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पूर्व गृहमंत्री बोले - यूपीए ने की थी तीन सर्जिकल स्ट्राइक, सैन्य अभियान को भुना रहे हैं मोदी
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 05 Feb 2017 08:57 AM IST
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फाइलः पूर्व गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे
- फोटो : Social Media
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पूर्व गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने शनिवार को कहा कि साल 2009 से 2013 के बीच तीन सर्जिकल स्ट्राइक हुई थी, लेकिन यूपीए सरकार ने कभी इन्हें सार्वजनिक नहीं किया।
ओस्मानाबाद जिले में पार्टी के चुनाव अभियान की शुरुआत करते हुए शिंदे ने कहा, ‘कांग्रेसनीत यूपीए शासनकाल में कभी सर्जिकल स्ट्राइक को सार्वजनिक नहीं किया गया। वहीं नरेंद्र मोदी सरकार सेना के अभियान को भुनाने में लगी हुई है। भाजपा सरकार बड़े-बड़े वादे कर लोगों को भ्रमित करती है।’
शिंदे ने दावा किया कि नोटबंदी की सबसे अधिक मार किसानों पर पड़ी है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी से सबसे अधिक फायदा कालाधन जमा करने वालों को हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार यह बताने में सक्षम नहीं है कि नोटबंदी के बाद अब तक कितना कालाधन सामने आया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नोटबंदी के मुद्दे पर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं।
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मुंबई कांग्रेस में टिकट वितरण को लेकर मचा घमासान
देश की वैभवशाली नगर निकाय मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव में टिकटों के वितरण में मनमानी के चलते कांग्रेस में घमासान शुरू हो गया है। आलम यह है कि मुंबई में कांग्रेस के कद्दावर नेता पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री गुरुदास कामत, कृपाशंकर सिंह, पूर्व मंत्री मो. आरिफ नसीम खान और पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे ने कांग्रेस का चुनाव प्रचार करने से मना कर दिया है।
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ओस्मानाबाद जिले में पार्टी के चुनाव अभियान की शुरुआत करते हुए शिंदे ने कहा, ‘कांग्रेसनीत यूपीए शासनकाल में कभी सर्जिकल स्ट्राइक को सार्वजनिक नहीं किया गया। वहीं नरेंद्र मोदी सरकार सेना के अभियान को भुनाने में लगी हुई है। भाजपा सरकार बड़े-बड़े वादे कर लोगों को भ्रमित करती है।’
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शिंदे ने दावा किया कि नोटबंदी की सबसे अधिक मार किसानों पर पड़ी है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी से सबसे अधिक फायदा कालाधन जमा करने वालों को हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार यह बताने में सक्षम नहीं है कि नोटबंदी के बाद अब तक कितना कालाधन सामने आया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नोटबंदी के मुद्दे पर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं।
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मुंबई कांग्रेस में टिकट वितरण को लेकर मचा घमासान
देश की वैभवशाली नगर निकाय मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव में टिकटों के वितरण में मनमानी के चलते कांग्रेस में घमासान शुरू हो गया है। आलम यह है कि मुंबई में कांग्रेस के कद्दावर नेता पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री गुरुदास कामत, कृपाशंकर सिंह, पूर्व मंत्री मो. आरिफ नसीम खान और पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे ने कांग्रेस का चुनाव प्रचार करने से मना कर दिया है।
एबी फार्म वितरण से मची कलह
रविवार को कांग्रेस की तरफ से मुंबई के मलाड इलाके में चुनाव प्रचार की शुरुआत होगी, जिसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चव्हाण, प्रदेश कांग्रेस प्रभारी मोहन प्रकाश और संजय निरुपम मौजूद रहेंगे लेकिन, अन्य नेता इसमें शामिल नहीं होंगे। सूत्रों ने बताया कि टिकट वितरण में भारी नाराजगी को देखते हुए संजय निरुपम ने गुपचुप तरीके से एबी फार्म वितरित कर दिया जिसमें कामत, कृपा, राणे और नसीम खान सहित कई नेता भड़क गए हैं।
हालांकि उम्मीदवारी को लेकर छिड़ी जंग के बीच कांग्रेस हाईकमान की ओर से भेजे गए हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर मामला सुलझाने की कोशिश की थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। बताया जाता है कि कृपाशंकर सिंह, गुरुदास कामत, नारायण राणे और नसीम खान ने कई लोगों की उम्मीदवारी की सिफारिश की थी लेकिन उन्हें प्रत्याशी नहीं बनाया गया। इतना ही नहीं, संजय निरुपम ने पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे की सिफारिश को भी नजरंदाज कर दिया। इससे कांग्रेस नेताओं में चुनाव के दौरान असंतोष फैल गया है।
बीएमसी में 227 सीट के लिए 10500 लोगों ने भरा पर्चा
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की 227 सीट के लिए 10500 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किया है जिसमें से आठ हजार लोगों ने ऑनलाइन पर्चा दाखिल किया है। उम्मीदवारी नहीं मिलने से नाराज हर दल के कार्यकर्ताओं ने बगावत का झंडा बुलंद किया है। नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद प्रचार युद्ध शुरू हो गया है जो 19 फरवरी तक जारी रहेगा।
हालांकि उम्मीदवारी को लेकर छिड़ी जंग के बीच कांग्रेस हाईकमान की ओर से भेजे गए हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर मामला सुलझाने की कोशिश की थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। बताया जाता है कि कृपाशंकर सिंह, गुरुदास कामत, नारायण राणे और नसीम खान ने कई लोगों की उम्मीदवारी की सिफारिश की थी लेकिन उन्हें प्रत्याशी नहीं बनाया गया। इतना ही नहीं, संजय निरुपम ने पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे की सिफारिश को भी नजरंदाज कर दिया। इससे कांग्रेस नेताओं में चुनाव के दौरान असंतोष फैल गया है।
बीएमसी में 227 सीट के लिए 10500 लोगों ने भरा पर्चा
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की 227 सीट के लिए 10500 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किया है जिसमें से आठ हजार लोगों ने ऑनलाइन पर्चा दाखिल किया है। उम्मीदवारी नहीं मिलने से नाराज हर दल के कार्यकर्ताओं ने बगावत का झंडा बुलंद किया है। नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद प्रचार युद्ध शुरू हो गया है जो 19 फरवरी तक जारी रहेगा।