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उड़ी हमले के बाद नहीं मिल रही दिल्ली-लाहौर बस को सवारी

Wed, 21 Sep 2016 04:37 PM IST
विनीत खरे/ बीबीसी संवाददाता
विनीत खरे/ बीबीसी संवाददाता Updated Wed, 21 Sep 2016 04:37 PM IST
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URI attack: Lahore Delhi bus not getting passengers
Pak couple in Delhi

कश्मीर के उड़ी सैन्य शिविर पर आतंकी हमले के बाद दिल्ली और लाहौर के बीच चलने वाली बसें लगभग खाली हो गईं हैं। मंगलवार शाम साढ़े पांच बजे लाहौर से दिल्ली के डॉक्टर अंबेडकर बस टर्मिनल पहुंची बस में मात्र एक दंपत्ति सवार थे।

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एक स्थानीय अधिकारी के मुताबिक मंगलवार सुबह लाहौर जाने वाली बस भी खाली थी। लाहौर से इस बस में आए मोहम्मद आबिद और उनकी पत्नी ने अंबेडकर बस अड्डे पर बीबीसी हिंदी को बताया, "जब हमने दिल्ली का टिकट खरीदा तो हम सदमे में आ गए क्योंकि बस में हमारे अलावा और कोई था ही नहीं।"
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उन्होंने बताया, "जब हम पिछली बार आए थे तो पूरी बस भरी हुई थी लेकिन इस बार बस खाली थी।" लेकिन बस में गुजरे अपने 12 घंटे के लंबे समय पर वो कहते हैं, "हम बेहद सुकून से हिंदुस्तान आए हैं। इस सेवा को जारी रखना चाहिए।" दिल्ली-लाहौर बस सेवा 1999 में शुरू की गई थी जब अटल बिहारी वाजपेयी भारत के प्रधानमंत्री थे पर 2001 में भारतीय संसद पर हुए
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आतंकी हमले के बाद कुछ समय तक इस बस सेवा को रोक दिया गया था।

जब भी भारत में उड़ी जैसे हमले होते हैं, कुछ हलको में मांग उठती है कि भारत पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से संबंध तोड़ ले या इसे सीमित किया जाए। दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन के चीफ जनरल मैनेजर एके गोयल ने बीबीसी को बताया कि किसी समय मुनाफा देने वाली ये बस सेवा पिछले एक साल से घाटे का सौदा साबित हो रही है। एके गोयल कहते हैं, "वर्ष 2014 में वाघा में हुए हमले के बाद ये बस अब लाहौर शहर तक नहीं जाती, बस पाकिस्तान के वाघा इलाके तक जाती है।

दिल्ली से तो ठीक-ठाक संख्या में लोग पाकिस्तान जाते हैं लेकिन वहां से दो, चार, पांच लोग ही भारत आते हैं, इसलिए ये बस मुनाफे का सौदा नहीं रही।" बस की सुरक्षा को देखते हुए करीब तीन घंटे पहले ही टर्मिनल के दोनों गेटों को बंद कर दिया जाता है और भीतर जाने पर पाबंदी लगा दी जाती है। बस अड्डे के अंदर दिल्ली पुलिस के जवान तैनात थे और लाहौर से आने वाली बस का इंतजार कर रहे थे। 

'भारत आकर पता नहीं चलता कौन हिंदू है कौन मुसलमान'

URI attack: Lahore Delhi bus not getting passengers
Bus service office

उड़ी हमले के बाद पाकिस्तान से इस बस में सफर करने वाले पति-पत्नी भी मजबूरी के ही मारे हुए हैं। कुछ वक्त पहले दिल्ली के अपोलो अस्पताल में मोहम्मद आबिद का लिवर ट्रांसप्लांट हुआ था। मोहम्मद आबिद अपनी पत्नी के साथ अस्पताल में चेकअप करवाने दिल्ली आए थे।

आशंका के माहौल के कारण दोनों शुरुआत में बात करने में थोड़ा झिझके लेकिन बाद में राजी हो गए। मोहम्मद आबिद तीसरी बार अपनी पत्नी के साथ दिल्ली आए हैं। वो आठ दिन दिल्ली में एक गेस्ट हाउस में रहेंगे। उनका भारत में कोई रिश्तेदार नहीं है।

हर साल पाकिस्तान से बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए भारत आते हैं। मोहम्मद आबिद के मुताबिक दोनों देशों के लिए ये बस सेवा बहुत जरूरी है जो हवाई जहाज से भारत आने का खर्च नहीं उठा सकते और बस की मदद से लोग आसानी से एक दूसरे के देश जा सकते हैं। लेकिन ऐसे वक्त जब दोनों देशों के बीच उड़ी हमलों के कारण रिश्ते तल्‍ख हैं, हिंदुस्तान आने का अनुभव कैसा है?

इस पर मोहम्मद आबिद की पत्नी ने बताया, "यहां आकर हमें ऐसा महसूस नहीं होता कि भारत और पाकिस्तान का झगड़ा चल रहा है लेकिन ये बस खाली क्यों आई है, ये भी हमें समझ नहीं आ रहा है। यहां आकर हमें पता नहीं चलता कि कौन हिंदू है कौन मुसलमान, क्या पाकिस्तानी, क्या भारतीय।"

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