फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   up sssembly election 2022did akhilesh yadav take a lesson from tejashwi yadav defeat in the bihar assembly election 2020, rashtriya janata dal made the mistake of not taking non yadav obcs along, which samajwadi party corrected it

UP Assembly Election 2022: क्या अखिलेश ने तेजस्वी यादव की हार से लिया सबक? जहां राजद ने गलती की वहां सपा ने सुधार लिया?

Mon, 17 Jan 2022 08:43 PM IST
प्रतिभा ज्योति प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली।
प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Mon, 17 Jan 2022 08:43 PM IST
विज्ञापन
सार
जानकार कहते हैं कि जहां तेजस्वी यादव गैर यादव ओबीसी को अपने साथ लाने में पिछड़ गए थे, वहीं अखिलेश इसमें दो कदम आगे बढ़ गए हैं।
loader
up sssembly election 2022did akhilesh yadav take a lesson from tejashwi yadav defeat in the bihar assembly election 2020, rashtriya janata dal made the mistake of not taking non yadav obcs along, which samajwadi party corrected it
तेजस्वी यादव व अखिलेश यादव। - फोटो : amar ujala

विस्तार

समाजवादी पार्टी गैर यादव पिछड़ों में पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। इसी कोशिश में भाजपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य समेत कई नेताओं की सपा में एंट्री भी हो चुकी है। कहा जा रहा है कि अखिलेश को यह सबक बिहार विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव की हार के बाद मिला है। जहां तेजस्वी यादव गैर यादव पिछड़ी जातियों को अपने साथ लाने में पिछड़ गए थे।  


जानकार कहते हैं कि तेजस्वी यादव ने बिहार में अति पिछड़ी जातियों के बीच एनडीए की गहरी पैठ को कम करने के लिए कोई कारगर उपाय नहीं किए। उन्होंने बस इस समुदाय में कुछ टिकट बांट दिए और निश्चिंत से हो गए। हालांकि इस चुनाव में राजद सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन भाजपा-जदयू गठबंधन के कारण वह सरकार नहीं बना पाई। लिहाजा अब जाति जनगणना की बात करके तेजस्वी उसी भूल को सुधारने में लगे हैं।


कहा यह भी जाता है कि अगड़ी जातियों के प्रभुत्व को जब लालू और मुलायम सिंह यादव जैसे नेताओं ने तोड़ा तो यह जातियां पिछड़ा वर्ग के बैनर तले यादवों के साथ आईं, मगर यादवों के सत्ता में आने के बाद इनकी उपेक्षा होने लगी। जो बिहार में हुआ, वही यूपी में हुआ। इसलिए बिहार में नीतीश कुमार ने और यूपी में भाजपा ने इस वर्ग को साध लिया।

सपा में शामिल होने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य, धर्म सिंह सैनी।
सपा में शामिल होने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य, धर्म सिंह सैनी। - फोटो : ANI
राजद जैसी गलती नहीं दोहराने की कोशिश
बिहार और उत्तर प्रदेश की राजनीति को गहराई से समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन बताते हैं ‘यूपी में अभी तक ऐसा ही लग रहा था कि जो गलती तेजस्वी यादव ने बिहार में की थी, अखिलेश भी वही गलती कर सकते हैं। वहां तेजस्वी गैर यादव ओबीसी में यह भरोसा पैदा नहीं कर पाए कि सत्ता में उनकी भागीदारी हो सकती है और इस समुदाय में यह संदेश गया कि सीएम तो तेजस्वी ही बनेंगे, इसलिए उनका हिस्सा यहां नहीं है।  

उनके मुताबिक अखिलेश अब गैर यादव ओबीसी को पार्टी में लेकर आए हैं। पिछली बार इसी गैर यादव ओबीसी का बहुत समर्थन भाजपा को मिला था। मौर्य, धर्म सिंह सैनी, दारा सिंह चौहान के अलावा कई अन्य गैर यादव ओबीसी नेता भी सपा में शामिल हुए हैं। इसके जरिए इन जातियों को सपा साधने की कोशिश कर रही है।’
 

अखिलेश यादव और ओम प्रकाश राजभर
अखिलेश यादव और ओम प्रकाश राजभर - फोटो : अमर उजाला
सपा को क्या सबक मिला? 
पिछले दो चुनावों में गैर यादव ओबीसी में अधिकांश वोट भाजपा की ओर खिसक गया है। कांग्रेस व बसपा से सपा का हुआ गठबंधन उसके लिए नुकसानदेह साबित हुआ। इस बार पार्टी ने कुर्मी, मौर्य, निषाद, कुशवाहा, प्रजापति, सैनी, कश्यप,वर्मा, काछी, सविता समाज व अन्य पिछड़ी जातियों को जोड़ने का विशेष अभियान चलाया और पार्टी ने कई सामाजिक न्याय यात्राएं भी निकालीं। अखिलेश ने कभी भाजपा के पार्टनर रहे ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा को जोड़कर अति-पिछड़ा वोटरों की जोड़ने की कोशिश की। वहीं कई अन्य पिछड़ी जाति के नेताओं को भी अखिलेश ने अपने साथ ले लिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed