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टीकों की बर्बादी: अब तक 44 लाख से ज्यादा वैक्सीन खुराक हो गई बेकार, जानिए क्यों हुआ ऐसा
Tue, 20 Apr 2021 05:06 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Tue, 20 Apr 2021 05:06 PM IST
सार
- अब तक 12 करोड़ से ज्यादा को लगे टीके
- एक मई से कई गुना बढ़ेगी रफ्तार
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बुजुर्ग को टीका लगाती स्वास्थ्यकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
देश में एक और जहां कोरोना महामारी सिर उठाए हुए हैं और उससे बचाव के इंतजाम कम पड़ रहे हैं, वहीं लाखों कोरोना टीकों के बर्बाद होने की हैरान करने वाली खबर आई है। देश में अब तक वैक्सीन की 44 लाख खुराक बर्बाद हो गई है।
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सूचाना के अधिकार के तहत दायर एक आरटीआई अर्जी में यह जानकारी सामने आई है। बता दें, इस साल 16 जनवरी से देश में कोरोना के खिलाफ महाटीकाकरण अभियान शुरू हुआ है, लेकिन बीते तीन माह में ही 44 लाख से ज्यादा खुराक नष्ट होना चिंता पैदा करता है।
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देश में अब तक 12,71,00,000 लोगों को टीके लगाए जा चुके हैं। सरकार ने 1 मई से 18 साल से उम्र के सभी लोगों को टीके लगाने का निर्णय किया है। ऐसे में अब टीकाकरण की रफ्तार और तेज होना तय है।
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तमिलनाडु में सबसे ज्यादा खराब हुए
आरटीआई के तहत केंद्र सरकार द्वारा दिए गए जवाब के अनुसार 44 लाख टीकों की खुराक में से तमिलनाडु में सबसे ज्यादा 12.01 फीसदी की बर्बादी हुई। इसके बाद हरियाणा का नंबर है, वहां 9.74 फीसदी, पंजाब में 8.12 फीसदी, मणिपुर में 7.8 फीसदी, तेलंगाना में 7.55 फीसदी खुराक बेकार हुई।
बंगाल समेत इन राज्यों में कम बर्बादी
आरटीआई जानकारी के मुताबिक अंडमान एवं निकोबार, दमन एवं दीव, गोवा, हिमाचल प्रदेश, केरल, लक्षद्वीप, मिजोरम और पश्चिम बंगाल में कोरोना खुराक की सबसे कम बर्बादी हुई।
आखिर क्यों हुआ ऐसा
टीकाकरण अभियान से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि शुरुआत में लोगों ने टीके लगवाने में कम रुचि ली। टीकाकरण केंद्रों पर कम लोग पहुंचते थे। टीके की एक शीशी में 10 से 12 लोगों को खुराक दी जा सकती है। एक बार शीशी खोलने के बाद करीब आधे घंटे में उसका पूरा इस्तेमाल हो जाना चाहिए। यदि इस तय समय वॉयल का पूरा इस्तेमाल नहीं हुआ तो वह बेकार हो जाती है।