फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   UP Police: Female constables falling down during passing out parade

ये कैसी ट्रेनिंग, पासिंग आउट परेड में ही बेहोश होने लगीं महिला सिपाही

Sat, 02 Jul 2016 04:39 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बरेली
ब्यूरो/ अमर उजाला, बरेली Updated Sat, 02 Jul 2016 04:39 AM IST
विज्ञापन
UP Police: Female constables falling down during passing out parade
प्रतीकात्मक चित्र
ब ट्रेनिंग में ये हाल है तो 15 से 18 घंटे की ड्यूटी में क्या होगा। गुरुवार को पासिंग आउट परेड के दौरान कई महिला सिपाहियों का बीच में ही गश खाकर गिरना पुलिस के आला अफसरों को भी चिंता में डाल रहा है। सपा सरकार ने 40 हजार से ज्यादा सिपाहियों की भर्ती तो कर ली लेकिन इनकी ट्रेनिंग के लिए न तो नए सेंटर बनाए और न ही स्टाफ बढ़ाया।
विज्ञापन


पुलिस लाइन के आरआई का तो कहना है कि रात में व्हाट्सएप और फेसबुक पर चैटिंग की वजह से कांस्टेबलों की नींद पूरी नहीं हुई और जब ट्रेनिंग में कड़ी मेहनत पड़ी तो गश खाकर गिरीं। डॉक्टर इससे इत्तेफाक नहीं रखते। उनका कहना है कि नींद से गश खाने का कोई मतलब नहीं। ट्रेनिंग के जरिये जो स्टेमिना उनके अंदर होना चाहिए था शायद उसकी कमी की वजह से कुछ कांस्टेबल गिर गईं। 
विज्ञापन


कांस्टेबल की नई भर्ती में महिला सिपाहियों की ट्रेनिंग अवधि 12 महीने से घटाकर नौ महीने कर दी गई है। पुलिस लाइन की पासिंग आउट परेड में शामिल 390 महिला सिपाही 28 दिसंबर 2015 को ट्रेनिंग पर आई थीं। पुलिस लाइन में इनको बाह्य और आंतरिक दो तरह की ट्रेनिंग दी गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

UP Police: Female constables falling down during passing out parade
अखिलेश सरकार ने कराई थी भर्तियां

बाह्य ट्रेनिंग में सिपाहियों को शस्त्र सहित और शस्त्र रहित फूट ड्रिल, फील्ड क्राफ्ट (जंगल में आतंकवादियों से मुठभेड़ करना) के अलावा रोजाना ढाई किलोमीटर दौड़ने की ट्रेनिंग दी गई। आंतरिक ट्रेनिंग में सामान्य ज्ञान, लॉ एंड आर्डर, रेग्यूलेशन, आईपीसी, सीआरपीसी समेत विभिन्न तरह के एक्ट का ज्ञान कराया गया।

आरआई ओमपाल सिंह के मुताबिक महिला सिपाहियों की पासिंग आउट परेड सुबह छह बजे से शुरू हो गई। दो दिन पहले ही इनके अभिभावकों ने आकर डेरा डाल दिया। अधिकतर लड़कियां (महिला कांस्टेबल) रात भर अपने पैरेंट्स से बात करती रहीं। बाकी टाइम मिला, उसमें भी मोबाइल के व्हाट्सएप, फेस बुक और ट्विटर पर चैटिंग। रात में चार घंटे भी नहीं सोईं और परेड में शामिल हो गईं।

आरआई के मुताबिक ज्यादा संघर्ष और मेहनत करके आई लड़कियों में स्टेमिना भी ज्यादा होता है। वह धूप और गर्मी में तीन घंटे खड़े रहना बर्दाश्त कर लेती हैं लेकिन कम स्टेमिना वाली लड़कियां बेहोश हो जाती हैं। सवाल यही है कि अगर फील्ड ट्रेनिंग ठीक से हुई तो स्टेमिना क्यों नहीं बढ़ा और सामान्य महिलाओं की तरह कांस्टेबल भी गिरेंगी तो फिर ट्रेंड क्या हुईं।

ये था उनका डाइट प्लान

UP Police: Female constables falling down during passing out parade
प्रतीकात्मक चित्र

आरआई की मानें तो ट्रेनिंग के दौरान महिला सिपाहियों को सुबह नाश्ते में दलिया दिया जाता था। दोपहर में दाल, सब्जी रोटी, चावल और शाम को सब्जी रोटी और सलाद मिलता था। सप्ताह में एक दिन स्पेशल भोजन खीर पूड़ी, रायता, पापड़ आदि के अलावा रोजाना सीजनल फ्रूट भी दिए जाते थे। 

पासिंग आउट परेड में लगातार एक ही पोजीशन में खड़े रहने से दिमाग शून्य हो जाता है। फिर इतनी धूप और गर्मी पड़ रही थी। बेहोशी की वजह भी ज्यादा देर तक एक पोजीशन में खड़े होना है लेकिन ये ट्रेनिंग का एक पार्ट है।
- आकाश तोमर, एएसपी  

महिला सिपाही देर से सोईं या फिर मोबाइल में रातभर चैटिंग से गश खाकर गिरने का मतलब नहीं। महिला और पुरुष के हार्मोंस में अंतर है। इसकी वजह से उनमें ब्लड प्रेशर का लो होना उमस के मौसम में सामान्य बात है। साथ ही पासिंग आउट परेड में काफी देर तक खड़ा रहना होता है ऐसे में पैरों में खून की दौड़ान कम होती है जिससे चक्कर आ जाते हैं। अगर स्टेमिना ठीक होता तो वे संभाल लेतीं जैसे दूसरी कांस्टेबल ने संभाला।
-डॉ. अजय मोहन अग्रवाल, फिजीशियन, जिला अस्पताल 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed