फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Venkaiah Naidu: 'Judiciary cannot make lagislation,' former Vice President at National Legislature Conference

Venkaiah Naidu: 'न्यायपालिका कानून नहीं बना सकती,' राष्ट्रीय विधायिका सम्मेलन में बोले पूर्व उपराष्ट्रपति

Sat, 17 Jun 2023 05:24 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता महतो Updated Sat, 17 Jun 2023 05:24 PM IST
सार

न्यायपालिका फैसला करती है, कार्यपालिका लागू करती है और यदि अंत में कोई प्रावधानों का उल्लंघन करता है तो वह अदालत जा सकता है। न्यायपालिका गतिशील होनी चाहिए। 

विज्ञापन
Venkaiah Naidu: 'Judiciary cannot make lagislation,' former Vice President at National Legislature Conference
Venkaiah Naidu - फोटो : Social Media

विस्तार

राष्ट्रीय विधायिका सम्मेलन को संबोधित करते हुए पूर्व उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने शनिवार को कानून बनाने की विधायिका की सर्वोच्चता को बरकरार रखा है। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया में न्यायपालिका की कोई भूमिका नहीं है। 
विज्ञापन


नायडू ने कहा कि संविधान ने कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका की भूमिकाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया है और किसी को भी यह नहीं सोचना चाहिए कि वे सर्वोच्च हैं और न ही उन्हें अपनी सीमाएं लांघनी चाहिए।
विज्ञापन


न्यापालिका कानून नहीं बना सकती
कानूनी शक्तियां केवल कानूनी निकायों को ही दी जाती है। कानून, संवैधानिक प्रावधान के अनुसार है या नहीं इसका फैसला कोर्ट को करने दिया जाए। लेकिन कोर्ट कानून नहीं बना सकती है। न्यापालिका कानून नहीं बना सकती है और इसे ध्यान में रखना होगा। न्यायपालिका फैसला करती है, कार्यपालिका लागू करती है और यदि अंत में कोई प्रावधानों का उल्लंघन करता है तो वह अदालत जा सकता है। न्यायपालिका गतिशील होनी चाहिए। 
विज्ञापन
विज्ञापन


पूर्व उपराष्ट्रपति ने यह प्रतिक्रिया शक्तियों के संवैधानिक बंटवारे को लेकर उठे विवादों पर दी है। 

नायडू ने जताई नाराजगी
नायडू ने विधान सभाओं और संसद में बार-बार होने वाले रूकावटों पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा- 'मैं यह बोलने की कोशिश नहीं कर रहा कि संसद में विरोध, अंतर या असहमति नहीं होनी चाहिए। हालांकि, विरोध, अंतर, प्रदर्शन और सहमति-असहमति ही हमारी लोकतंत्र की विशेषताएं हैं।' 


नायडू ने कहा- 'प्रदर्शन हमेशा गरिमापूर्ण और संसदीय मानदंडो के अनुसार होना चाहिए। हमारा व्यवहार एक-दूसरे के लिए इज्जत वाला होना चाहिए और यह व्यवहार बहस और प्रदर्शन के दौरान भी होना चाहिए।' 

उपराष्ट्रपति का मानना है कि जनता के प्रतिनिधियों को संसद के बाहर या भीतर कुछ भी ऐसा नहीं करना चाहिए जिससे देश के लोकतंत्र की गरिमा कम हो। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed