फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Uttarakhand CM Trivendra Singh Rawat relieved from Supreme Court, court bans CBI investigation

उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को सुप्रीम कोर्ट से राहत, सीबीआई जांच पर रोक

Thu, 29 Oct 2020 01:53 PM IST
अनवर अंसारी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: अनवर अंसारी Updated Thu, 29 Oct 2020 01:53 PM IST
विज्ञापन
Uttarakhand CM Trivendra Singh Rawat relieved from Supreme Court, court bans CBI investigation
त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को बड़ी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने उनके खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की सीबीआई जांच का आदेश देने संबंधी नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश पर गुरुवार को रोक लगा दी। यह मामला रावत के मुख्यमंत्री बनने से पहले का है। 

विज्ञापन

दो पत्रकारों ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2016 में झारखंड के  'गौ सेवा आयोग' के अध्यक्ष पद पर एक व्यक्ति की नियुक्ति का समर्थन करने के लिए रावत के रिश्तेदारों के खातों में धन अंतरित किया गया था। उस वक्त त्रिवेंद्र सिंह भाजपा के झारखंड प्रभारी थे। 
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मुख्यमंत्री को सुने बगैर ही हाईकोर्ट द्वारा इस तरह का सख्त आदेश देने से सब चकित रह गए क्योंकि पत्रकारों की याचिका में रावत के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध भी नहीं किया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन





रावत की ओर से अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा सुनवाई के दौरान कहा कि मुख्यमंत्री का पक्ष सुने बगैर प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकती और इस तरह का आदेश निर्वाचित सरकार को अस्थिर करेगा। वेणुगोपाल ने पीठ से कहा, एक निर्वाचित सरकार को इस तरह से अस्थिर नहीं जा सकता। सवाल यह है कि पक्षकार को सुने बगैर ही क्या स्वत: ही इस तरह का आदेश दिया जा सकता है।

नैनीताल हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ आरोपों की प्रकृति पर विचार करते हुए सच को सामने लाना उचित होगा। यह राज्य के हित में होगा कि संदेह दूर हो। इसलिए मामले की जांच सीबीआई करे।
हाईकोर्ट ने यह फैसला दो पत्रकारों-उमेश शर्मा और शिव प्रसाद सेमवाल की दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनाया था। इन याचिकाओं में पत्रकारों ने इस साल जुलाई में अपने खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई प्राथमिकी को रद्द करने का आग्रह किया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed