विरासत की सियासतः चुनाव बेटे-बेटियों का, इम्तिहान पिताओं का
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यूपी का चुनावी रण अपने अंजाम की ओर है, अंतिम चरण की वोटिंग समाप्त हो चुकी है, अब बस इंतजार है तो परिणामों का। चुनावों में चार हजार से ज्यादा उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर लगी है तो कुछ सीटें ऐसी भी हैं जहां उम्मीदवारों के साथ साथ उनके परिजनों की साख भी दांव पर लग गई है। ये वो सीटें हैं जहां से बड़े नेताओं ने अपने बेटे-बेटियों को चुनावी रण में उतारा है ऐसे में विरासत की सियासत को संभालने का जिम्मा उनके कंधों पर आ गया है। आइए डालते हैं ऐसे उम्मीदवारों पर एक निगाह।
विरासत की सियासतः चुनाव बेटे-बेटियों का, इम्तिहान पिताओं का
यूपी के रण में जिन सीटों पर सबसे ज्यादा निगाह टिकी हुई है वो है दिल्ली से लगते नोएडा विधानसभा की सीट, जहां से केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह चुनाव लड़ रहे हैं। पार्टी के प्रदेश महामंत्री पंकज सिंह के लिए पार्टी ने यहां से अपनी मौजूदा विधायक विमला बाथम का टिकट भी काट दिया। इस सीट के वीआईपी वजूद का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पंकज के प्रचार के लिए कई केंद्रीय मंत्री गली गली जाकर उनके लिए वोट मांग रहे हैं।
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अलीगढ़ की अतरौली सीट भी हॉट सीट बनी हुई है, जहां से भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह के पौत्र संदीप सिंह को उम्मीदवार बनाया है। यह सीट कल्याण सिंह और उनके परिवार की पारंपरिक सीट मानी जाती है। कल्याण के बाद उनकी पुत्रवधु यहां से जीतती रही हैं, इस बार उनके बेटे संदीप सिंह मैदान में हैं। लीड्स विश्वविद्यालय से पढ़ाई कर लौटे संदीप सिंह राजनीति को समाज सेवा का जरिया मानते हैं।
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वेस्ट यूपी की ही कैराना विधानसभा सीट पर भी सबकी निगाहें जमी हुई हैं भाजपा ने यहां से सांसद हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को उम्मीदवार बनाया है तो उनके मुकाबले में हैं सपा के नाहिद हसन। यहां मुकाबला काफी रोचक बना हुआ है रालोद ने यहां से अनिल चौहान को उम्मीदवार बनाया है जो रिश्ते में हुकुम सिंह के भतीजे लगते हैं।
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कैराना की ही नजदीकी गंगोह सीट पर भी मुकाबला रोचक बना हुआ है जहां से गुर्जरों के कद्दावर नेता रहे और कांग्रेस में बड़ा कद रखने वाले यशपाल सिंह के बेटे रुद्रसेन चुनावी मैदान में हैं। उनका मुकाबला कांग्र्रेस उम्मीदवार प्रदीप चौधरी से है।
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वेस्ट की ही रामपुर की स्वार सीट भी हॉट सीट बनी हुई है जहां से सपा सरकार के कद्दावर मंत्री आजम खान के बेटे अब्दुल्ला खान चुनाव लड़ रहे हैं। पिता रामपुर से 9 बार के विधायक हैं तो मां राज्यसभा सांसद। आजम के सामने भी परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने की चुनौती है।
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बसपा सरकार में वरिष्ठ मंत्री रहे और अब भाजपा का दामन थाम चुके स्वामी प्रसाद मौर्या भी अपने बेटे को पार्टी से टिकट दिलाने में सफल रहे हैं। उनके बेटे उत्कर्ष मौर्या को पार्टी ने ऊंचाहार सीट से उम्मीदवार बनाया है। बेटे के साथ साथ इस सीट पर स्वामी प्रसाद मौर्या की इज्जत भी दांव पर लगी हुई है और पार्टी में उनका भविष्य भी।
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बाहुबली मुख्तार अंसारी को लेकर सपा में बेशक फूट पड़ गई हो लेकिन बसपा ने उन्हें पार्टी में लेने में एक पल की देरी नहीं की। यही नहीं पार्टी ने उनके बेटे अब्बास अंसारी को भी घोसी सीट से उम्मीदवार बना दिया। पूर्वांचल के मुस्लिम वोटों पर अच्छी खासी पकड़ रखने वाले मुख्तार अंसारी के सामने बेटे को जिताने की चुनौती तो है ही खुद का वजूद साबित करने का दारोमदार भी है।
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रायबरेली की सदर सीट से कई बार के विधायक रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अखिलेश सिंह ने यहां से अपनी बेटी को टिकट तो दिला दिया लेकिन अब उसे जिताने की कड़ी चुनौती उनके सामने है। बेटी अदिति सिंह ने विदेश में पढ़ाई पूरी कर पिता के पेशे को ही अपनाने का फैसला लिया।
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भाजपा के लोकसभा सदस्य और बाहुबली सांसद ब्रजभूषण सिंह के बेटे प्रतीक को भाजपा ने गोंडा से अपना उम्मीदवार बनाया है। बसपा सहित कई पार्टियों में रहे ब्रजभूषण खुद तो मोदी लहर में संसद जाने में सफल रहे लेकिन अब बेटे को विधानसभा भेजने की मुश्किल चुनौती उनके सामने है।
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कवियत्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में जेल में बंद बसपा सरकार के पूर्व मंत्री अमर मणि ने राजनीतिक पहुंच के चलते अपने बेटे अमनमणि को महाराजगंज जिले की नौटवाना सीट से एक बार तो सपा का टिकट दिला दिया लेकिन दूसरी बार अखिलेश द्वारा जारी लिस्ट में उनका नाम साफ हो गया। जिसके बाद पत्नी की हत्या में जेल में बंद अमनमणि ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर ताल ठोंक दी। अब बाप बेटे दोनों जेल में बंद हैं लेकिन अमनमणि के चुनाव पर अमरमणि की इज्जत दांव पर लगी है जिन्हें बसपा सरकार में काफी ताकतवर माना जाता था।
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प्रदेश के पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालजी टंडन तो खुद सक्रिय राजनीति से दूर हैं लेकिन उन्होंने अपने बेटे गोपाल टंडन को चुनावी मैदान में उतार दिया है। गोपाल लखनऊ पूर्व सीट से उम्मीदवार हैं। लखनऊ के सांसद रहे लालजी के सामने बेटे को जिताने के साथ साथ खुद का वजूद बचाए रखने की चुनौती भी है।
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गाजीपुर जिले की जंगीपुर सीट से सपा सरकार में मंत्री और पार्टी के संस्थापक सदस्य रहे कैलाश यादव के बेटे वीरेन्द्र यादव चुनावी मैदान में हैं। उनके पिता यहां से कई बार विधायक रहे हैं ऐसे में उनके सामने पिता की विरासत बचाए रखने की चुनौती है।