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हाथरस की जंग को कांग्रेस और विपक्ष के खिलाफ हथियार बना रही है उत्तर प्रदेश सरकार

Tue, 06 Oct 2020 04:15 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 06 Oct 2020 04:15 PM IST
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Uttar Pradesh government could use investigative agencies against Congress and opposition in Hathras Case
पीड़ित परिवार से मिले राहुल और प्रियंका गांधी - फोटो : PTI (फाइल फोटो)

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कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी ने हाथरस में पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर राजनीतिक दलों में हलचल मचा दी थी। जानकारों ने इसे न केवल राहुल गांधी, बल्कि कांग्रेस के लिए भी एक राजनीतिक बढ़त वाला कदम बताया था। इन दोनों नेताओं के बाद दूसरे दलों के प्रतिनिधियों ने भी हाथरस की राह पकड़ ली है। पीड़ित परिवार के यहां से राहुल गांधी और प्रियंका जैसे ही दिल्ली के लिए रवाना हुए, मुख्यमंत्री योगी ने मामले की सीबीआई जांच कराने की घोषणा कर दी। भाजपा और योगी का ये साफ इशारा था कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। यहीं से राहुल गांधी और प्रियंका को घेरने की तैयारी शुरू हो गई है।

एडीजी प्रशांत कुमार कह चुके हैं कि 'पूर्व नियोजित साजिश के तहत कुछ राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने माहौल को खराब करने की कोशिश की है। यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय साजिश का शक जाहिर कर दिया गया। केंद्रीय जांच एजेंसी को भी सचेत कर दिया गया है। प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में इनपुट खंगालना शुरू कर दिया है। आरोप है कि हाथरस में हिंसा भड़काने के लिए इस्लामिक देशों से फंड मिला है। सूत्रों के अनुसार, ईडी मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर सकती है।

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राहुल और प्रियंका गांधी वाड्रा के हाथरस से लौटने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने तरकश से कई तीर निकाले थे। पहला, मामले को सीबीआई के हवाले कर दिया। दूसरा, हाथरस में हिंसा भड़काने की साजिश का खुलासा कर दिया। तीसरा, इस्लामिक देशों से मिले फंड के आधार पर हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी। चौथा, उत्तर प्रदेश पुलिस ने राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं को माहौल खराब करने के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया।

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खास बात ये है कि उक्त सभी कदम तब उठाए गए, जब कांग्रेस नेता राहुल और प्रियंका गांधी, हाथरस के पीड़ितों से मिल कर वापस लौट चुके थे। 19 साल की दलित युवती के साथ कथित गैंगरेप और हत्या के मामले को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार पहले से ही कड़ी आलोचना का शिकार हो रही थी। पोस्टमार्टम के बाद परिजनों की सहमति के बिना ही पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। विपक्षी दलों ने योगी सरकार को इस मुद्दे पर भी जमकर घेरा।


चारों तरफ से जब आलोचनाएं होने लगी तो उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले में 'बड़ी साजिश' का आरोप लगा दिया। पुलिस महकमे के एडीजी ने कह दिया कि ये सब प्रदेश में माहौल बिगाड़ने का प्रयास है। आठ शहरों में 19 मामले दर्ज कर दिए गए। कुछ गिरफ्तारी भी की गई हैं। पीड़िता के परिवार पर गलत बयान देने के एवज में कथित तौर पर 50 लाख रुपये की पेशकश किए जाने की बात भी सामने आई है।

एडीजी प्रशांत कुमार ने कहा, हाथरस मामले में पूर्व नियोजित साजिश के तहत आम लोगों को भड़काने का भी काम किया जा रहा है। सोशल मीडिया और पोस्टरबाजी की आड़ में माहौल खराब करने की कोशिशें हो रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस मामले में अपने विरोधियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने विपक्षी दलों पर हाथरस मामले को लेकर राजनीति करने और सांप्रदायिक दंगा भड़काने की साजिश रचने का आरोप लगाया।

 

उन्होंने कहा कि इस दंगे की वजह से प्रदेश में विकास रुकेगा। इसकी आड़ में विपक्ष को अपनी रोटियां सेंकने का मौका मिलेगा। केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी के सूत्रों का कहना है कि इस मामले में सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। हाथरस में हिंसा भड़काने के लिए कोई साजिश रची गई है और क्या उसके लिए इस्लामिक देशों से आर्थिक मदद मिली है। इस बाबत जांच हो रही है।

 

उत्तर प्रदेश पुलिस ने जो मामला दर्ज किया है, उसके आधार पर आगे बढ़ा जाएगा। मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत यदि केस दर्ज करने की जरूरत होगी तो वह किया जाएगा। इसमें एनजीओ और दूसरे संगठनों से पूछताछ  की जा सकती है। इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी एकत्रित किए जा रहे हैं। भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे दूसरे संगठनों की भी जांच हो सकती है। अगर उत्तर प्रदेश पुलिस और केंद्रीय एजेंसी की जांच में दंगे बाबत कुछ ठोस निकलता है तो भाजपा, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को राजनीतिक तौर पर घेर सकती है।

 

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