बयान: विहिप ने मुस्लिम समाज से की अपील, कहा- काशी-मथुरा हिंदू समाज को सौंपकर कायम करे भाईचारे की मिसाल
विहिप नेता ने कहा कि अयोध्या विवाद के समय भी मुस्लिम समुदाय के पास एक अवसर था। वह इसे हिंदू समुदाय को सौंपकर भाईचारे की बेहतर मिसाल कायम कर सकता था।
विस्तार
ज्ञानवापी मस्जिद विवाद सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक पहुंच चुका है। इसी बीच विश्व हिंदू परिषद ने मुस्लिम समाज से काशी-मथुरा के विवादित धर्मस्थलों को हिंदू समाज को सौंपकर देश में शांति-सद्भाव और भाईचारे की मिसाल कायम करने की बात कही है। संगठन ने कहा है कि इससे मुस्लिम समुदाय देश की भावना के साथ जुड़ेगा और उसके प्रति अच्छा संदेश जाएगा।
विहिप नेता ने कही यह बात
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन ने अमर उजाला से कहा कि मुस्लिम आक्रमणकारियों ने देश के अनगिनत मंदिरों को तोड़कर उन्हें मस्जिदों का रूप दे दिया। आज वही विवादित धर्मस्थल दोनों समुदायों के बीच तनाव का कारण बन रहे हैं। लेकिन यदि मुस्लिम समुदाय काशी और मथुरा के विवादित धर्मस्थल स्वेच्छा से हिंदू समुदाय को दे दे तो बाकी मस्जिदों का विवाद आपसी सहमति से खत्म किया जा सकता है। अयोध्या पहले ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश से हिंदू पक्ष को दिया जा चुका है।
मुस्लिम समुदाय के लिए बताया मौका
विहिप नेता ने कहा कि अयोध्या विवाद के समय भी मुस्लिम समुदाय के पास एक अवसर था। वह इसे हिंदू समुदाय को सौंपकर भाईचारे की बेहतर मिसाल कायम कर सकता था। इससे उसके प्रति देश की बहुसंख्यक आबादी में एक विश्वास और भरोसा पैदा होता, लेकिन मुस्लिम समुदाय ने सुप्रीम कोर्ट तक इस लड़ाई को लड़ा, जिससे यही संदेश गया कि मुस्लिम समुदाय सच जानने के बाद भी हठ पर अड़ा हुआ है। इससे दोनों समाजों के बीच आपसी भरोसा कम हुआ है।
सच का साथ दें मुस्लिम समुदाय के लोग
उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज को आतंकी आक्रमणकारियों का पक्ष लेने और उनके साथ खड़ा होने की बजाय सच का साथ देना चाहिए। वे स्वयं इसी मिट्टी के बने हैं और उन्हें अपनी राष्ट्रीयता मुस्लिम आक्रमणकारियों की बजाय भारतीयता में देखना चाहिए। इस कारण उन्हें विवादित धर्मस्थलों को हिंदू समुदाय को सौंपकर एक बेहतर मिसाल कायम करनी चाहिए। यदि काशी-मथुरा के विवादित धर्मस्थल हिंदुओं को सौंप दिया जाए तो हिंदू समाज बाकी के सभी धर्मस्थलों से अपना दावा छोड़ देगा, अमर उजाला के इस सवाल पर डॉ. सुरेंद्र जैन ने कहा कि यह एक काल्पनिक प्रश्न है और इस तरह के प्रश्नों का जवाब नहीं दिया जा सकता। लेकिन मुस्लिम समुदाय विवादित धर्मस्थलों पर से अपना अधिकार छोड़कर एक बेहतर संदेश दे सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने सच का साथ दिया
विहिप नेता ने कहा है कि अयोध्या विवाद में भी मुस्लिम पक्ष सर्वोच्च न्यायालय तक गया था और ज्ञानवापी विवाद में भी वह सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच गया है। लेकिन वहां भी सच की ही जीत हुई है। अदालत ने ज्ञानवापी में भगवान महादेव का शिवलिंग स्वीकार करते हुए वहां पर हाथ-पैर धुलने पर प्रतिबंध लगा दिया है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने निचली अदालत की कार्रवाई पर रोक न लगाकर भी यह संकेत दे दिया है कि निचली अदालत की कार्रवाई बिल्कुल सही है। इससे भी हिंदू पक्ष का तर्क मजबूत हुआ है।