corona vaccine: भारत में अमेरिकी टीके को मंजूरी के लिए पार करनी होंगी तीन बाधाएं
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अमेरिकी दवा कंपनी फाइजर ने भारतीय लोगों को कोरोना का टीका उपलब्ध कराने के लिए सरकार से मंजूरी मांगी जरूर है, लेकिन उसे कामयाबी मिलना बहुत मुश्किल है। ब्रिटेन और अमेरिका ने टीका के आपात इस्तेमाल को अनुमति दे दी है। इसके पीछे तीन बड़ी वजह हैं जिनके आधार पर सरकार अमेरिकी दवा कंपनी के प्रस्ताव को ठुकरा सकती है।
राष्ट्रीय टास्क फोर्स की सिफारिशों के आधार पर ही होगा आगे का निर्णय
हालांकि अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) के अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय टास्क फोर्स की सिफारिशों के आधार पर ही आगे का निर्णय होगा, लेकिन प्रारंभिक तौर पर अनुमति मिलना मुश्किल है।
शर्तों संग फाइजर ने मांगी अनुमति
भारत में टीका उपलब्ध कराने के लिए फाइजर ने सरकार से अनुमति मांगी है। हालांकि अपने आवेदन में कंपनी ने यह भी शर्त रखी है कि अगर उनके टीके से किसी व्यक्ति पर दुष्प्रभाव होता है तो इसका हर्जाना पीड़ित को सरकार देगी न कि दवा कंपनी। आवेदन के साथ कंपनी ने टीका पर किए गए परिणामों को भी साझा किया है।
यह है चुनौती
- फाइजर का टीका सुरक्षित रखने के लिए कम से कम 70 डिग्री सेल्सियस तापमान कोल्ड चेन होना जरूरी है जो देश के किसी भी जिले में नहीं है। इतने कम तापमान के कोल्ड चेन स्थापित करने के लिए सरकार को करोड़ों रुपये का बजट खर्च करना पड़ सकता है।
- नियमों के अनुसार, टीके की अनुमति के लिए भारत में इसका परीक्षण होना जरूरी है। ऐसे में फाइजर कंपनी को अनुमति तक नहीं दी जा सकती है जब तक कि वह भारत में इसे लेकर कोई परीक्षण न कर ले।
- फाइजर ने अपने आवेदन में दुष्प्रभाव होने पर सरकार द्वारा मुआवजा देने की मांग रखी है जिसका कोई आधार ही नहीं है।
नियमों को ताक पर नहीं रखा जा सकता
टास्क फोर्स के ही एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि नियमों को ताक पर रख किसी भी आपात स्थिति से लड़ा नहीं जा सकता। अगर फाइजर को अनुमति है तो दुनिया की कई कंपनियां भी आगे से यही करेंगी। नियमों का ध्यान रखते हुए रूस को सीधे तौर पर भारत में टीका नहीं उतारने के लिए कहा गया था।
टीका लगने के बाद भी व्यक्ति दूसरे को संक्रमित कर सकता है, ये पता नहीं
फाइजर के सीईओ अलबर्ट बाउरला ने एक साक्षात्कार के दौरान कहा, टीका लगने के बाद कोई व्यक्ति वायरस को फैला सकता है। कंपनी को इस बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं है। मुझे लगता है कि इस बिंदु पर अध्ययन की जरूरत है। इस बयान के बाद वैक्सीन के कुछ जानकारों का कहना है कि कंपनी ने इस बिंदु पर काम क्यों नहीं किया।