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न्यायिक सेवाओं में दिव्यांग कोटा का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- दृष्टिबाधितों को सहानुभूति और करुणा की जरूरत

Tue, 03 Dec 2024 10:22 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 03 Dec 2024 10:22 PM IST
सार

Supreme Court: जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि दृष्टिबाधित व्यक्ति अपने कर्तव्यों का पालन कर सकें, इसलिए उनके साथ सहानुभूति और करुणा की आवश्यकता है। उनके प्रति शत्रुतापूर्ण रवैया नहीं होना चाहिए।

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visually impaired people need empathy and sympathy Supreme Court on disabled quota in judicial services
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दृष्टिबाधित व्यक्तियों के साथ सहानुभूति और करुणा से पेश आने की जरूरत है। इसके साथ ही शीर्ष कोर्ट ने उन छह याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिनमें कुछ राज्यों में न्यायिक सेवाओ में ऐसे उम्मीदवारों को कोटा न दिए जाने का जिक्र किया गया था। अदालत ने एक सप्ताह के भीतर वकीलों को लिखित नोट दाखिल करने को भी कहा।
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जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि दृष्टिबाधित व्यक्ति अपने कर्तव्यों का पालन कर सकें, इसलिए उनके साथ सहानुभूति और करुणा की आवश्यकता है। उनके प्रति शत्रुतापूर्ण रवैया नहीं होना चाहिए। न्याय मित्र के रूप में पीठ की सहायता कर रहे वरिष्ठ वकील गौरव अग्रवाल ने कहा कि दृष्टिबाधित व्यक्तियों को दिव्यांगता कोटे के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता।
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दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम की धारा 34 का हवाला देते हुए अग्रवाल ने कहा कि हर राज्य सरकार को अपने प्रत्येक संस्थान में पदों के प्रत्येक समूह में कुल रिक्तियों की संख्या का कम से कम चार प्रतिशत पद दिव्यांग व्यक्तियों से भरना होता है। पीठ ने कहा कि यदि ऐसे व्यक्तियों को किसी अन्य सामान्य श्रेणी के छात्रों की तरह न्यायिक सेवा परीक्षा देने की अनुमति दी जाती है, तो राज्य या हाईकोर्ट यह दलील नहीं दे सकते कि वे अयोग्य हैं और जज के रूप में अपना कर्तव्य नहीं निभा सकते।
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न्याय मित्र ने कहा कि यदि ऐसे व्यक्तियों को न्यायपालिका में सेवा करने के अवसर से वंचित किया जाता है, तो दिव्यांग लोगों के लिए आरक्षण देने वाले कानून का उद्देश्य समाप्त हो जाएगा। पीठ ने कहा कि वह भविष्य के लिए व्यापक दिशा-निर्देश तो जारी कर सकती है, लेकिन व्यक्तिगत मामलों में निर्देश पारित नहीं कर सकती है। बता दें कि कुछ दृष्टिबाधित लोगों को 2024 में मध्य प्रदेश और राजस्थान में आयोजित न्यायिक सेवा परीक्षाओं की मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में शामिल होने का अवसर नहीं दिया गया था।


शीर्ष अदालत ने 7 नवंबर को समान अवसर सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए थे
बता दें कि 7 नवंबर को पीठ ने देश भर में न्यायिक सेवाओं में दिव्यांग व्यक्तियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए कई निर्देश जारी किए थे। यह निर्देश एक दृष्टिबाधित अभ्यर्थी की मां के लिखे पत्र के बाद शुरू की गई स्वत: संज्ञान जनहित याचिका पर आए हैं। इसमें मध्य प्रदेश के न्यायिक सेवा नियमों में भेदभावपूर्ण प्रावधानों को उजागर किया गया था।

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