फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Using virus on children elderly for research is illegal New rules formed for controlled human infection study

CHIS: शोध के लिए बच्चों-बुजुर्गों पर वायरस का प्रयोग गैरकानूनी, नियंत्रित मानव संक्रमण अध्ययन का नियम तैयार

Thu, 20 Jul 2023 06:06 AM IST
जलज मिश्रा परीक्षित निर्भय, अमर उजाला
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला Published by: जलज मिश्रा Updated Thu, 20 Jul 2023 06:06 AM IST
सार

आगामी दिनों में यह सभी नियम नियंत्रित मानव संक्रमण अध्ययन (सीएचआईएस) पर लागू होंगे। नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने नियमों का मसौदा तैयार किया है जो न सिर्फ देश के मेडिकल कॉलेजों, बल्कि सभी शोध केंद्र और निजी कंपनियों पर लागू होगा।

विज्ञापन
Using virus on children elderly for research is illegal New rules formed for controlled human infection study
File Photo. - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

टीके या फिर किसी उपचार की खोज के लिए बच्चे, किशोर और बुजुर्गों पर वायरस का प्रयोग अब गैरकानूनी होगा। केवल 18 से 45 वर्ष की स्वस्थ आबादी पर ही ट्रायल किया जा सकेगा। ट्रायल में प्रतिभागी बनाने से पहले वैज्ञानिकों के दल या फिर फार्मा कंपनी को सभी का बीमा भी कराना होगा। साथ ही, अध्ययन के दौरान उन्हीं जीवित विषाणुओं से प्रतिभागियों को संक्रमित किया जाएगा, जिनका दुष्प्रभाव होने पर दवा या इलाज उपलब्ध हो।

विज्ञापन

आगामी दिनों में यह सभी नियम नियंत्रित मानव संक्रमण अध्ययन (सीएचआईएस) पर लागू होंगे। नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने नियमों का मसौदा तैयार किया है जो न सिर्फ देश के मेडिकल कॉलेजों, बल्कि सभी शोध केंद्र और निजी कंपनियों पर लागू होगा। आईसीएमआर के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, भारत में हर साल 30% मौतें संक्रामक रोगों से हो रही हैं। अभी तक नियंत्रित मानव संक्रमण अध्ययन काफी सीमित हैं, लेकिन इन्हें बढ़ावा मिलना जरूरी है, क्योंकि इनसे बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। सरकार ने अब इन अध्ययनों को नियम कानून के दायरे में लाने की प्रक्रिया शुरू की है। इसमें बच्चे, किशोर और बुजुर्ग शामिल नहीं होंगे।

विज्ञापन

भारत में नई है प्रक्रिया
सीएचआईएस में एक स्वस्थ व्यक्ति को जानबूझकर रोगजनकों के संपर्क में लाया जाता है। यानी सामान्य भाषा में कहें तो व्यक्ति पर जीवित विषाणु का प्रयोग किया जाता है, ताकि मनुष्यों में संक्रामक रोगों के रोगजनक, संचरण, रोकथाम और उपचार की समझ को बढ़ावा दिया जा सके। भारत में अभी यह प्रक्रिया काफी नई है। हालांकि, दुनिया के कई देश इस मॉडल पर डेंगू, मलेरिया, जीका वायरस जैसी संक्रामक बीमारियों को लेकर खोज कर रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन


अभी तक दो बार अध्ययन
हाल ही में केंद्र सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने नियंत्रित मानव संक्रमण मॉडल का उपयोग करके नए इन्फ्लूएंजा टीके विकसित करने का प्रस्ताव दिया है। इससे पहले, हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक कंपनी ने टाइफाइड का टीका विकसित करने के लिए इस मॉडल का उपयोग किया है।

संस्थान में होगा अध्ययन
मसौदे में शामिल नए नियमों के अनुसार, जरूरी है कि इस तरह का अध्ययन केवल किसी संस्थान में ही होना चाहिए। जहां भी यह अध्ययन होगा वहां एक उच्च स्तरीय प्रयोगशाला और अस्पताल होना जरूरी है। जिन वैज्ञानिक या शोधकर्ताओं को क्लीनिकल ट्रायल का अनुभव होगा, उन्हीं को इसकी अनुमति दी जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed