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यूपी चुनावः योगी आदित्यनाथ नहीं तो कौन? नेतृत्व के मुद्दे पर चुनाव को खींचने की कोशिश कर रही भाजपा
सार
दरअसल, भाजपा को यह आईडिया ‘बिहार मॉडल’ से आया है। बिहार चुनाव में वर्तमान सरकार को लेकर जनता के बीच खूब नाराजगी देखी जा रही थी। सरकार की शराब को लेकर नीति से लोग नाराज थे।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : amar ujala
विस्तार
भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश चुनाव को धीरे-धीरे नेतृत्व के मुद्दे की ओर खींचना चाहती है। पूरी रणनीति के अंतर्गत वह रैलियों-नुक्कड़ सभाओं और कार्यकर्ताओं से लोगों की बातचीत में प्रदेश के ‘नेतृत्व’ के मुद्दे को उछाल रही है। लोगों के बीच इस तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं कि यदि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ प्रदेश का नेतृत्व नहीं करते हैं तो उनका विकल्प ‘कौन’ हो सकता है। पार्टी का मानना है कि अन्य पार्टियों के नेता अखिलेश यादव और मायावती अपने-अपने कारणों से योगी आदित्यनाथ से बेहतर छवि नहीं रखते हैं। ऐसे में यदि चुनाव नेतृत्व के मुद्दे पर होता है तो जनता योगी आदित्यनाथ को सपोर्ट करेगी और भाजपा इसमें बाजी मार सकती है।
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दरअसल, भाजपा को यह आईडिया ‘बिहार मॉडल’ से आया है। बिहार चुनाव में वर्तमान सरकार को लेकर जनता के बीच खूब नाराजगी देखी जा रही थी। सरकार की शराब को लेकर नीति से लोग नाराज थे। प्रशासन का सामान्य कामकाज में बढ़ता दखल और बिगड़ती कानून-व्यवस्था से लोग परेशान थे। भुमिहारों के बीच प्रतिनिधित्व को लेकर नाराजगी, अतिपिछड़ों और महादलितों को सरकार में हिस्सेदारी को लेकर नाराजगी, बेरोजगारी और एंटी इनकमबेंसी फैक्टर के कारण सरकार में बदलाव को लेकर जनता में बहस तेज हो गई थी। राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने चुनाव में बेरोजगारों को नौकरी देने का मुद्दा उछालकर इसे और रोचक बना दिया था। लोग सरकार में बदलाव को तय मानकर चल रहे थे।
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लेकिन इसके बाद भी जब चुनाव हुआ तो नीतीश कुमार विजयी रहे और जदयू-भाजपा गठबंधन ने अपनी सरकार बरकरार रखी। माना जा रहा है कि नीतीश सरकार से खूब नाराजगी के बाद भी लोग अंततः उन्हें ही वोट देने के लिए 'मजबूर' हो गए क्योंकि उनके पास नीतीश कुमार से बेहतर कोई विकल्प नहीं था। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव को कुछ विशेष कारणों से लोग नेता के रूप में स्वीकार नहीं कर पाए और यही कारण रहा कि ज्यादा संख्या में सीटें जीतने के बाद भी वे मुख्यमंत्री की कुर्सी से दूर रह गए। तमाम विपरीत कारण होने के बाद भी नीतीश कुमार सीएम बन गए।
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यूपी में भी बिहार मॉडल
उत्तर प्रदेश भाजपा के एक प्रवक्ता स्तर के नेता ने स्वीकार किया कि महंगाई यूपी चुनाव में एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है। पेट्रोल-सरसों के तेल और सब्जियों की बढ़ती कीमतों से सामान्य लोग सरकार से बेहद नाराज हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के काम करने की शैली भी कुछ लोगों को पसंद नहीं आती है। इसके लिए वे विपक्षी दल ही नहीं, पार्टी के अंदर भी आलोचना के शिकार रहे हैं। पांच साल के कार्यकाल के बाद सरकार के प्रति कुछ लोगों में स्वाभाविक तौर पर नाराजगी पैदा हो जाती है।
नेता के मुताबिक, इसके बाद भी जब लोगों से नेतृत्व के विकल्प के बारे में पूछा जाता है तो लोगों को कोई दूसरा नाम दिखाई नहीं देता। बीजेपी नेता के मुताबिक, समाजवादी पार्टी सरकार के समय हुई आपराधिक घटनाओं और पूरी राजनीति पर एक जाति का वर्चस्व लोगों को आज तक नहीं भूला है और लोग उस काल की वापसी नहीं चाहते हैं। इसी प्रकार बसपा नेता मायावती भी अलग कारणों से जनता की पहली पसंद नहीं बन पा रही हैं। यही कारण है कि यदि नेतृत्व के मुद्दे पर चुनाव हुआ तो योगी आदित्यनाथ जनता की पहली पसंद बनकर उभर सकते हैं।