनीतिक दल विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस का प्रतिनिधि मंडल इस संदर्भ में राष्ट्रपति से भी भेंट करके ज्ञापन दे चुका है। खड़गे ने कहा कि सरकार या कदम दलितों और आदिवासियों के प्रति उसकी असंवेदनाशीलता को दर्शता है।
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