भारत-पाक जल विवाद में अमेरिका की एंट्री
अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान के बीच जारी जल विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने के लिए अमेरिकी प्रशासन ने पहल की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पाक के प्रसिद्ध अखबार ‘डॉन’ के मुताबिक इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए अमेरिका ने दोनों की तरफ से किसी निमंत्रण का इंतजार भी नहीं किया है।
दोनों देशों के बीच सिंधु जल बंटवारे को लेकर यह विवाद दो पनबिजली परियोजनाओं को लेकर है जिन पर भारत किशनगंगा व रेटल में काम कर रहा है। ‘डॉन’ ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया है कि अमेरिका के विदेश मंत्री जॉन केरी ने इस मामले में पाक वित्तमंत्री इशाक दर से मुलाकात करते हुए विवाद के शांतिपूर्ण समाधान से संबंधित विकल्पों पर चर्चा की है। इसके बाद अमेरिका में पाक राजदूत डेविड हेल ने भी पाक वित्तमंत्री से इस्लामाबाद में मुलाकात की है। इस समझौते पर विश्व बैंक की मध्यस्थता में 19 सितंबर 1960 को भारत-पाक के बीच हस्ताक्षर हुए थे।
यद्यपि अमेरिका में ओबामा प्रशासन अब अंतिम दौर में है और 20 जनवरी से ट्रंप देश के राष्ट्रपति बनने के बाद उनके प्रशासन का रुख ही इसकी वास्तविक दिशा तय करेगा, लेकिन ‘डॉन’ अखबार ने अमेरिकी विदेश मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से लिखा है कि - ‘विवाद की गंभीरता और समझौते के उल्लंघन होने के डर से विदेश मंत्री जॉन केरी ने इस पर पाक वित्तमंत्री से फोन पर चर्चा की।’ एक अमेरिकी राजनयिक ने बताया कि इस समझौते को आगे बढ़ाने में अमेरिका का भी योगदान था इसलिए वह इस विवाद पर नजर रखे हुए है।
पाक की मांग को ठंडे बस्ते में डाल चुका है विश्व बैंक
इससे पहले पाकिस्तान विश्व बैंक के दरवाजे पर भी मध्यस्थता की अपील कर चुका है, लेकिन उसके अनुरोध को विश्व बैंक अध्यक्ष किम योंग ने ठंडे बस्ते में डाल दिया था। पाकिस्तान चाहता था कि इस समझौते के तहत विवादों का निपटारा तटस्थ विशेषज्ञों और मध्यस्थता की एक अदालत द्वारा कराया जाए।
विश्व बैंक ने दोनों देशों से आपसी बातचीत द्वारा मामले को सुलझाने की बात कहकर पाक की मांग एक तरह से ठुकरा दी थी। अमेरिका में ओबामा प्रशासन से जुड़े विदेश मंत्री जॉन केरी भले ही पाकिस्तान के साथ इस विवाद पर कितनी ही चर्चा कर लें, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सकेंगे।
जानकारों का मानना है कि 20 जनवरी से ट्रंप सरकार सत्ता संभालेगी जिसके बाद ऐसे मामलों पर नए सिरे से बातचीत की जाएगी। लेकिन माना जा रहा है कि केरी इस मामले पर इसलिए रुचि ले रहे हैं ताकि ट्रंप सरकार इस पर आगे की कार्रवाई कर सके।