फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   UP Legislative Council responded to petition of SP leader in Supreme Court On issue of appointment of LOP

Supreme Court: सदन में 10 फीसदी सदस्य वाले दल के नेता को LoP का दर्जा परंपरा; कोर्ट में UP विधान परिषद का जवाब

Mon, 01 May 2023 09:21 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Mon, 01 May 2023 09:21 PM IST
सार

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ के समक्ष विधान परिषद के चेयरमैन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील केवी विश्वनाथ ने कहा कि अदालत को विपक्ष के नेता की नियुक्ति के लिए सदन की ओर से निर्धारित प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए।

विज्ञापन
UP Legislative Council responded to petition of SP leader in Supreme Court On issue of appointment of LOP
यूपी विधान परिषद (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट में सपा विधायक लाल बिहारी यादव की याचिका पर उत्तर प्रदेश विधान परिषद ने जवाब दाखिल किया है। विधान परिषद ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि नेता प्रतिपक्ष का दर्जा उसी दल के नेता को देने दी दशकों पुरानी परंपरा है जिसके सदन की कुल क्षमता के 10 फीसदी सदस्य हों। याचिका पर सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश विधान परिषद ने शीर्ष अदालत से इस परंपरा में हस्तक्षेप नहीं करने का अनुरोध किया।

विज्ञापन


शीर्ष अदालत सपा विधायक लाल बिहारी यादव की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अपनी याचिका में उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है। दरअसल, उत्तर प्रदेश विधान परिषद ने सात जुलाई, 2022 को अधिसूचना जारी कर लाल बिहारी यादव से नेता प्रतिपक्ष का दर्जा वापस ले लिया था। इसे लेकर उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विधान परिषद का फैसला बरकरार रखा था। इसके बाद वे शीर्ष अदालत पहुंचे थे। लाल बिहारी की याचिका पर 10 अप्रैल को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा था कि विधायिका के सदन में नेता प्रतिपक्ष का होना जरूरी है और उत्तर प्रदेश विधान परिषद के चेयरमैन के कार्यालय से इस पर जवाब मांगा था।
विज्ञापन


उत्तर प्रदेश विधान परिषद ने दिया जवाब
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ के समक्ष विधान परिषद के चेयरमैन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील केवी विश्वनाथ ने कहा कि अदालत को विपक्ष के नेता की नियुक्ति के लिए सदन की ओर से निर्धारित प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


विश्वनाथन ने कहा, कुछ अपवादों को छोड़कर इस परंपरा का वर्षों से पालन किया जा रहा है। सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को ही विपक्ष के नेता का दर्ज दिया जाता है, अगर वह दल 10 प्रतिशत सदस्यों के कोरम को पूरा करता है। परिषद ने समाजवादी पार्टी के एमएलसी लाल बिहारी यादव की याचिका पर दायर अपने जवाब में यह बात कही है।


सपा नेता के दावे पर अदालत ने की थी टिप्पणी
यादव ने इस दावे पर सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता को नेता प्रतिपक्ष के रूप में नामित किया जाता है, शीर्ष अदालत ने कहा था, हमें यह देखना है कि क्या कानून के तहत कोई पाबंदी लगाई गई है कि विपक्ष का नेता उस पार्टी से होगा जिसके पास एक निश्चित संख्या में सीटें होंगी। विधान परिषद में कुल सदस्यों की संख्या 100 है जिनमें से 10 सदस्यों को मनोनीत किया जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed