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Vaccination: जिन्हें लगा ‘नकली’ टीका, उन्हें प्रमाण पत्र सहित मिलेगी प्राथमिकता
Wed, 09 Jun 2021 05:29 AM IST
Amit Mandal
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 09 Jun 2021 05:29 AM IST
सार
- परीक्षण के दौरान प्लेसबो लेने वालों को सबसे पहले उसी केंद्र पर मिलेगा वैक्सीन
- परीक्षण में शामिल लोगों को मिलेगा प्रमाण पत्र, आदेश जारी
- भारत बॉयोटेक सहित सभी कंपनियों के लिए दिए निर्देश
- करीब एक लाख से ज्यादा लोगों को मिली राहत
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टीकाकरण
- फोटो : पेक्सेल्स
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विस्तार
कोरोना वैक्सीन के परीक्षण में जिन लोगों को नकली वैक्सीन यानी प्लेसबो दिया गया था अब उन्हें टीकाकरण में प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही इनकी दो खुराक पूरी होने पर इन्हें प्रमाण पत्र भी उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए फॉर्मा कंपनी और जिस अस्पताल में परीक्षण हुआ, वहां का प्रबंधन जिम्मेदार होगा।
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जानकारी के अनुसार भारत में अभी तक वैक्सीन परीक्षण को लेकर करीब एक लाख से अधिक लोग हिस्सा ले चुके हैं। इन लोगों ने पिछले वर्ष भारत बायोटेक की कोवाक्सिन और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के कोविशील्ड वैक्सीन के पहले, दूसरे और तीसरे चरण के परीक्षण में हिस्सा लिया था। इस दौरान एक समूह को वैक्सीन की असली खुराक दी गई थी तो दूसरे समूह को प्लेसबो दिया था जो एक प्रकार का तरल पदार्थ होता है लेकिन वैक्सीन नहीं होती है। यह पूरी प्रक्रिया बैच नंबर के आधार पर चलती है जिसके बारे में कंपनी के अलावा अन्य किसी के पास जानकारी नहीं होती है। यहां तक कि वैक्सीन लगाने वाले को भी नहीं पता होता कि यह असली है या फिर प्लेसबो।
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ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया की विशेषज्ञ समिति (एसईसी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि परीक्षण में शामिल लोगों को अलग से वैक्सीन लेने की जरूरत नहीं है। इन लोगों को वैक्सीन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी फॉर्मा कंपनियों की है। इसलिए जो लोग परीक्षण में शामिल हुए थे और उन्हें नहीं पता कि वैक्सीन लगा था या नहीं। ऐसे लोग उक्त केंद्र या अस्पताल में जाकर जानकारी ले सकते हैं और आगे की प्रक्रिया के बारे में भी पूछताछ कर सकते हैं।
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अभी तक देश में भारत बायोटेक, सीरम इंस्टीट्यूट, जायडस कैडिला, बायोलॉजिकल ई, जेनोवा, स्पूतनिक वी सहित कई वैक्सीन के परीक्षण पूरे किए जा चुके हैं। भारत बायोटेक के तीनों चरणों में करीब 35 हजार लोगों को परीक्षण में शामिल किया था। जबकि कोविशील्ड और स्पूतनिक वी के लिए दूसरा और तीसरा चरण का परीक्षण ही हुआ था जिनमें करीब 20 हजार लोग शामिल हुए थे। जायडस कैडिला का हाल ही में तीसरा परीक्षण पूरा हुआ है जिसमें करीब 18 हजार लोगों ने हिस्सा लिया था। अभी और भी वैक्सीन के परीक्षण चल रहे हैं इसलिए ये दिशा निर्देश उनके लिए भी लागू होंगे।
दिल्ली एम्स ने शुरू किया टीकाकरण
दिल्ली एम्स के अनुसार पिछले साल से अब तक उनके यहां भारत बायोटेक के कोवाक्सिन के परीक्षण किए जा चुके हैं। इनके लिए करीब दो हजार लोगों को शामिल किया गया। जिन लोगों को उस दौरान प्लेसबो मिला था उन्हें फोन करके अस्पताल बुलाया जा रहा है और वैक्सीन दी जा रही है। वहीं जिन लोगों को परीक्षण के दौरान असली वैक्सीन दी गई है उन लोगों से फोन पर आधार कार्ड मांगा जा रहा है जिसके आधार पर उन्हें प्रमाण पत्र मिलेगा। एम्स के अनुसार प्रमाण पत्र फॉर्मा कंपनियों के जरिए उपलब्ध कराया जाएगा जिसकी पूरी जानकारी कोविन प्लेटफॉर्म पर भी होगी। इस जानकारी के बाद कोविन वेबसाइट पर भी उन लोगों की सूचना दर्ज कर ली जाएगी।