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UP Politics: क्या रामलला के दर्शनों के साथ ही बदलेगा लखनऊ का नाम? BJP के लिए कितना मुफीद होगा ये सियासी दांव?

Thu, 09 Feb 2023 09:06 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Thu, 09 Feb 2023 09:06 PM IST
सार

UP Politics: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक भी मानते हैं कि लखनऊ का नाम तो पहले लक्ष्मण नगरी ही था। बुधवार को बनारस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक कहते हैं कि सही समय आने पर जैसी स्थिति होगी उसके हिसाब से कार्रवाई की जाएगी...

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UP Politics: Will BJP rename Lucknow? How beneficial will this political bet
UP Politics- Lakshman Bronze statue installed outside Lucknow airport - फोटो : Agency

विस्तार

अयोध्या में बन रहे राममंदिर में रामलला के दर्शन की शुरुआत के साथ क्या अगले साल तक उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का नाम भी बदल जाएगा? क्या क्या राम नगरी अयोध्या से पहले लखनऊ को लखनपुरी या लक्ष्मण नगरी के नाम से आधिकारिक तौर पर जाना जाने लगेगा? लोकसभा चुनावों से पहले अयोध्या में राम मंदिर के बनकर तैयार होने से पहले सियासी गलियारों में यह चर्चाएं अब जोरो से होने लगी हैं। यूपी की सियासत को करीब से समझने वालों का कहना है कि लखनऊ का नाम बदला जाए या न बदला जाए, लेकिन नाम बदलने की चर्चाओं की जो टाइमिंग है, वह सियासी तौर पर भाजपा के लिए मुफीद मानी जा रही है।

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बीते कुछ दिनों में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का नाम बदलने की सुगबुगाहट भाजपा के बड़े नेताओं की ओर से की जाने लगी है। बीते दिनों प्रतापगढ़ से भाजपा सांसद संगम लाल गुप्ता ने तो पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का नाम बदलने की मांग तक कर डाली। संगम लाल गुप्ता कहते हैं कि 18वीं सदी में नवाब आसफुद्दौला ने लक्ष्मणनगरी का नाम बदलकर लखनऊ कर दिया था। जब हम गुलामी की दासताओं बाहर निकल रहे हैं, तो प्रभु श्रीराम के भाई भगवान लक्ष्मण के नाम पर रहे लखनऊ का नाम भी बदलकर लखनपुरी या लक्ष्मणपुरी ही कर दिया जाए। भाजपा सांसद संगम लाल गुप्ता ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक जी मानते हैं कि लखनऊ का नाम तो पहले लक्ष्मण नगरी ही था। बुधवार को बनारस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक कहते हैं कि सही समय आने पर जैसी स्थिति होगी उसके हिसाब से कार्रवाई की जाएगी।

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सांसद और उपमुख्यमंत्री ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट के बाहर लगाई गई लक्ष्मण जी की विशाल प्रतिमा भी लखनऊ का नाम बदलने की चर्चाओं को हवा दे रही है। दरअसल लखनऊ के चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट के बाहर लक्ष्मण जी की एक विशाल कांस्य की प्रतिमा लगाई गई है। सियासत को करीब से समझने वाले राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लखनऊ का नाम बदला जाए या न बदला जाए लेकिन जो माहौल बनना शुरू हुआ है, वह लोकसभा चुनावों से पहले कई तरीके के सियासी संदेश दे रहा है। दरअसल अगले साल से अयोध्या में बन रहे रामलला के मंदिर को देश दुनिया के भक्तों के लिए खोल दिया जाएगा। ऐसे में लखनऊ को उसके अपने पुराने नाम से वाकिफ कराने के लिए यह माहौल न सिर्फ मुफीद है, बल्कि सियासत के नजरिए से भी भाजपा को अपने आस्था के विषय पर एक कदम आगे ही रख रहा है।

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का नाम बदलने की चर्चाओं के बीच सियासी नफा नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषक अनिरुद्ध कहते हैं कि लखनऊ के बदले जाने वाले नाम की चर्चाओं को दो नजरियों से देखा जा सकता है। पहला तो यह कि अगले साल से अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बनकर तैयार हो रहा है, जो दुनिया भर के भक्तों के लिए दर्शनार्थ खोल दिया जाएगा। क्योंकि अब अयोध्या और लखनऊ की सीमाएं फैजाबाद जिले का नाम बदलने के साथ आपस में जुड़ गई हैं। इसलिए भगवान राम की नगरी अयोध्या और भगवान लक्ष्मण की नगरी लखनऊ को एक साथ जोड़कर देखा जा रहा है। वह कहते हैं कि भाजपा के राजनीतिक एजेंडे के साथ-साथ अगर उनकी आस्था और विचारधारा को लेकर भी देखा जाए, तो यह चुनावी नजरिए से भी भाजपा लिए बहुत मुफीद कदम बन रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है क्योंकि चुनाव लोकसभा के बहुत नजदीक है। ऐसे में भाजपा की अपनी विचारधारा के लिहाज से नवाब आसफुद्दौला के दिए गए नाम लखनऊ को लखनपुरी या लक्ष्मण नगरी किए जाने से तमाम सियासी तीर भी निशाने पर लग सकते हैं।

हालांकि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का नाम बदलने की चर्चाएं पहली बार नहीं हुई हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले साल मई में प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करते हुए अपने ट्वीट में लिखा था कि "शेषावतार भगवान श्री लक्ष्मण जी की पावन नगरी लखनऊ में आपका हार्दिक स्वागत अभिनंदन है।" उसके बाद चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया कि क्या उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का नाम बदलकर लखनपुरी या लक्ष्मण नगरी हो जाएगा। इससे पहले 2018 में भाजपा के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र ने भी लखनऊ का नाम बदलकर लक्ष्मणपुरी किए जाने की मांग की थी। जबकि उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और अटल बिहारी वाजपेयी के सबसे खास रहे पूर्व सांसद स्वर्गीय लालजी टंडन ने अपनी लिखी किताब 'अनकहा लखनऊ' में भी लक्ष्मण और लखनऊ के बीच गहरे रिश्ते की बात का जिक्र किया था।

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