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चीन: पूर्वी लद्दाख पर ड्रैगन की तिरछी नजर, US की उपग्रह तस्वीरों का दावा- पैंगोंग झील के पास PLA कर रही खुदाई

Sun, 07 Jul 2024 07:05 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sun, 07 Jul 2024 07:05 AM IST
सार

चीन की विस्तारवादी नीति एक बार फिर सामने आई है। उपग्रह से ली गई कुछ तस्वीरों के विश्लेषण से पता लगा है कि चीन पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के पास खुदाई कर रहा है। इसी क्षेत्र में चीनी सैनिकों- पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) का मुख्यालय भी है।

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US Firm Settalite Image Claim China Digging near Pangong Lake PLA News Updates in Hindi
पैंगोंग झील (फाइल) - फोटो : एएनआई / रॉयटर्स

विस्तार

चीन के नापाक मंसूबे एक बार फिर सामने आए हैं। मीडिया में आई रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने पूर्वी लद्दाख के कुछ इलाकों में खुदाई शुरू की है। उपग्रह की मदद से दुनिया के कई प्रमुख भौगोलिक इलाकों पर नजर रखने वाली संस्था- ब्लैकस्काई की तरफ से जारी कुछ तस्वीरों के विश्लेषण से पता लगा है कि चीन पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के पास खुदाई कर रहा है। इन तस्वीरों के मुताबिक 2021-22 में चीनी सैनिकों ने इसी इलाके में सैन्य अड्डा बनाया था। यहां कुछ अंडरग्राउंड बंकर भी बनाए गए हैं, जिनका इस्तेमाल ईंधन, हथियार और सैन्य रसद को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है। उपग्रह की मदद से क्लिक की गई तस्वीरों के हवाले से ब्लैकस्काई के विश्लेषकों का मानना है कि चीन की सेना पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के आसपास के क्षेत्र में लंबी अवधि के लिए खुदाई कर रही है।

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गौरतलब है कि पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर सिरजाप में चीनी सेना- पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) का सैन्य अड्डा है। झील के आसपास ड्यूटी पर तैनात किए जाने वाले चीन सैनिकों का मुख्यालय भी इसी क्षेत्र में है। यह स्थान इसलिए भी अधिक संवेदनशील है क्योंकि चीनी सेना ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से केवल पांच किलोमीटर दूर सैन्य अड्डे का निर्माण किया है। इस भूभाग पर भारत दावा करता रहा है, लेकिन चीन अपनी हेकड़ी दिखाकर मनमानी पर अड़ा है। खास बात यह है कि मई, 2020 में एलएसी पर गतिरोध शुरू होने से पहले यह इलाका पूरी तरह खाली था और इस क्षेत्र में किसी भी तरह की खुदाई या निर्माण कार्य की शुरुआत नहीं हुई थी।
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यूएस आधारित फर्म ब्लैकस्काई द्वारा 30 मई को ली गई तस्वीरों में आठ ढलान वाला प्रवेश द्वार स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। इस बड़े बंकर के पास पांच प्रवेश द्वारों वाला एक और छोटा बंकर भी है। ब्लैकस्काई के एक विश्लेषक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, सैन्य अड्डे में बख्तरबंद वाहन भंडारण सुविधा, परीक्षण रेंज, ईंधन और युद्ध सामग्री भंडारण भवनों का विस्तार किया गया है। यह बेस गलवान घाटी से 120 किमी से थोड़ा अधिक दक्षिण-पूर्व में स्थित है।
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बेहतर सुरक्षा बनाने के लिए सुरंग बनाना एकमात्र विकल्प: पूर्व भारतीय सेना कमांडर
इधर, ब्लैकस्काई की तस्वीरों पर भारतीय अधिकारियों की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। पैंगोंग झील के आसपास के क्षेत्र में सेवा देने वाले एक पूर्व भारतीय सेना कमांडर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, आज के युद्धक्षेत्र में, उपग्रहों या हवाई निगरानी प्लेटफार्मों का उपयोग करके हर चीज का पता लगाया जा सकता है। हमारी तरफ ऐसा कोई भूमिगत आश्रय स्थल नहीं है। बेहतर सुरक्षा बनाने के लिए सुरंग बनाना ही एकमात्र रास्ता है। चीनी सुरंग बनाने की गतिविधियों में अग्रणी हैं। इन संरचनाओं के लिए किसी उच्च तकनीक की आवश्यकता नहीं है, केवल सिविल इंजीनियरिंग कौशल और धन की आवश्यकता है। अन्यथा, हमें और अधिक वायु रक्षा उपकरणों में निवेश करना होगा। 

2020 में गतिरोध शुरू होने के बाद भारत शुरू किए सैन्य अभियान
मामले से परिचित लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि भारत ने 2020 में गतिरोध शुरू होने के बाद से सैन्य गतिशीलता और रसद सहायता के लिए अपने सीमावर्ती क्षेत्रों में विभिन्न सड़कों, पुलों, सुरंगों, हवाई क्षेत्रों और हेलीपैड का निर्माण किया है। सैन्य अभियानों का समर्थन करने के लिए बढ़ते खर्च और रणनीतिक परियोजनाओं के त्वरित निष्पादन से इस सीमा बुनियादी ढांचे को बढ़ावा मिला है। 2023-24 के दौरान, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने 3,611 करोड़ की 125 बुनियादी ढांचा परियोजनाएं पूरी कीं, जिसमें अरुणाचल प्रदेश में सेला सुरंग भी शामिल है।


तिब्बत में लड़ाकू जेट की तैनाती बदलाव का प्रतीक
बता दें कि पैंगोंग झील के पास चीन द्वारा खुदाई की घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के दूसरे सबसे बड़े शहर में शिगात्से हवाई अड्डे और विवादित डोकलाम त्रिकोणीय पर चीनी सेना की बढ़ती गतिविधि शामिल हैं। इस साल की शुरुआत में उपग्रह चित्रों में शिगात्से बेस पर लगभग आधा दर्जन चेंगदू जे-20, चीन का सबसे उन्नत स्टील्थ लड़ाकू जेट दिखाया गया था। वहीं, ब्लैकस्काई द्वारा 30 मई को ली गई तस्वीरों में छह जे-20 जेट, आठ चेंगदू जे-10 मल्टी के बगल में खड़े दिखाई दिए। विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ जे-20 को शिनजियांग में तैनात किया गया है, इनमें से अधिकतर जेट चीन के तटीय और अंतर्देशीय प्रांतों में तैनात थे। तिब्बत में उनकी तैनाती एक बदलाव का प्रतीक है। 30 जून की एक हालिया तस्वीर में शिगात्से हवाई अड्डे के केंद्रीय एप्रन पर कम से कम दो जे-10 जेट दिखाई दिए।

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