फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Variation observed in changes in virus genomes at the population level

corona virus: न्यूक्लियोटाइड वैरिएशन वायरस की प्रसार और संक्रामकता का पता लगाने में मददगार

Sun, 01 Aug 2021 05:46 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Sun, 01 Aug 2021 05:46 AM IST
सार

  • न्यूक्लियोटाइड में होने वाले परिवर्तन आने वाले समय में एक खतरनाक और घातक म्यूटेशन के रूप में सामने आता
  • चीन, जर्मनी, मलयेशिया, ब्रिटेन और अमेरिका से जुटाए गए 1347 सैंपल के जीनोम का किया अध्ययन

विज्ञापन
Variation observed in changes in virus genomes at the population level
कोरोना वायरस - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कोरोना से जुड़े एक और तथ्य का पता वैज्ञानिकों ने लगाया है। नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल के नेतृत्व में सीएसआईआर-आईजीबी दिल्ली, हैदराबाद के सेंटर फॉर सेल्युलर मॉलीक्यूलर बायोलॉजी, आईआईटी जोधपुर समेत अन्य संस्थानों के वैज्ञानिकों के अनुसार वायरस के जीवनकाल में म्यूटेशन एक सामान्य प्रक्रिया है।

विज्ञापन

 
भिन्न लोगों के भीतर वायरस में होने वाले परिवर्तन की निगरानी
वैज्ञानिकों का कहना है कि जब एक वायरस इस प्रक्रिया से गुजरता है तो संक्रमित व्यक्ति के भीतर अपनी संख्या बढ़ाते वक्त वह एक छोटे न्यूक्लियोटाइड को परिवर्तित कर देता है। इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक भाषा में इन-होस्ट सिंगल न्यूक्लियोटाइड वैरिएशन कहते हैं। यही छोटे न्यूक्लियोटाइड में होने वाले परिवर्तन आने वाले समय में एक खतरनाक और घातक म्यूटेशन के रूप में सामने आता है।
विज्ञापन


वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर हम एक बड़ी आबादी पर इसका अध्ययन करें तो अलग-अलग व्यक्तियों के भीतर वायरस में होने वाले इन परिवर्तनों को आंककर हम वायरस के जीवित रहने के लिए अनुकूल और प्रतिकूल स्थिति का पता लगा सकते हैं। सीएसआईआर, कोलकाता की वैज्ञानिक उपासना राय का कहना है कि वायरस में म्यूटेशन एक सामान्य प्रक्रिया है। वे कहती हैं कि वायरस खुद को जीवित रखने के लिए हर कोशिश करता है और ये उसी प्रक्रिया हिस्सा है। एजेंसी
विज्ञापन
विज्ञापन


1347 सैंपल के अध्ययन के बाद दावा
वैज्ञानिकों ने पहले चरण के अध्ययन में चीन, जर्मनी, मलयेशिया, ब्रिटेन और अमेरिका से जुटाए गए 1347 सैंपल के जीनोम का अध्ययन किया है। इसी तरह दूसरे चरण में भारत में नवंबर 2020 से मई 2021 के बीच 1798 सैंपल की जांच की। वैज्ञानिकों का कहना है कि वायरस अगर अपने स्पाइक प्रोटीन में बदलाव करता है तो वो मौजूदा टीकों को प्रभावित कर सकता है।

तमिलनाडु के सीरो सर्वे में 66 फीसदी में मिली एंटीबॉडी
तमिलनाडु में जुलाई में तीसरे सीरो सर्वेक्षण में 26 हजार से अधिक लिए गए नमूनों से पता चलता है कि कम से कम 66.2 फीसदी आबादी में सार्स-सीओवी-2 के प्रति रोग प्रतिरोधी क्षमता विकसित हो गई है। इसी वायरस के कारण कोविड-19 होता है। 26,610 नमूनों में से 17,624 में सार्स-कोव-2 के खिलाफ आईजीजी (इम्यूनोग्लोबुलिन जी) प्रतिरोधी क्षमता विकसित हुई है।


राज्य के 888 क्लस्टर में जन स्वास्थ्य एवं प्रीवेंटिव चिकित्सा निदेशालय की तरफ से कराए गए सीरो सर्वेक्षण में यह जानकारी सामने आई। इसके मुताबिक कुल सीरो प्रबलता जहां 66.2 फीसदी रही वहीं सर्वाधिक सीरो पॉजिटिविटी विरुधुनगर जिले में 84 फीसदी थी, जबकि के इरोड में सबसे कम 37 फीसदी रही। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed