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UP Nikay Chunav: पिछली बार के मुकाबले SP-BSP और कांग्रेस की कितनी सीटें घटीं, BJP को कितना फायदा?

Mon, 15 May 2023 05:39 PM IST
हिमांशु मिश्रा स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Mon, 15 May 2023 05:39 PM IST
सार

2017 के मुकाबले भाजपा की सीटों में जबरदस्त इजाफा हुआ है, वहीं कई पार्टियों की सीटों में कमी आई है। आइए जानते हैं 2017 के मुकाबले किस पार्टी की कितनी सीटें घटी और किसकी बढ़ गईं? 

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UP Nikay Chunav: Compared to last time, how many seats of SP-BSP and Congress decreased, how much did BJP gain
निकाय चुनाव परिणाम उत्तर प्रदेश - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव में भाजपा ने इस बार बड़ी जीत दर्ज की है। मेयर की सभी 17 सीटों पर पार्टी ने कब्जा कर लिया। पार्षद, नगर पालिका अध्यक्ष, नगर पालिका वरिषद सदस्य, नगर पंचायत अध्यक्ष और नगर पंचायत सदस्य के चुनाव में भी पार्टी को बड़ी सफलता मिली। 
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दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी (SP), बहुजन समाज पार्टी (BSP) और कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। 2017 के मुकाबले तीनों पार्टियों की सीटों में कमी आई है। आइए जानते हैं 2017 के मुकाबले किस पार्टी की कितनी सीटें घटी और किसकी बढ़ गईं? 
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पहले जानिए चुनाव के ओवरऑल नतीजे
सूबे में निगम महापौर की 17 सीटें हैं। इन सभी पर भारतीय जनता पार्टी ने जीत हासिल की है। पार्षद पद की 1420 में से 813 सीटें भाजपा के खाते में गई हैं। दूसरे नंबर पर समाजवादी पार्टी को 191 और बहुजन समाज पार्टी को 85 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। 

नगर पालिका अध्यक्ष पद की 199 सीटें हैं। इनमें से 89 पर भाजपा, 35 पर समाजवादी पार्टी, 16 पर बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशियों को जीत मिली। पालिका सदस्य के 5,327 पद हैं। इनमें से 1,360 पर भाजपा, 425 पर समाजवादी पार्टी, 191 पर बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशियों को जीत मिली। आम आदमी पार्टी के 30 और एआईएमआईएम के 33 प्रत्याशियों ने भी जीत हासिल की। आलएलडी के खाते में 40 सीटें गईं। 

नगर पंचायत अध्यक्ष के 544 पद हैं। इनमें से 191 पदों पर भाजपा, 79 पर समाजवादी पार्टी, 37 पर बहुजन समाज पार्टी और 14 कांग्रेस को जीत मिली। नगर पंचायत सदस्य के 7,177 पद हैं। इनमें से 1,403 पर भाजपा, 485 पर समाजवादी पार्टी, 215 पर बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशियों को जीत मिली। आम आदमी पार्टी के 61 और आरएलडी के 38 सदस्य चुने गए। 
 

किस पार्टी को फायदा और किसे हुआ नुकसान? 

महापौर :  सूबे में मेयर यानी महापौर की 17 सीटें हैं। इन सभी पर इस बार भाजपा ने कब्जा जमा लिया। पिछली बार यानी 2017 में 16 सीटें थीं। इनमें से 14 पर भाजपा को जीत मिली थी, जबकि दो पर बसपा के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी। इस बार बसपा को बड़ा झटका लगा है। 

पार्षद : प्रदेश में 1,420 पार्षद की सीटें हैं। इस बार इसमें से 813 पर भाजपा, 191 पर समाजवादी पार्टी, 85 पर बहुजन समाज पार्टी को जीत मिली है। 2017 के मुकाबले, भाजपा की सीटों में 11.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, सपा को 2.09 और बसपा को 5.31 फीसदी सीटों का नुकसान उठाना पड़ा। 

पालिका अध्यक्ष और सदस्य : नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव को देखें तो भाजपा को 9.37 फीसदी सीटों का फायदा हुआ है। जबकि, सपा को 5.14 और बसपा को 6.61 फीसदी का नुकसान उठाना पड़ा। कांग्रेस को 2.54 फीसदी वोटों का नुकसान हुआ है। नगर पालिका सदस्य पद की बात करें तो भाजपा को इसमें 7.99 फीसदी का फायदा हुआ है। सपा को 1.09, बसपा को 1.36 फीसदी का घाटा हुआ है। 

पंचायत अध्यक्ष और सदस्य : नगर पंचायत अध्यक्ष पद पर भाजपा को 12.28 प्रतिशत सीटों का फायदा हुआ है। यहां समाजवादी पार्टी को 4.43 और बसपा को 3.47 फीसदी का नुकसान हुआ है। कांग्रेस को 1.31 प्रतिशत सीटों का नुकसान उठाना पड़ा। नगर पंचायत सदस्य पद पर भाजपा को 7.33 फीसदी का बड़ा फायदा मिला है। वहीं, समाजवादी पार्टी को 1.58 और बसपा को 1.01 प्रतिशत का नुकसान उठाना पड़ा है। कांग्रेस को 1.25 फीसदी सीटों का घाटा हुआ है। 
 
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आम आदमी पार्टी और एआईएमआईएम को बड़ा फायदा
विपक्ष की बड़ी पार्टियों को जहां, इस चुनाव में नुकसान उठाना पड़ा है तो वहीं, सूबे की छोटी पार्टियों को फायदा मिला है। आम आदमी पार्टी के इस बार आठ पार्षद चुने गए। तीन नगर पालिका अध्यक्ष, 30 नगर पालिका सदस्य, छह नगर पंचायत अध्यक्ष और 61 नगर पंचायत सदस्य भी चुने गए। 

2017 के आंकड़े देखें तो तब आम आदमी पार्टी के केवल तीन पार्षद ही चुनाव जीत पाए थे। पालिका अध्यक्ष की एक भी सीट नहीं मिली थी। पालिका परिषद सदस्य के 17 और पंचायत अध्यक्ष की एक सीट पर आम आदमी पार्टी को जीत मिली थी। नगर पंचायत सदस्य के 19 पदों पर आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी जीते थे। 
 
इसी तरह एआईएमआईएम के पिछली बार 12 पार्षद चुने गए थे। इस बार ये बढ़कर 19 हो गए। पिछली बार नगर पालिका अध्यक्ष की एक भी सीट पर ओवैसी की पार्टी के उम्मीदवार को जीत नहीं मिली थी। इस बार तीन अध्यक्ष ओवैसी की पार्टी के बने हैं। नगर पालिका सदस्य पद पर पिछली बार सात सदस्यों को जीत मिली थी। इस बार ये आंकड़ा बढ़कर 33 हो गया है। पिछली बार नगर पंचायत के एक सदस्य एआईएमआईएम के चुने गए थे, इस बार ये आंकड़ा बढ़कर दो हो गया है। नगर पंचायत सदस्य के पद पर पिछली बार छह प्रत्याशियों को जीत मिली थी। इस बार 23 प्रत्याशी चुनाव जीते हैं। 
 

और बाकी पार्टियों का क्या हाल रहा? 
  • 2018 में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नौ उम्मीदवारों ने नगर पंचायत सदस्य पद पर जीत हासिल की थी। इस बार नगर पालिका परिषद सदस्य के दो और नगर पंचायत सदस्य के 14 सीटों पर पार्टी के प्रत्याशियों को जीत मिली।
  • पिछली बार पीस पार्टी के आठ नगर पालिका परिषद सदस्य चुनाव जीतने में कामयाब हुए थे। दो नगर पंचायत अध्यक्ष भी चुने गए थे। इस बार पीस पार्टी का एक पार्षद, एक नगर पालिका सदस्य और छह नगर पंचायत सदस्य चुने गए हैं।
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