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BJP: बीजेपी की लिस्ट से सहयोगी 'गायब', योगीराज में ब्राह्मण-ठाकुर, पिछड़ा-दलित सबको हिस्सेदारी

Thu, 24 Oct 2024 03:32 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Thu, 24 Oct 2024 03:32 PM IST
सार

भाजपा ने सहयोगी दलों को सीट भले ही न छोड़ी हो, लेकिन उनके संबंधित समाजों से उम्मीदवार अवश्य उतारे गए हैं। इसका एक ही कारण है कि भाजपा टिकट तो अपने दम पर बांटना चाहती है, और अपने ही बल पर चुनाव जीतने का संकेत देना चाहती है, लेकिन वह ऐसा कोई संकेत नहीं देना चाहती जिससे समाजवादी पार्टी को यह कहने का अवसर मिले कि भाजपा ने इन समाजों की उपेक्षा की। 

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Uttar Pradesh Assembly Bypolls NDA Alliance Partners BJP Yogi Government Caste Maths know analysis news update
यूपी में विधानसभा उपचुनाव के लिए भाजपा का सहयोगियों को सीट देने पर बड़ा फैसला। - फोटो : PTI

विस्तार

भाजपा ने यूपी उपचुनाव को लेकर अपनी पहली सूची जारी कर दिया है। नौ सीटों पर होने जा रहे उपचुनाव में सात सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया गया है। इसमें समाज के सभी वर्गों को हिस्सेदारी देने की कोशिश की गई है। केवल सात सीटों में ब्राह्मण-ठाकुर, ओबीसी और दलित सबको हिस्सेदारी दी गई है। भाजपा की पहली सूची में सहयोगी दलों के लिए कोई जगह नहीं छोड़ी गई है। कटहरी विधानसभा सीट पर निषाद पार्टी अब तक चुनाव लड़ती आई थी, निषाद पार्टी ने इस चुनाव में भी इसको लेकर दावेदारी की थी, लेकिन भाजपा ने कटेहरी से धर्मराज निषाद को प्रत्याशी बनाने की घोषणा कर दी है। यानी निषाद पार्टी को फिलहाल बैक सीट पर बैठन के लिए कह दिया गया है। 
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अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल ने भी उपचुनाव में अपनी बड़ी दावेदारी की थी। वे अपनी पार्टी के लिए कम से कम दो सीटें लेने का दबाव बना रही थीं। निषाद पार्टी भी मझवां और कटहरी पर अपना दावा ठोंक रही थी। आरएलडी ने भी मीरापुर और एक खैर पर अपनी दावेदारी की थी। लेकिन भाजपा की पहली सूची में ही सभी सहयोगी दलों को संकेत दे दिया गया है कि पार्टी अपने बल पर चुनाव लड़ेगी। 
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भाजपा ने सहयोगी दलों को सीट भले ही न छोड़ी हो, लेकिन उनके संबंधित समाजों से उम्मीदवार अवश्य उतारे गए हैं। इसका एक ही कारण है कि भाजपा टिकट तो अपने दम पर बांटना चाहती है, और अपने ही बल पर चुनाव जीतने का संकेत देना चाहती है, लेकिन वह ऐसा कोई संकेत नहीं देना चाहती जिससे समाजवादी पार्टी को यह कहने का अवसर मिले कि भाजपा ने इन समाजों की उपेक्षा की। 
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यही कारण है कि अनुप्रिया पटेल को कोई टिकट न देने के बाद भी मझवां से सुचिस्मिता मौर्या को उतारकर मौर्या समाज को संतुष्ट करने की कोशिश की गई है। कटेहरी से निषाद पार्टी लगातार चुनाव लड़ती आई है, इस बार भी वह इस सीट पर अपना दावा ठोंक रही थी, लेकिन भाजपा ने यह सीट उसे नहीं दी। लेकिन इसके बाद भी इस सीट पर एक निषाद समाज के उम्मीदवार धर्मराज निषाद को उतारकर पार्टी ने इस समुदाय को संतुष्ट करने की कोशिश है। 

गाजियाबाद से संजीव शर्मा
गाजियाबाद सीट पर भाजपा ने अपने पुराने कार्यकर्ता संजीव शर्मा को मैदान में उतार दिया है। यह सीट भाजपा की परंपरागत सीट मानी जाती है। संजीव शर्मा के लिए गाजियाबाद से जीतना आसान हो सकता है, हालांकि समाजवादी पार्टी से सीधी लड़ाई हो जाने के कारण उनकी लड़ाई आसान नहीं रहने वाली है।   

भाजपा लंबे समय से यादव समाज को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है। उसने कई यादव नेताओं को प्रमोट कर इस समाज को अपनी ओर खींचने का भी प्रयास किया है। इस बार के उपचुनाव में भी उसने यादव बहुल करहल सीट पर अनुजेश यादव को मैदान में उतार दिया है। कुंदरकी से रामवीर सिंह ठाकुर और खैर (सुरक्षित सीट) से सुरेंद्र दिलेर को मैदान में उतारकर ठाकुर और दलितों को भी साथ लिया गया है।  

मीरापुर की सीट आरएलडी को
भाजपा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पहली सूची में घोषित सभी सीटों के अलावा अभी तीन सीटें बाकी हैं। इनमें मीरापुर की विधानसभा सीट राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के जयंत चौधरी के हिस्से में जाएगी। शेष अन्य सीटों पर सामाजिक समीकरणों का ध्यान रखते हुए गुरुवार या शुक्रवार सुबह तक उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया जाएगा।  


सबका साथ, सबका विश्वास- भाजपा
योगी आदित्यनाथ के लिए बेहद प्रतिष्ठा का चुनाव बन चुके इस उप चुनाव में समाज के सभी वर्गों को हिस्सेदारी दी गई है। क्या यह समाजवादी पार्टी के पीडीए प्लान को जवाब देने की कोशिश है? अमर उजाला के इस प्रश्न पर भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि भाजपा हमेशा से समाज के हर वर्ग को हिस्सेदारी देती आई है। वह सबके विश्वास और सबके विकास की बात करते हैं। यही कारण है कि भाजपा के संगठन से लेकर केंद्र और राज्य सरकारों में हर जगह समाज के सभी वर्गों को पर्याप्त हिस्सेदारी दी जाती है। इस उपचुनाव की लिस्ट में भी यही दिखाई दे रहा है। 
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