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टीकाकरण: सरकार ने कहा, कोविन ऐप को नहीं किया जा सकता हैक

Sun, 30 May 2021 08:52 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Sun, 30 May 2021 08:52 AM IST
सार

  • टीकाकरण के खिलाफ फैलाए जा रहे दुष्प्रचार का सरकार ने किया खंडन
  •  कोविन ऐप में प्रवेश के लिए अनिवार्य ओटीपी व कैप्चा को ही बाईपास नहीं किया जा सकता है
  • टीकाकरण: 17 फीसदी भारतीय लगवा चुके हैं कोरोना टीके की एक खुराक

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Vaccination 17 percent of Indians have been taken a dose of Corona vaccine
भारत में टीकाकरण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्र सरकार ने टीकाकरण के खिलाफ फैलाए जा रहे दुष्प्रचार के खंडन का अभियान शनिवार को भी जारी रखा। सरकार ने दावा किया कि अब तक देश में टीकाकरण कार्यक्रम की शर्तों के दायरे में आने वाले 17.67 फीसदी लोगों को टीके की कम से कम एक खुराक दी जा चुकी है। सरकार ने उन मीडिया रिपोर्ट का भी खंडन किया, जिनमें दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान के प्रभावी संचालन के लिए बनाई गई कोविन एप के हैक हो जाने के कारण टीका स्लॉट नहीं मिलने का दावा किया गया था। सरकार ने कहा कि इस एप को न तो हैक किया जा सकता है और न ही इसमें प्रवेश के लिए अनिवार्य ओटीपी व कैप्चा को ही बाईपास किया जा सकता है।

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कोविड-19 (कोरोना वायरस) पर वार के लिए गठित अधिकार प्राप्त समूह (तकनीक व डाटा प्रबंधन) के अध्यक्ष डॉ. आरएस शर्मा ने कहा, कोविन भारत में टीकाकरण अभियान की तकनीकी रीढ़ है, जिसमें टीकाकरण प्रक्रिया के सभी पहलू शामिल हैं। कोविन एप पर टीकाकरण स्लॉट उपलब्ध नहीं होने की शिकायत 28 अप्रैल को 18 से 44 साल के आयुवर्ग के लिए भी पंजीकरण खोल देने के बाद शुरू हुई। इस आयु वर्ग में मांग और टीका आपूर्ति के अंतर का अनुपात किसी भी हैरान कर सकता है।
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शर्मा के मुताबिक, अब तक 24.4 करोड़ लोगों के पंजीकरण हो चुके हैं, जिनमें से 16.7 करोड़ लोगों को कम से कम एक खुराक दी जा चुकी है। इस हिसाब से 1.37 अरब भारतीयों में से 12.21 फीसदी तक कम से कम एक खुराक पहुंच चुकी है और फिलहाल हर आठ भारतीयों में से एक टीके की सुरक्षा में आ चुका है। लेकिन यदि सही मायने में केवल 18 प्लस उम्र वाले 94 करोड़ लोगों के हिसाब से देखें तो हर 11 में से दो भारतीय यानी करीब 17.67 फीसदी लोगों को अब तक टीके की एक खुराक मिल चुकी है। इतनी बड़ी संख्या में रियल टाइम डाटा के प्रबंधन में कोविन प्लेटफार्म की अहम भूमिका है, जिस पर एक राज्य में किसी जिले के स्तर तक का डाटा देखा जा सकता है।
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टीका स्लॉट दिलाने के नाम पर ठगी करने वालों से सावधान
डॉ. आरएस शर्मा ने कहा कि कोविन एप पर थर्ड पार्टी डेवलपर्स को केवल एपीआई तक ही पहुंच दी गई है। प्लेटफार्म पर सुरक्षा के नजरिये से सभी परीक्षण बेहद गंभीरता से किए गए हैं। उन्होंने कहा, यदि कोई भी आदमी हैकर्स को 400 से 3000 रुपये तक देकर इस एप में घुसने में सक्षम होता तो हम अब तक ऑनलाइन पंजीकरण के जरिये 9 करोड़ से ज्यादा टीके लगाने में सक्षम नहीं हो पाते। उन्होंने ऐसे धोखेबाजों से सावधान रहने और उन्हें कोई पैसा नहीं देने की अपील सभी से की। 


जल्द 14 स्थानीय भाषाओं में हो पाएगा पंजीकरण
डॉ. शर्मा ने बताया कि कोविन एप पर पंजीकरण की प्रक्रिया को सभी के लिए ज्यादा से ज्यादा आसान बनाने के क्रम में जल्द ही इस पर 14 स्थानीय भाषाओं की सुविधा शुरू हो जाएगी। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए देश में 2.5 लाख से ज्यादा सामुदायिक सेवा केंद्रों (सीएससी) को भी पंजीकरण करने का अधिकार दिया है। साथ ही कोविन एप में महज एक फोन कॉल के जरिये प्रवेश पाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के साथ मिलकर एक कॉल सेंटर स्थापित करने की प्रक्रिया भी जारी है। ऑनलाइन पंजीकरण नहीं करा पाने वालों के लिए टीका केंद्रों पर ऑफलाइन पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है, जिसके जरिये 1.10 करोड़ से ज्यादा खुराक लगाई जा चुकी हैं।

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