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श्रील प्रभुपाद दुनिया में भारतीय सभ्यता के राजदूत हैं: वेंकैया नायडू
amarujala.com- presented by: अमर शर्मा
Updated Wed, 15 Nov 2017 12:22 AM IST
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उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू दीप प्रज्जवलित करते हुए
- फोटो : iskcondesiretree.com
भारत के उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू ने नई दिल्ली में इस्कॉन के पूरब-पश्चिम सांस्कृतिक समारोह का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में यदुबारा प्रभु द्वारा निर्देशित फिल्म 'हरे कृष्ण' का भारतीय प्रीमियर भी आयोजित किया गया।
विश्व के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री, नीति आयोग के कार्यकारी सदस्य और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष बिबेक देबराय ने कार्यक्रम में सम्मानित अतिथि के रूप में मौजूद थे। 1800 से अधिक मेहमानों में व्यापारियों, राजनयिकों, सरकारी अधिकारियों, इस्कॉन के वरिष्ठ अधिकारियों समेत श्रील प्रभुपाद के 38 शिष्यों, इस्कॉन के भक्तों और सदस्यों ने इस कार्यक्रम में शिरकत की। कार्यक्रम नई दिल्ली के सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम में रविवार को आयोजित किया गया।
इस मौके पर उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा, "उन्होंने (श्रील प्रभुपाद) ने 100 से अधिक मंदिरों, सांस्कृतिक केंद्रों और कृषि समुदायों की स्थापना की और 75 से ज्यादा पुस्तकों के लिए टिप्पणियां लिखी और चौदह बार दुनिया भर में यात्रा की - यह सभी कुछ महज 11 साल के कम समय में।
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कई मायनों में यह आश्चर्यजनक है कि सत्तर साल के किसी व्यक्ति ने इतने सारे कार्य किए, दिन में सिर्फ तीन-चार घंटे सोए और इतने सारे साहित्य का उत्पादन किया जिनका आज विश्व की 82 भाषाओं में अनुवाद किया गया है और 50 करोड़ से ज्यादा प्रतियां प्रकाशित हो चुकी हैं...
लेकिन मेरे लिए - स्वामी प्रभुपाद की सबसे बड़ी उपलब्धि यह थी कि वे भारत की प्राचीन सभ्यता के अनुकरणीय राजदूत थे। उन्होंने उसी परंपरागत मूल्यों को अपनाया जिसे आप और उनके अनुयायी भारत और विदेशों में प्रचार कर रहे हैं।"
डॉ. देबॉय ने भाषण में आचार्य के कर्तव्यों और कर्मठता के बारे में ग्रंथों से संदर्भ दिए और बताया कि प्रभुपाद कैसे आचार्य के रूप में एक अनुकरणीय जीवन जी रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि श्रील प्रभुपाद की सच्ची प्रशंसा तब होगी जब हम उनकी शिक्षाओं को दिल में उतारे और आत्मज्ञान हासिल करें।
कार्यक्रम का दूसरा आकर्षण था फिल्म 'हरे कृष्ण' का बहुत अपेक्षित प्रीमियर। भारत में पहली बार प्रदर्शित हो रही इस फिल्म को देखने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से भक्त पहुंचे।
फिल्म को भक्तों और मेहमानों ने बहुत सराहा। फिल्म के सिनेमाघरों में दिसंबर के दूसरे हफ्ते में रिलीज होने की संभावना है। कार्यक्रम का समापन श्रील प्रभुपाद के शिष्यों और संन्यासियों के ग्रुप फोटो खिंचवाने के साथ खत्म हुआ।
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विश्व के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री, नीति आयोग के कार्यकारी सदस्य और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष बिबेक देबराय ने कार्यक्रम में सम्मानित अतिथि के रूप में मौजूद थे। 1800 से अधिक मेहमानों में व्यापारियों, राजनयिकों, सरकारी अधिकारियों, इस्कॉन के वरिष्ठ अधिकारियों समेत श्रील प्रभुपाद के 38 शिष्यों, इस्कॉन के भक्तों और सदस्यों ने इस कार्यक्रम में शिरकत की। कार्यक्रम नई दिल्ली के सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम में रविवार को आयोजित किया गया।
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इस मौके पर उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा, "उन्होंने (श्रील प्रभुपाद) ने 100 से अधिक मंदिरों, सांस्कृतिक केंद्रों और कृषि समुदायों की स्थापना की और 75 से ज्यादा पुस्तकों के लिए टिप्पणियां लिखी और चौदह बार दुनिया भर में यात्रा की - यह सभी कुछ महज 11 साल के कम समय में।
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कई मायनों में यह आश्चर्यजनक है कि सत्तर साल के किसी व्यक्ति ने इतने सारे कार्य किए, दिन में सिर्फ तीन-चार घंटे सोए और इतने सारे साहित्य का उत्पादन किया जिनका आज विश्व की 82 भाषाओं में अनुवाद किया गया है और 50 करोड़ से ज्यादा प्रतियां प्रकाशित हो चुकी हैं...
लेकिन मेरे लिए - स्वामी प्रभुपाद की सबसे बड़ी उपलब्धि यह थी कि वे भारत की प्राचीन सभ्यता के अनुकरणीय राजदूत थे। उन्होंने उसी परंपरागत मूल्यों को अपनाया जिसे आप और उनके अनुयायी भारत और विदेशों में प्रचार कर रहे हैं।"
डॉ. देबॉय ने भाषण में आचार्य के कर्तव्यों और कर्मठता के बारे में ग्रंथों से संदर्भ दिए और बताया कि प्रभुपाद कैसे आचार्य के रूप में एक अनुकरणीय जीवन जी रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि श्रील प्रभुपाद की सच्ची प्रशंसा तब होगी जब हम उनकी शिक्षाओं को दिल में उतारे और आत्मज्ञान हासिल करें।
कार्यक्रम का दूसरा आकर्षण था फिल्म 'हरे कृष्ण' का बहुत अपेक्षित प्रीमियर। भारत में पहली बार प्रदर्शित हो रही इस फिल्म को देखने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से भक्त पहुंचे।
फिल्म को भक्तों और मेहमानों ने बहुत सराहा। फिल्म के सिनेमाघरों में दिसंबर के दूसरे हफ्ते में रिलीज होने की संभावना है। कार्यक्रम का समापन श्रील प्रभुपाद के शिष्यों और संन्यासियों के ग्रुप फोटो खिंचवाने के साथ खत्म हुआ।