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देशभर में रैगिंग के मामलों में गिरावट पर यूपी सबसे आगे
सीमा शर्मा/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 04 May 2016 04:39 AM IST
सार
- चंडीगढ़ में एक भी मामला दर्ज नहीं, हिमाचल, जम्मू, हरियाणा में एक-एक मामला
- यूजीसी के सख्त नियम, विवि प्रबंधन की एंटी रैगिंग कमेटी व जागरूकता के चलते कमी
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रैगिंग
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विस्तार
देशभर के केंद्रीय विश्वविद्यालयों, एनआईटी, आईआईटी में रैगिंग के मामलों में पिछले तीन सालों में बेशक गिरावट आयी है लेकिन उत्तर प्रदेश रैगिंग के मामलों में इस वर्ष अभी तक सबसे आगे है। पहले रैगिंग के मामलों में मध्य प्रदेश के बाद यूपी का नाम होता था। जबकि अप्रैल 2016 तक कुल 101 मामलों में से सर्वाधिक 17 मामले उत्तर प्रदेश में रिपोर्ट किए गए हैं। जबकि चंडीगढ़ में एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ है।
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वहीं, हरियाणा, हिमाचल व जम्मू में एक-एक मामला तो उत्तराखंड में दो और पंजाब में तीन मामले रिपोर्ट किए गए हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में रैगिंग को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। इसी के चलते वर्ष 2013 की तुलना में वर्ष 2015 और अप्रैल 2016 तक रैगिंग के मामलों में जबर्दस्त गिरावट आ रही है।
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सरकार के पास कुल 1545 मामलों की शिकायत आयी थी, जिसमें 1445 मामलों का पूरी तरह निवारण कर दिया गया है। जबकि सौ मामलों की जांच चल रही है। उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक शिकायत गाजियाबाद, लखनऊ, गौतमबुद्ध नगर, इलाहाबाद, अलीगढ़, बरेली में सामने आयी हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय का मानना है कि यूजीसी के एंटी -रैगिंग अभियान के चलते अब मामलों में गिरावट आ रही है। क्योंकि यूजीसी ने एंटी -रैगिंग बेवसाइट (डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यूडॉटएंटीरैगिंगडॉटइन) के अलावा 12 भाषाओं में टोलफ्री नंबर 1800-180-5522 भी स्थापित किया है। इन शिकायतों के लिए छात्रों को फ्रेंडली प्लेटफार्म देने के लिए एंटी-रैगिंग मोबाइल एप्लीकेशन भी विकसित की है, ताकि छात्र सीधे अपनी शिकायत पहुंचा सकें।
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