फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   vande mataram is compulsory in all school of tamilnadu

मद्रास हाईकोर्ट: तमिलनाडु के स्कूलों में वंदे मातरम गाना अनिवार्य

Wed, 26 Jul 2017 02:50 AM IST
एजेंसी, चेन्नई
एजेंसी, चेन्नई Updated Wed, 26 Jul 2017 02:50 AM IST
विज्ञापन
vande mataram is compulsory in all school of tamilnadu
madras highcourt

मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के सभी स्कूलों और सरकारी व निजी संस्थानों में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को अनिवार्य कर दिया है। न्यायमूर्ति एम वी मुरलीधरन ने अपने आदेश में कहा कि राज्य के सभी निजी और सरकारी स्कूलों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके यहां छात्र सप्ताह में कम से कम दो बार सोमवार और शुक्रवार को राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम गाएं। 

विज्ञापन


न्यायमूर्ति मुरलीधरन ने कहा कि अन्य सरकारी और निजी प्रतिष्ठानों में भी महीने में कम से कम एक बार राष्ट्रीय गीत गाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर लोगों को बंगाली या संस्कृत में यह गीत गाने में कठिनाई हो रही हो तो तमिल में इसका अनुवाद करने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति किसी वैध कारण की वजह से राष्ट्रीय गीत गाने में असमर्थ हो तो उसे इसके लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। न्यायमूर्ति ने कहा कि युवा ही इस देश के भविष्य हैं और न्यायालय को विश्वास है कि इस आदेश को सही भाव और उत्साह के साथ पालन किया जाएगा। 
विज्ञापन
विज्ञापन


दरअसल न्यायालय ने वीरामनी द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश सुनाया। बीटी असिस्टेंट पद के लिए आयोजित परीक्षा में परीक्षा में वंदे मातरम की भाषा से संबंधित एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने लिखा था कि राष्ट्रीय गीत बांग्ला में लिखा गया था। इस वजह से वह इस परीक्षा में फेल हो गए थे।

इस संबंध में मद्रास उच्च न्यायालय ने राज्य के महाधिवक्ता से राष्ट्रीय गीत की भाषा स्पष्ट करने को कहा था। 13 जुलाई को अधिवक्ता ने न्यायालय के समक्ष कहा कि वंदे मातरम की भाषा संस्कृत है, लेकिन इसकी रचना बांग्ला में की गई थी।

1950 में बना राष्ट्रीय गीत

vande mataram is compulsory in all school of tamilnadu
vande mataram

प्रख्यात उपन्यासकार बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा 1876 में रचित वंदे मातरम को 24 जनवरी 1950 को राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया। स्वतंत्रता संग्राम में इस गीत ने काफी निर्णायक भूमिका अदा की। लेकिन जब राष्ट्रगान के चयन की बात आई तो वंदे मातरम पर मुसलमानों की आपत्ति की वजह से इसके स्थान पर रवींद्र नाथ टैगोर द्वारा लिखे गए जन गण मन को वरीयता दी गई।

आजादी के बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद के प्रस्ताव पर संविधान सभा में वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया। शुरुआत में इसके केवल दो ही पद रचे गए थे, जो संस्कृत में थे। बाद में आगे का हिस्सा बंगाली में लिखा गया। 

राष्ट्रगीत अनिवार्य करने की पहले भी हुई कोशिश
अगस्त 2006 में लोकसभा में वंदेमातरम्... को सभी स्कूलों में अनिवार्य करने के मसले पर बहस छिड़ी थी। तब सत्तारुढ़ यूपीए और विपक्षी दलों ने 7 सितंबर 2006 को राष्ट्रगान के 125वें वार्षिक समारोह पर इसे स्वेच्छा से गाने की पैरवी की थी।

एक दशक बाद 2017 में राष्ट्रगान की तर्ज पर राष्ट्रीय गीत बजाने के लिए 17 फरवरी, 2017 को सुप्रीम कोर्ट में दिशानिर्देश जारी करने की गुहार लगाई गई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को ठुकराते हुए कहा था कि ऐसा कोई कानून नहीं है जो राष्ट्रीय गीत के सिद्धेांत को स्वीकार करता हो। दरअसल इस याचिका से पहले 30 नवंबर 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने सिनेमा हॉल में हर फिल्म के पहले राष्ट्रगान बजाने को अनिवार्य किया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed