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यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में किया दावा, कप्पन का पीएफआई से संबंध और यह सिमी का नया अवतार
Tue, 15 Dec 2020 04:48 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 15 Dec 2020 04:48 AM IST
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Siddique Kappan
- फोटो : PTI
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उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि हाथरस जाते वक्त रास्ते में गिरफ्तार केरल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स की दलित इकाई के सचिव सिद्दीकी कप्पन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का सदस्य है और पीएफआई प्रतिबंधित संगठन सिमी का ही नया अवतार है।
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सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अतिरिक्त हलफनामे में प्रदेश सरकार ने कहा कि कप्पन पीएफआई से जुड़ा हुआ है और वह सोशल मीडिया व टेलीफोन के जरिए पी कोया, अब्दुल मुकीत, सलीम, मोहम्मद फैजल आदि पीएफआई के सदस्यों से लगातार संपर्क में था। इनमें से अधिकतर प्रतिबंधित संगठन सिमी के कार्यकारी सदस्य भी रहे हैं। सरकार का दावा है कि अब तक की जांच में पता चला है कि पीएफआई के अधिकतर सदस्य प्रतिबंधित सिमी संगठन के पूर्व पदाधिकारी थे और उनका कप्पन के साथ घनिष्ठ संबंध है। जांच के दौरान बरामद दस्तावेजों से पता चला है कि पीएफआई और सिमी दोनों संगठनों की मंशा, विचारधारा और स्वभाव में समानता है।
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राज्य सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स, नई दिल्ली ने वास्तव में उस संगठन की और से याचिका दायर की है, जिसके लिए कप्पन काम कर रहा था। सरकार ने यह भी कहा है कि याचिकाकर्ता संगठन जिसका सचिव कप्पन है, पब्लिक फंड के गबन और दुरुपयोग में सतर्कता जांच का सामना कर रहा है। कप्पन की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए राज्य सरकार ने दावा किया कि अगर इस स्टेज पर उसकी अर्जी को स्वीकार किया जाता है तो यह जांच में हस्तक्षेप है। इससे आरोपी को इसी तरह की गतिविधियों में लिप्त होने का मौका मिल जाएगा और वह जांच एजेंसी के लिए उपलब्ध नहीं होगा।
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संदिग्ध वित्तीय लेनदेन में भी शामिल
सोमवार को चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता की अर्जी पर जनवरी में विचार करने का निर्णय लेते हुए यूपी सरकार के अतिरिक्त हलफनामे पर याचिकाकर्ता संगठन को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। अतिरिक्त हलफनामे में राज्य सरकार ने यह भी आरोप लगाया है कि कप्पन और अन्य तीन सह आरोपी संदिग्ध वित्तीय लेनदेन में शामिल हैं। सह आरोपी मसूद को पीएफआई से फंड किया जाता है। सह अभियुक्त अतीक उर रहमान को कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया के रऊफ शरीफ द्वारा फंडिंग की जाती है। कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया को विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संदिग्ध स्रोतों से करोड़ों की धनराशि प्राप्त होती है। शनिवार को ईडी ने शरीफ को केरल के तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था।
दिल्ली दंगों के आरोपियों के भी संपर्क में थे
प्रदेश सरकार ने यह भी दावा किया कि कप्पन और अन्य सह अभियुक्त दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी एमडी दानिश और शरीफ के संपर्क में थे और गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए पूर्व योजनाबद्ध तरीके से हाथरस की ओर जा रहे थे। उनका मकसद जाति और वर्ग के बीच संघर्ष कराकर सार्वजनिक शांति भंग करना था। सरकार ने यह भी कहा कि कप्पन ने वर्ष 2018 में बंद हुए समाचार पत्र तेजस के लिए काम किया था, जो पीएफआई के लिए एक प्रशंसित मुखपत्र था। इस समाचार पत्र के विचार इतने उग्र थे कि इसने आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को शहीद कहा था।