बेटी की शादी थी तो पैसे बदलने के लिए लाइन में लग गया पूरा गांव
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घर के बरामदे में रंगोली सजी है और शादी के पंडाल इस बात का एहसास करा रहे हैं कि यहां जल्द ही शहनाई गूंजने वाली है। लेकिन इन तमाम तैयारियों के बीच कोल्हापुर के यलगुड गांव में नोटबंदी का असर भी साफ देखा जा रहा है। सरकार ने पुराने नोटों पर बैन लगाया तो परिवार के पास शादी के खर्चे के लिए पैसे ही नहीं बचे।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार इस घर में बेटी स्याली की बुधवार को शादी होनी है, जिसके लिए परिवार वालों ने पाई पाई करके पैसे जुटाए थे। लेकिन इसी बीच सरकार का एक फरमान आया जिसने पलभर में इस घर की खुशियों पर ग्रहण लगा दिया। परिवार इस जद्दोजहद में उलझा हुआ ही था कि कैसे शादी के लिए पैसे जुटाए जाएं, इसी बीच गांव के लोग उनकी मदद को आगे आए।
जानकारी के अनुसार इसके बाद गांव के लोगों ने परिवार की मदद का बीड़ा उठाया, फिर तो जैसे पूरा गांव उनकी मदद के लिए उमड़ पड़ा। गांव के लोग और रिश्तेदार बैंक के बाहर पैसे बदलवाने के लिए खड़े हो गए।
जरूरत के वक्त काम आए गांव के लोग, खुशी खुशी विदा हुई दूल्हन
इसके बाद तो जैसे परिवार की मुश्किलें ही हल हो गईं। गांव के इस सौहार्द्र ने एक परिवार की खुशियों को टूटने से बचा लिया। इसके बाद पूरे धूमधाम से स्याली की हल्दी की रस्म पूरी हुई।
बीए बीएड की स्टूडेंट स्याली के दहेज और उपहार का सारा सामान अब खरीदा जा चुका है। उसने बताया कि इस शादी ने हमारे परिवार और मित्रों को और नजदीक ला दिया है। यह उन सबका हमारे लिए आशीर्वाद है।
स्याली के पिता संभाजी एक किसान हैं, उन्होंने बेटी की शादी तीन महीने पहले कराड गांव के एक दुकानदार से तय की थी। वो बताते हैं कि हम घर में शादी की तैयारियां कर ही रहे थे कि सरकार के नोटबंदी के निर्णय ने हमारी सारी खुशियों पर ग्रहण लगा दिया। हम लोग पहले ही बड़ा आयोजन करने के पक्ष में नहीं थे। नोटबंदी के निर्णय के बाद हमने शादी को और साधारण तरीके से करने का निर्णय लिया।