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वचाथी मामला: हाईकोर्ट ने बरकरार रखा निचली अदालत का फैसला, दुष्कर्म पीड़ितों को मुआवजा देने का निर्देश

Fri, 29 Sep 2023 02:12 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: नितिन गौतम Updated Fri, 29 Sep 2023 02:12 PM IST
सार

जस्टिस पी वेलुमुरुगन ने निर्देश दिया कि दुष्कर्म पीड़ित 18 महिलाओं को 10 लाख रुपये का मुआवजा भी दिया जाए। अदालत के आदेश के अनुसार, मुआवजे की आधी रकम यानी कि पांच लाख रुपये दोषियों से वसूली जाएगी। 

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vachathi atrocity madras high court uphold conviction of 215 persons order for compensation for rape victims
मद्रास हाईकोर्ट

विस्तार

मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को वचाथी अत्याचार मामले में निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें 215 लोगों को आदिवासियों पर अत्याचार और महिलाओं से दुष्कर्म का दोषी ठहराया गया था। बता दें कि वन विभाग के अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने तमिलनाडु के वचाथी इलाके में चंदन तस्करी के आरोप में आदिवासी इलाके में छापेमारी की थी और इस दौरान आदिवासी महिलाओं से दुष्कर्म और मारपीट की घटना को अंजाम दिया था। उच्च न्यायालय ने पीड़ितों को मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है।
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हाईकोर्ट ने दिया पीड़ित महिलाओं को मुआवजा देने का आदेश
मद्रास उच्च न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए लोगों की याचिका को खारिज कर दिया। जस्टिस पी वेलुमुरुगन ने निर्देश दिया कि दुष्कर्म पीड़ित 18 महिलाओं को 10 लाख रुपये का मुआवजा भी दिया जाए। अदालत के आदेश के अनुसार, मुआवजे की आधी रकम यानी कि पांच लाख रुपये दोषियों से वसूली जाएगी। निचली अदालत ने 1992 में घटी इस घटना में 126 वनकर्मियों जिनमें चार वन सेवा के अधिकारी भी शामिल थे, राजस्व विभाग के 84 पुलिसकर्मियों को वचाथी अत्याचार मामले में दोषी माना था। अदालत ने दोषियों को एक से लेकर दस साल तक की जेल की सजा सुनाई थी। 
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क्या है वचाथी अत्याचार मामला
बता दें कि वचाथी अत्याचार की घटना ने पूरे तमिलनाडु समेत देश को हिलाकर रख दिया था। घटना के 269 आरोपियों में से 54 की मौत सुनवाई के दौरान ही हो गई थी। 20 जून 1992 को 155 वन कर्मियों, 108 पुलिसकर्मियों और छह राजस्व अधिकारियों की एक टीम वचाथी के आदिवासी बहुल गांव में तस्करी की गई चंदन की लकड़ी की तलाश में पहुंची। इस दौरान आदिवासियों से कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन के बारे में पूछताछ की गई। आरोप है कि तलाशी के बहाने अधिकारियों ने आदिवासियों की संपत्तियों को नष्ट किया, ग्रामीणों से मारपीट की और गांव की महिलाओं से दुष्कर्म किया। 
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