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MEA: 'USAID ने भारत में चुनावों के लिए नहीं दिए 21 मिलियन डॉलर'; अमेरिकी दूतावास ने खोली ट्रंप के दावे की पोल

Fri, 22 Aug 2025 12:37 PM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Fri, 22 Aug 2025 12:37 PM IST
सार

माकपा सांसद जॉन ब्रिटास के सवाल के जवाब में सरकार द्वारा संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी दूतावास ने बताया है कि यूएसएआईडी को वित्तीय वर्ष 2014 से 2024 तक भारत में मतदान के लिए 21 मिलियन डॉलर की धनराशि न तो मिली और न ही प्रदान की गई।

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US Embassy Said USAID didn't receive funding of USD21 million for voter turnout in India
भारत में चुनावों के लेकर अमेरिकी फंडिग के दावे पर बड़ा खुलासा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत में चुनावों को प्रभावित करने के उद्देश्य से अमेरिकी फंडिंग को लेकर ट्रंप के दावों पर भारत में अमेरिकी दूतावास ने बड़ा खुलासा किया है। अमेरिकी दूतावास ने विदेश मंत्रालय को बताया है कि यूएसएआईडी ने भारत में चुनीवों को लेकर कोई भी फंड नहीं दिया है। अब विदेश मंत्रालय मे अमेरिकी दूतावास के इस बयान को संसद में साझा किया है। 

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अमेरिकी दूतावास ने ही खोल दी पोल
माकपा सांसद जॉन ब्रिटास के सवाल के जवाब में सरकार द्वारा संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी दूतावास ने बताया है कि यूएसएआईडी को वित्तीय वर्ष 2014 से 2024 तक भारत में मतदान के लिए 21 मिलियन डॉलर की धनराशि न तो मिली और न ही प्रदान की गई। साथ ही दूतावास ने यह भी कहा है कि यूएसएआईडी ने भारत में मतदान को प्रभावित करने के उद्देश्य से कोई भी गतिविधि नहीं की है।  

 
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रिपोर्ट्स में किया गया था दावा
दरअसल, कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि भारतीय चुनावों में मतदान बढ़ाने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका की अंतर्राष्ट्रीय विकास एजेंसी (यूएसएआईडी) की धनराशि का प्रयोग हुआ है। इन्ही रिपोर्ट्स के संबंध में की गई कार्रवाई की स्थिति के बारे में माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने सरकार से सवाल किया था। 

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विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी दूतावास से मांगी थी ये जानकारी
विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने राज्यसभा में अपने जवाब में यह भी बताया कि 28 फरवरी को विदेश मंत्रालय (MEA) ने नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास से बीते दस वर्षों में भारत में USAID द्वारा सहायता प्राप्त या वित्त पोषित सभी परियोजनाओं (भारत सरकार के साथ सात साझेदारी समझौतों के तहत क्रियान्वित की जा रही परियोजनाओं को छोड़कर) पर हुए खर्च का ब्यौरा तत्काल मांगा था। इसके साथ ही मंत्रालय ने अमेरिकी दूतावास से उन गैर-सरकारी संगठनों या कार्यान्वयन भागीदारों की सूची भी मांगी थी जिनके माध्यम से ऐसे कामों को अंजाम दिया गया था।

विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने यह भी बताया कि 2 जुलाई को अमेरिकी दूतावास ने मंत्रालय द्वारा मांगी गई जानकारी के संबंध में डेटा साझा किया। उन्होंने कहा कि दूतावास का यह कहना है 'यूएसएआईडी/भारत ने वित्तीय वर्ष 2014 से 2024 तक भारत में मतदान के लिए 21 मिलियन डॉलर की धनराशि न को प्राप्त की और न ही प्रदान की है।' 

 भारत में यूएसएआईडी के सभी काम 15 अगस्त से हुए बंद
 उन्होंने कहा कि अमेरिकी दूतावास ने 29 जुलाई विदेश मंत्रालय को बताया कि भारत में यूएसएआईडी के सभी काम 15 अगस्त 2025 तक बंद कर दिए जाएंगे। अमेरिकी दूतावास ने इसके बाद 11 अगस्त 2025 को वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग को पत्र लिखकर बताया गया कि भारत सरकार के साथ हुए सातों आधिकारिक समझौते भी 15 अगस्त 2025 से खत्म कर दिए जाएंगे।

DOGE ने एक्स पर पोस्ट में किया था दावा
विदेश राज्य मंत्री सिंह ने कहा कि अमेरिका में भी यूएसएआईडी के संचालन की समीक्षा चली। नतीजन, अमेरिकी सरकारी दक्षता विभाग (डोजे) ने 16 फरवरी को एक्स हैंडल पर एलान किया कि कि 486 मिलियन डॉलर की यूएसएआईडी फंडिंग रद्द कर दी गई है। यह फंडिंग दुनिया भर में कंसोर्टियम फॉर इलेक्शन्स एंड पॉलिटिकल प्रोसेस स्ट्रेंथनिंग (सीईपीपीएस) नाम के वैश्विक चुनावी प्रोजेक्ट के लिए थी। इसमें भारत में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए 21 मिलियन अमेरिकी डॉलर का आवंटन भी शामिल था। इसके साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फरवरी में यूएसऐड के जरिए में भारत के चुनावों में दखलअंदाजी का दावा भी झूठा साबित हो गया है। बताते चलें कि यूएसएआईडी का दो सितंबर 2025 तक बंद होना तय है।  

ट्रंप ने किया था दावा
बता दें कि पूर्व में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी कई बार दावा किया था कि उनकी पूर्ववर्ती सरकार भारत में चुनावों को लेकर फंडिंग कर रही थी। इतना ही नहीं उन्होंने अपने चुनावी अभियान में इसे एक मुद्दा भी बनाया था कि भारत में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए 21 मिलियन डॉलर देने की क्या जरूरत है। ट्रंप ने पूर्ववर्ती बाइडन सरकार पर निशाना साधते हुए यह भी आरोप लगाया था कि वे (बाइडन सरकार) चाहते थे कि चुनाव में किसी और को चुना जाए। 

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