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Vice President Election: विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा बोलीं- चुनाव से नहीं लगता डर, हार और जीत जीवन का हिस्सा
Tue, 19 Jul 2022 05:17 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 19 Jul 2022 05:17 PM IST
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मार्गरेट अल्वा।
- फोटो : Social Media
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विपक्ष की उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा ने मंगलवार को कहा कि चुनाव उन्हें डराते नहीं क्योंकि जीत और हार जीवन का एक हिस्सा है। अल्वा ने कहा कि सभी दलों के सांसदों का विश्वास उन्हें लोगों को एक साथ लाने और एक मजबूत और एकजुट भारत बनाने में मदद करेगा।
6 अगस्त को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद एक बयान में उन्होंने कहा कि इस पद के लिए उनकी उम्मीदवारी का समर्थन करने के लिए विपक्ष का एक साथ आना 'भारत की वास्तविकता का एक लक्षण' है।
'हमारी एकता, हमारी विविधता, हमारी ताकत' : अल्वा
अल्वा ने कहा, "हम इस महान देश के विभिन्न कोनों से आते हैं, विभिन्न भाषाएं बोलते हैं और विभिन्न धर्मों और रीति-रिवाजों का पालन करते हैं। हमारी एकता, हमारी विविधता, हमारी ताकत है।"
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उन्होंने आगे कहा, "जो हमारे लिए महत्वपूर्ण है, हम उसके लिए लड़ते हैं: लोकतंत्र के स्तंभों को बनाए रखने के लिए, हमारी संस्थाओं को मजबूत करने के लिए और एक ऐसे भारत के लिए जो सारे जहां से अच्छा है, जो हम में से प्रत्येक का है। एक ऐसा भारत जहां सभी के लिए सम्मान हो।"
'विपक्ष की उम्मीदवार की रूप में नामित होना सम्मान की बात'
कई राज्यों में राज्यपाल रह चुकीं 80 वर्षीय अल्वा ने आगे कहा, "भारत गणराज्य के उपराष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष की उम्मीदवार के रूप में नामित होने एक विशेषाधिकार और सम्मान की बात है।" उन्होंने कहा, "मैंने अपना जीवन ईमानदारी और साहस के साथ अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में बिताया है। चुनाव मुझे डराते नहीं हैं- जीत और हार जीवन का एक हिस्सा हैं।"
अल्वा ने कहा, "हालांकि, मेरा विश्वास है कि संसद के दोनों सदनों में पार्टी लाइनों के सदस्यों की सद्भावना, विश्वास और स्नेह को मैंने अर्जित किया है। उसके कारण मुझे समर्थन मिलेगा और एक ऐसे व्यक्ति के रूप में मेरा मार्गदर्शन करना जारी रखेंगे जो लोगों को एक साथ लाने, साझा समाधान तलाशने और एक मजबूत व एकजुट भारत के लिए काम करता है।"
'भारत के संविधान की सेवा करना मेरा दायित्व'
उन्होंने आगे कहा कि वह इस नामांकन को बड़ी विनम्रता के साथ स्वीकार करती हैं और उनपर भरोसा जताने के लिए विपक्ष के नेताओं को धन्यवाद देती हैं। पूर्व मंत्री ने कहा कि पिछले पचास वर्षों में उन्होंने देश के लिए ईमानदारी, साहस और प्रतिबद्धता के साथ काम किया है और मेरा एक मात्र दायित्व- बिना किसी डर के भारत के संविधान की सेवा करना है।
कौन हैं मार्गरेट अल्वा?
अल्वा का जन्म मंगलूरु में 1842 में पास्कल और एलिजाबेथ नाजरेथ के घर पर हुआ। उन्होंने मंगलूरु, कोयंबटूर और बेंगलुरू में शिक्षा प्राप्त की और माउंट कार्मेल कॉलेज से बीए और गर्वनमेंट लॉ कॉलेज से विधि की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्हें मैसूर विश्वविद्यालय द्वारा डी.लिट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
उन्होंने 1964 में प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी जाओजिम व वॉयलेट अल्वा के सबसे बड़े बेटे निरंजन अल्वा से शादी की। उनके चार बच्चे हैं। अल्वा पहली बार 1974 में संसद के लिए निर्वाचित हुईं और लगातार चार बार राज्यसभा की सदस्य रहीं। बाद में उन्होंने लोकसभा में भी कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया।
उन्होंने सांसद के तौर पर अपने तीस वर्षों के कार्यकाल के दौरान दोनों सदनों की कई अहम व प्रतिष्ठित समितियों की अध्यक्षता भी की। वह राजीव गांधी व पी.वी.नरसिंह राव की सरकार में दस वर्षों तक केंद्रीय मंत्री भी रहीं।
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6 अगस्त को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद एक बयान में उन्होंने कहा कि इस पद के लिए उनकी उम्मीदवारी का समर्थन करने के लिए विपक्ष का एक साथ आना 'भारत की वास्तविकता का एक लक्षण' है।
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'हमारी एकता, हमारी विविधता, हमारी ताकत' : अल्वा
अल्वा ने कहा, "हम इस महान देश के विभिन्न कोनों से आते हैं, विभिन्न भाषाएं बोलते हैं और विभिन्न धर्मों और रीति-रिवाजों का पालन करते हैं। हमारी एकता, हमारी विविधता, हमारी ताकत है।"
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उन्होंने आगे कहा, "जो हमारे लिए महत्वपूर्ण है, हम उसके लिए लड़ते हैं: लोकतंत्र के स्तंभों को बनाए रखने के लिए, हमारी संस्थाओं को मजबूत करने के लिए और एक ऐसे भारत के लिए जो सारे जहां से अच्छा है, जो हम में से प्रत्येक का है। एक ऐसा भारत जहां सभी के लिए सम्मान हो।"
'विपक्ष की उम्मीदवार की रूप में नामित होना सम्मान की बात'
कई राज्यों में राज्यपाल रह चुकीं 80 वर्षीय अल्वा ने आगे कहा, "भारत गणराज्य के उपराष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष की उम्मीदवार के रूप में नामित होने एक विशेषाधिकार और सम्मान की बात है।" उन्होंने कहा, "मैंने अपना जीवन ईमानदारी और साहस के साथ अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में बिताया है। चुनाव मुझे डराते नहीं हैं- जीत और हार जीवन का एक हिस्सा हैं।"
अल्वा ने कहा, "हालांकि, मेरा विश्वास है कि संसद के दोनों सदनों में पार्टी लाइनों के सदस्यों की सद्भावना, विश्वास और स्नेह को मैंने अर्जित किया है। उसके कारण मुझे समर्थन मिलेगा और एक ऐसे व्यक्ति के रूप में मेरा मार्गदर्शन करना जारी रखेंगे जो लोगों को एक साथ लाने, साझा समाधान तलाशने और एक मजबूत व एकजुट भारत के लिए काम करता है।"
'भारत के संविधान की सेवा करना मेरा दायित्व'
उन्होंने आगे कहा कि वह इस नामांकन को बड़ी विनम्रता के साथ स्वीकार करती हैं और उनपर भरोसा जताने के लिए विपक्ष के नेताओं को धन्यवाद देती हैं। पूर्व मंत्री ने कहा कि पिछले पचास वर्षों में उन्होंने देश के लिए ईमानदारी, साहस और प्रतिबद्धता के साथ काम किया है और मेरा एक मात्र दायित्व- बिना किसी डर के भारत के संविधान की सेवा करना है।
कौन हैं मार्गरेट अल्वा?
अल्वा का जन्म मंगलूरु में 1842 में पास्कल और एलिजाबेथ नाजरेथ के घर पर हुआ। उन्होंने मंगलूरु, कोयंबटूर और बेंगलुरू में शिक्षा प्राप्त की और माउंट कार्मेल कॉलेज से बीए और गर्वनमेंट लॉ कॉलेज से विधि की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्हें मैसूर विश्वविद्यालय द्वारा डी.लिट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
उन्होंने 1964 में प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी जाओजिम व वॉयलेट अल्वा के सबसे बड़े बेटे निरंजन अल्वा से शादी की। उनके चार बच्चे हैं। अल्वा पहली बार 1974 में संसद के लिए निर्वाचित हुईं और लगातार चार बार राज्यसभा की सदस्य रहीं। बाद में उन्होंने लोकसभा में भी कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया।
उन्होंने सांसद के तौर पर अपने तीस वर्षों के कार्यकाल के दौरान दोनों सदनों की कई अहम व प्रतिष्ठित समितियों की अध्यक्षता भी की। वह राजीव गांधी व पी.वी.नरसिंह राव की सरकार में दस वर्षों तक केंद्रीय मंत्री भी रहीं।