यूपी: अमेरिकी दंपति ने अनाथ बच्ची को लिया गोद, पर पासपोर्ट बनने में आ रही अड़चन
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दो साल तक बाल शिशु गृह में पली अनाथ बच्ची रोशनी (नाम बदला गया है) को आखिर सात समंदर पार घर-संसार मिल गया। अमेरिका में रहने वाले एक दंपति ने उसे गोद लिया है लेकिन बच्ची को अमेरिका ले जाने में पासपोर्ट बाधा बन गया है। तकनीकी कारणों से रोशनी का पासपोर्ट नहीं बन पा रहा है।
उसके दो पासपोर्ट बनने हैं, एक इंडियन और दूसरा यूरोपियन। बच्ची के पासपोर्ट में अभिभावकों का पासपार्ट नंबर भी अंकित होना है लेकिन रोशनी अनाथ है और ऐसे में अफसरों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है कि भारत में उसके अभिभावक के तौर पर किसका पासपोर्ट नंबर अंकित किया जाए। अगर समय से उसका पासपोर्ट बन गया होता तो रोशनी इस वक्त अमेरिका में अपने अभिभावकों के पास होती।
बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया अब ऑनलाइन हो चुकी है। ऐसे में विदेशों से भी बच्चों के लिए आवेदन आने लगे हैं। बाल शिशु गृह में पल रहे बच्चों को गोद लेने के लिए अमेरिका, दुबई और इटली से छह आवेदन किए गए हैं। इनमें छह साल की रोशनी के लिए अमेरिका के दंपति ने आवेदन किया है और उनका आवेदन स्वीकार कर लिया गया है। सभी औपचारिकताएं भी पूरी हो गई हैं लेकिन उसका पासपोर्ट नहीं बन पा रहा है।
चार साल की उम्र में मिली थी रोशनी
बाल शिशु गृह की सुप्रीटेंडेंट पूनम पाल ने जब रोशनी के पोसपोर्ट के लिए आवेदन किया तो भारत में उसके अभिभावकों का पासपोर्ट नंबर मांगा गया। रोशनी को गोद लेने वाले अभिभावक अमेरिका में हैं। उनकी आईडी से यूरोपियन पासपोर्ट बनेगा। इंडियन पासपोर्ट के लिए भारत में रोशनी के अभिभावक होने चाहिए और उनकी उपस्थिति भी जरूरी है। पूनम ने उच्चाधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दी तो अफसरों ने मंत्रालय में बात की। यह सूचना केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी तक पहुंची। उन्होंने अफसरों को इसका विकल्प तलाशने को कहा।
सुप्रीटेडेंट को करना पड़ा पासपोर्ट के लिए आवेदन
जिला प्रोबेशन अधिकारी पंकज मिश्र का कहना है कि जिस अमेरिकन दंपति को बच्ची सौंपी जानी है, वे अमेरिका में हैं। मां भारतीय और पिता अमेरिकी मूल के हैं। केंद्रीय दत्तक ग्रहण एजेंसी (कारा) की वेबसाइट पर उन्होंने बच्ची के लिए आवेदन किया था। सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं।
फिलहाल यही रास्ता तलाशा गया है कि सुप्रीटेंडेंट को अभिभावक मानते हुए उनका पासपोर्ट भी बनवा दिया जाए। सुप्रीटेंडेंट पूनम पाल ने पासपोर्ट के लिए आवेदन कर दिया है। उनका पासपोर्ट जारी होने के बाद उस पासपोर्ट नंबर से बच्ची का पासपोर्ट बन जाएगा और उसे अमेरिका भेजा जा सकेगा।
रोशनी उस वक्त चार साल की थी, जब कीडगंज पुलिस को मिली थी। वह नाम छोड़कर बाकी कुछ नहीं बता पा रही थी। पुलिस ने उसे बाल शिशु गृह को सौंप दिया। शिशु गृह में आने के बाद वह दो साल में ही खूब बोलने लगी और पढ़ना-लिखना भी सीख लिया।