प्लांट पर ताला लगने से भड़की 'वेदांता', तमिलनाडु सरकार के खिलाफ कोर्ट पहुंचने की तैयारी
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तमिलनाडु सरकार ने देश के सबसे बड़े कॉपर कारखाने को स्थाई रूप से बंद करने का आदेश दिया, जिस पर अब स्टरलाइट प्लांट पर स्वामित्व रखने वाली ब्रितानी कंपनी वेदांता की तरफ से तमिलनाडु सरकार को कानूनी चुनौती देने की तैयारी चल रही है। लेकिन विरोध प्रदर्शन के दौरान 13 लोगों की मौत से ये मामला इतना गर्म है कि वेदांता ग्रुप के लिए ऐसा करना इतना आसान नहीं होगा। तूतीकोरिन स्थित इस कारखाने से निकल रहे प्रदूषण के खिलाफ विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की गोली से 13 लोगों की मौत हो गई थी।
वेदांता कंपनी का मानना है कि उसने किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया है और कानूनी तौर से उनका पक्ष इस मामले में मजबूत है। अब देखना है कि वेदांता राज्य सरकार से ये लड़ाई मद्रास हाईकोर्ट में लड़ती है या सीधे सुप्रीम कोर्ट जाती है। बता दें कि मुख्यमंत्री ई पलनीस्वामी ने सोमवार को ही राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को स्टरलाइट कॉपर प्लांट को सील करने का आदेश दिया है। ऐसे में पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि तूतीकोरिन स्थित इस प्लांट की वजह से भूमिगत जल गंदा हो रहा था और इलाके में कैंसर समेत दूसरी बीमारियों का खतरा बढ़ गया था।
वहीं तमिलनाडु विधानसभा में तूतीकोरिन हिंसा का मामला पिछले मंगलवार को गूंजा था। उधर मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी ने कहा कि शांति बनाए रखने के लिए पुलिस की कार्रवाई टाली नहीं जा सकती थी। तूतीकोरिन में 22 मई को हुई हिंसा की घटना को लेकर सदन में रखी गई रिपोर्ट पर पलानीस्वामी ने कहा कि विषम परिस्थितियों के कारण पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। पुलिस ने हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ ही आंसू गैस और लाठी चार्ज का सहारा लिया। मुख्यमंत्री ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।
याद दिला दें कि घटना में 13 लोगों की मौत और 40 से ज्यादा लोग जख्मी हुए, जिनमें कई पत्रकार और कैमरापर्सन भी थे। यहां लोग महीनों से प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि स्टरलाइट फैक्ट्री से इलाके में प्रदूषण फैल रहा है। पिछले मंगलवार को ये प्रदर्शन हिंसक हो गए। जिसके बाद विपक्ष के नेता एमके स्टालिन ने तूतीकोरिन में तांबा संयंत्र बंद करने के लिए कैबिनेट की बैठक बुलाने और नीतिगत फैसला लेने की बजाए सरकारी आदेश जारी करने के लिए राज्य सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने सरकारी आदेश जारी करने को आंखों में धूल झोंकने वाली कोशिश बताई जो कि स्टरलाइट प्रबंधन को अदालत में जाने का मौका देता है। स्टालिन ने कहा कि यह फैसला 2013 में उठाए गए कदम के जैसा है। स्टालिन ने सरकार पर लोगों से बातचीत नहीं करने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री पलानीस्वामी का इस्तीफा मांगा। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी विधानसभा की कार्यवाही का तब तक बहिष्कार करेगी जब तक कि संयंत्र को स्थाई तौर पर बंद नहीं किया जाता। बाद में उनकी अगुवाई में पार्टी विधायकों ने बहिर्गमन किया। इस दौरान द्रमुक सदस्य काले कपड़े पहने थे।