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उपलब्धि: यूट्यूब से पहाड़ पर चढ़ना सीख पहुंच गई एवरेस्ट, केरल की वसंती का अब चीन की दीवार है अगला सपना
Thu, 20 Mar 2025 06:58 AM IST
शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शुभम कुमार
Updated Thu, 20 Mar 2025 06:58 AM IST
सार
हौसले बुलंद हों तो किसी काम को करने में मुश्किलें रुकावट नहीं बनतीं। इसे साबित कर दिखाया है केरल की 59 साल की वासंती चेरुवेटिल ने। उन्होंने बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के, सिर्फ यूट्यूब वीडियो देखकर एवरेस्ट पर चढ़ाई की तैयारी की।
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माउंट एवरेस्ट
- फोटो : Freepik
विस्तार
हौसले बुलंद हों तो किसी काम को करने में मुश्किलें रुकावट नहीं बनतीं। इसे साबित कर दिखाया है केरल की 59 साल की वासंती चेरुवेटिल ने। उन्होंने बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के, सिर्फ यूट्यूब वीडियो देखकर एवरेस्ट पर चढ़ाई की तैयारी की। इसके बाद एवरेस्ट बेस कैंप तक चढ़ाई करने की असाधारण उपलब्धि भी हासिल कर ली। पेशे से दर्जी वासंती ने अब अगला लक्ष्य चीन की दीवार पर जाने का बनाया है।
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वासंती ने एवरेस्ट बेस कैंप तक चढ़ाई के लिए चार महीने तक यूट्यूब वीडियो के जरिये ही प्रशिक्षण लिया। ऐसा करना किसी के लिए भी बहुत चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन वासंती ने अपने सपने को पूरा करने और हर चुनौती से पार पाने के लिए खुद को तैयार किया। बातचीत में आने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए उन्होंने हिंदी भी सीखी। वह ट्रैकिंग बूट्स पहनकर अपने दोस्तों के साथ रोजाना शाम को 5-6 घंटे पैदल चलती थीं। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने अपने दोस्तों को बताया कि वह एवरेस्ट पर जाने के लिए तैयारी कर रही हैं तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ।
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रोज 6 से 7 घंटे चढ़ाई करती थीं चेरुवेटिल
वासंती चेरुवेटिल ने मिशन की शुरुआत 15 फरवरी को नेपाल के सुर्के से की। 23 फरवरी को वह 5,364 मीटर की ऊंचाई पर स्थित साउथ बेस कैंप पर पहुंचीं। मिशन के दौरान खड़ी चढ़ाई, संकरे रास्ते और गहरी खाइयां जैसी मुश्किलों के बाद भी वासंती रोजाना 6 से 7 घंटे चढ़ाई करती थीं।
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वासंती ने एवरेस्ट बेस कैंप तक चढ़ाई के लिए चार महीने तक यूट्यूब वीडियो के जरिये ही प्रशिक्षण लिया। ऐसा करना किसी के लिए भी बहुत चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन वासंती ने अपने सपने को पूरा करने और हर चुनौती से पार पाने के लिए खुद को तैयार किया। बातचीत में आने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए उन्होंने हिंदी भी सीखी। वह ट्रैकिंग बूट्स पहनकर अपने दोस्तों के साथ रोजाना शाम को 5-6 घंटे पैदल चलती थीं। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने अपने दोस्तों को बताया कि वह एवरेस्ट पर जाने के लिए तैयारी कर रही हैं तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ।
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रोज 6 से 7 घंटे चढ़ाई करती थीं चेरुवेटिल
वासंती चेरुवेटिल ने मिशन की शुरुआत 15 फरवरी को नेपाल के सुर्के से की। 23 फरवरी को वह 5,364 मीटर की ऊंचाई पर स्थित साउथ बेस कैंप पर पहुंचीं। मिशन के दौरान खड़ी चढ़ाई, संकरे रास्ते और गहरी खाइयां जैसी मुश्किलों के बाद भी वासंती रोजाना 6 से 7 घंटे चढ़ाई करती थीं।
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