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Uttarakhand tunnel ops: श्रमिकों की सकुशल वापसी से भाजपा को मिल सकता है मोदी की श्रमिक हितैषी छवि का फायदा!

Wed, 29 Nov 2023 04:11 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Wed, 29 Nov 2023 04:11 PM IST
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सार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रमिकों को बाहर निकालने के ऑपरेशन में जिस तरह की सक्रियता दिखाई है, उस तरह की सक्रियता इस तरह के मामलों में किसी प्रधानमंत्री के स्तर पर कभी नहीं देखी गई। उन्होंने न केवल अपने केंद्रीय मंत्रियों नितिन गडकरी और वीके सिंह को इस ऑपरेशन में लगातार मोर्चे पर सक्रिय रखा, बल्कि प्रधानमंत्री कार्यालय से दो विशेष अधिकारी नियुक्त कर दिए, जो इस पूरे ऑपरेशन पर बहुत करीब से निगाह रख रहे थे...
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Uttarakhand tunnel ops: BJP got a lifeline due to PM Modi worker-friendly image strengthened
Uttarakhand tunnel ops - फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht

विस्तार

उत्तरकाशी की सुरंग में दिवाली के दिन से फंसे 41 श्रमिकों को आखिरकार 17 दिनों के बाद सकुशल बाहर निकाल लिया गया। इससे श्रमिकों के परिवारों में दीपावली के त्योहार जैसा खुशी का माहौल है, तो वहीं केंद्र-राज्य सरकार ने भी राहत की सांस ली है। यदि दुर्भाग्य से सुरंग में फंसे श्रमिकों के साथ कुछ गलत हो जाता, तो इससे चुनावी समय में भाजपा को बड़ा नुकसान होता। प्रधानमंत्री मोदी एक बार फिर विपक्ष के निशाने पर होते और उन्हें लेकर विपक्ष की ओर से तमाम बयान दिए जाते। श्रमिकों के सकुशल बचाव के बाद भी वह इसे सरकार की लापरवाही और मानवीय गलती के कारण हुई त्रासदी बताकर भाजपा को निशाने पर लेने की कोशिश कर ही रहा है।

फिलहाल श्रमिकों के सुरक्षित बचाव अभियान ने विपक्ष को यह अवसर नहीं दिया है। उलटे बचाव अभियान को जिस कुशलता के साथ आगे बढ़ाया गया, उससे केंद्र और राज्य सरकार की प्रशासनिक कुशलता सामने आई है। प्रधानमंत्री ने इस पूरे अभियान में अपनी जो सतर्कता दिखाई है, उससे उनकी श्रमिक हितैषी छवि मजबूत हुई है। जाहिर है कि इससे वे गरीबों, विशेषकर श्रमिकों के बीच और अधिक लोकप्रिय होंगे। इसके पहले कोरोना काल में भी वे गरीबों-श्रमिकों के साथ डटकर खड़े रहे और उन्हें सकुशल उनके घर पहुंचाने और पूरे कोरोना काल में राशन उपलब्ध कराने का काम किया था। इस मिशन में उन्होंने एक बार फिर अपनी उसी छवि को मजबूत किया है, जिसमें वे गरीबों-श्रमिकों के लिए हर समय डटकर खड़े रहते हैं। जाहिर है कि भाजपा को इसका लाभ मिल सकता है।



पूरी तरह सक्रिय रहे प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रमिकों को बाहर निकालने के ऑपरेशन में जिस तरह की सक्रियता दिखाई है, उस तरह की सक्रियता इस तरह के मामलों में किसी प्रधानमंत्री के स्तर पर कभी नहीं देखी गई। उन्होंने न केवल अपने केंद्रीय मंत्रियों नितिन गडकरी और वीके सिंह को इस ऑपरेशन में लगातार मोर्चे पर सक्रिय रखा, बल्कि प्रधानमंत्री कार्यालय से दो विशेष अधिकारी नियुक्त कर दिए, जो इस पूरे ऑपरेशन पर बहुत करीब से निगाह रख रहे थे। उन्होंने हर पल सतर्कता अभियान का जायजा लिया और केंद्र से हर संभव सहायता तुरंत उपलब्ध कराई। विदेश से विशेषज्ञों को बुलाने का मामला रहा हो या श्रमिकों की रिहाई के बाद उनका बचाव करने का काम, पीएमओ इस मिशन में पूरी तरह डटा रहा।

स्वयं प्रधानमंत्री लगातार इस मामले में सतर्क रहे। वे प्रधानमंत्री कार्यालय के अपने अधिकारियों के साथ-साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से लगातार मामले की जानकारी लेते रहे। श्रमिकों की रिहाई के बाद भी उन्होंने तुरंत खुशी में ट्वीट किया और उनसे बातचीत की। किसी प्रधानमंत्री की ओर से इस तरह की सक्रियता लोगों के बीच भरोसा पैदा करती है। इस ऑपरेशन ने भी एक बार फिर मोदी की जनहितैषी छवि को मजबूत करने का काम किया है। माना जा रहा है कि उन्हें इसका भी लाभ मिल सकता है।

यह कोई पहली बार नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी ने श्रमिकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की हो। इसके पहले भी कुंभ के सफल आयोजन के बाद प्रयागराज में उन्होंने श्रमिकों के पैर धुलकर उनका सम्मान किया था। इसी प्रकार अपने चुनाव क्षेत्र काशी में उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण के बाद श्रमिकों के साथ बैठकर भोजन किया था। वे समय-समय पर श्रमिकों के साथ इसी तरह जुड़कर उनका सम्मान करते रहते हैं और उनका मान बढ़ाते रहते हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के समय भी प्रधानमंत्री ने इसी तरह की पहल कर छात्रों की सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित कराई थी।

कोरोना काल में जब पूरी दुनिया ठप पड़ गई थी, तब देश के अलग-अलग हिस्सों से करोड़ों श्रमिकों को अपने घर वापस लौटना पड़ा था। इस दौरान प्रधानमंत्री ने न केवल श्रमिकों को उनके घर सुरक्षित पहुंचाने का काम किया, बल्कि पूरे कोरोना काल में उन्हें खाने-पीने की कोई कमी न हो, इसका ध्यान रखा। उस दौरान शुरू की गई राशन योजना अब तक जारी है। प्रधानमंत्री के ये पहल उन्हें लोगों के बीच लोकप्रियता दिलाती हैं।

हालांकि, इसी बीच कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों ने सरकार के कामों की आलोचना भी की है। विपक्षी दलों ने कहा है कि सरकारों की लापरवाही के कारण ही 41 श्रमिकों की जान सांसत में फंसी। श्रमिकों को इस स्थिति में लाने की जिम्मेदार भाजपा सरकार है।

विपक्ष की आलोचना आधारहीन- भाजपा

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने अमर उजाला से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूरे राजनीतिक जीवन में इस तरह की कई घटनाएं घटी हैं, जब जनता किसी संकट में घिरी है। लेकिन हर बार प्रधानमंत्री ने यह दिखाया है कि वे जनता के दुख-दर्द में हमेशा डटकर साथ खड़े रहते हैं और समस्या को सुलझाने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। वे कभी हिम्मत नहीं हारते और समस्या के समाप्त होने तक उसे सुलझाने का प्रयास करते रहते हैं।

उन्होंने कहा कि इस बार भी जब तक श्रमिकों को सकुशल बचाने का ऑपरेशन चला, प्रधानमंत्री लगातार इसकी जानकारी लेते रहे। अपने चुस्त-दुरुस्त अधिकारियों को मोर्चे पर समस्या का हल होने तक लगाए रखा और मंत्रियों को भी पूरा सहयोग देने का निर्देश दिया। उन्होंने स्वयं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से हर मामले का अपडेट लिया। यह दिखाता है कि प्रधानमंत्री लोगों के साथ किस तरह स्वयं को जोड़कर देखते हैं और उनकी यही कोशिश उन्हें दुनिया का सबसे लोकप्रिय नेता बना देता है।

उन्होंने कहा कि इस मामले पर बेहद सफाई के साथ चले पूरे ऑपरेशन और श्रमिकों की सकुशल रिहाई के बाद भी जिस तरह विपक्ष हमला कर रहा है, उससे यही समझ आता है कि उसके पास रचनात्मक विरोध की कोई सोच नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की इस तरह की सोच दुर्भाग्यपूर्ण है।

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