फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Uttar Pradesh minister said - Ayodhya is for Hindus and Supreme Court too, Chief Justice got angry

योगी के मंत्री ने कहा- अयोध्या हिंदुओं का और सुप्रीम कोर्ट भी, चीफ जस्टिस बोले- ऐसा नहीं कहना चाहिए

Fri, 13 Sep 2019 03:47 AM IST
निलेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: निलेश कुमार Updated Fri, 13 Sep 2019 03:47 AM IST
सार

  • चीफ जस्टिस ने बयान की निंदा की, कोर्ट ने कहा दोनों पक्ष निर्भीक होकर दलीलें पेश करें
  • अयोध्या मामले पर सुनवाई के दौरान यूपी के मंत्री के बयान का मामला उठा
  • चीफ जस्टिस ने बयान की निंदा की, कोर्ट ने कहा दोनों पक्ष निर्भीक होकर दलीलें पेश करें
  • मुस्लिम पक्ष ने कहा, गैरकानूनी काम केआधार पर नहीं ठोका जा सकता दावा

विज्ञापन
Uttar Pradesh minister said - Ayodhya is for Hindus and Supreme Court too, Chief Justice got angry
supreme court

विस्तार

अयोध्या मामले की सुनवाई के दौरान वृहस्पतिवार को मुस्लिम पक्षकार के वकील राजीव धवन ने कहा कि इस मामले में पेश होने के कारण उन्हें फेसबुक पर धमकी मिल रही है। साथ ही उन्होंने यूपी के मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा के उस बयान का भी हवाला दिया कि अयोध्या तो हिन्दुओं का है और सुप्रीम कोर्ट भी हमारा है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हम इस तरह के बयान की निंदा करते हैं। कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्ष बिना किसी दबाव के निर्भीक होकर अपनी दलीलें पेश करें।

विज्ञापन


धवन ने चीफ जस्टिस रंजन गोगई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ के समक्ष सुनवाई की 22वें दिन की शुरुआत इस बात से की कि उन्हें फेसबुक पर धमकी दी गई है। उनकेक्लर्क को कोर्ट परिसर में धमकाया गया है। धवन ने कहा कि माहौल सही नहीं लग रहा है। यूपी के मंत्री बयान दे रहे हैं कि अयोध्या तो हिन्दुओं की है और सुप्रीम भी उनका ही है। धवन ने कहा कि वह एक के बाद अवमानना याचिका दायर नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि वह हिन्दू आस्था के खिलाफ नहीं है। वह खुद भी कुछ मामलों में हिन्दू पक्षकारों की ओर से पेश हो चुके हैं।
विज्ञापन


इस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगई ने धवन से कहा कि आप इन बातों से प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि इस तरह का बयान किसी को नहीं देना चाहिए। दोनें पक्ष को बिना किसी दबाव केदलीलें पेश करनी चाहिए। चीफ जस्टिस ने धवन से सवाल किया कि क्या आप सुरक्षा चाहते हैं? जवाब में धवन ने कहा कि उन्हें सुरक्षा की जरूरत नहीं है, अदालत की टिप्पणी ही मेरे लिए काफी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

इसके बाद धवन ने कहा कि वह निर्मोही अखाड़ा के शेबियत(प्रबंधन व देखरेख का अधिकार) को चुनौती नहीं दे रहे है। हम यह मानते हैं कि 1858 से निर्मोही अखाड़ा बाहरी अहाते में पूजा करते थे। हमारा कहना है कि वर्ष 1946 में गुबंद केनीचे मूर्ति को रखा गया है, यह अवैध काम था। धवन ने कहा कि पहले यह यह अवैध काम करना नहीं चाहिए था। बाद में इसी अवैध काम के आधार पर वहां पर अधिकार का दावा नहीं ठोका जा सकता।

धवन ने कहा कि इस अवैध काम के कारण हमें उस जगह पर नमाज नहीं पढने दिया गया। धवन ने सवाल किया कि क्या इस अवैध काम के आधार पर वे(हिन्दू पक्ष) वहां पर दावा ठोक सकते हैं? पहले हिन्दू पक्ष मानते थे कि शुक्रवार को वहां पर नमाज पढ़ी जाती थी लेकिन अब वे इस बात से भी मुकर गए हैं। धवन ने कहा कि गैरकाननी काम कर कोई अधिकार का दावा नहीं कर सकता। कोई गलत हरकत का लाभ नहीं ले सकता।
 

सुनवाई केदौरान पीठ केसदस्य जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने सवाल किया कि क्या निर्मोही अखाड़े की याचिका पर सुनवाई की जानी चाहिए क्योंकि उनकेद्वारा निर्धारित समय के भीतर नहीं बल्कि बाद में याचिका दायर की है। जवाब ने कहा कि अगर लिमिटेशन(याचिका दायर करने केलिए समय सीमा) के आधार पर याचिका खारिज हो जाती है तो सवाल यह होगा  कि  ऐसी स्थिति मेंनिर्मोही अखाड़े को शेबियत का अधिकार का क्या होगा। हालांकि धवन ने कहा कि यह सही है 1885 से विवादित स्थल पर निर्मोही अखाड़ेळ् की मौजूदगी थी। धवन ने कहा कि वह निर्मोही अखाड़े शेबियत अधिकार को लेकर सहमत हैं। सुनवाई शुक्रवार को भी जारी रहेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed