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उत्तर प्रदेश चुनाव: प्रधानमंत्री मोदी का ये 'बाण' पहले छूट जाता, तो 'भाजपा' को मिल सकता था बड़ा फायदा

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 22 Feb 2022 03:46 PM IST
सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के उन्नाव में दो दिन पहले एक चुनावी रैली में कहा है, 10 मार्च के बाद छुट्टा पशुओं की समस्या से निजात दिलाने के लिए नई व्यवस्था बनाई जाएगी। 10 मार्च को वोटों की गिनती होगी। मोदी ने कहा, मेरे ये शब्द लिखकर रखिए, ये मोदी बोल रहा है और आपके आशीर्वाद के साथ बोल रहा है। जो पशु दूध नहीं देता है, उसके गोबर से भी आय हो, ऐसी व्यवस्था मैं आपके सामने खड़ी कर दूंगा...

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UP election 2022: PM Modi says new system will made for stray cattle menace after results, Will earn from even dung
खेत में आवारा जानवर - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

यूपी चुनाव पर खासतौर से ग्रामीण इलाकों में आवारा पशुओं, जिन्हें विपक्षी दलों एवं किसानों ने 'सरकारी सांड' की संज्ञा दी है, गहरा असर डाल सकते हैं। इस मुद्दे को विपक्षी दल, बड़े पैमाने पर भुना रहे हैं। किसानों में भी आवारा पशुओं को लेकर योगी सरकार के प्रति नाराजगी देखी गई है। तीसरे चरण के मतदान के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 10 मार्च के बाद वे ऐसी व्यवस्था करने जा रहे हैं कि लोग 'छुट्टा पशुओं' को अपने घर में बांधने के लिए दौड़ेंगे। मुसीबत का सबब बने पराये 'छुट्टा पशु' अब अपने बन जाएंगे।

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जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र के गांव रायनगर वासी किसान रामकिशन कहते हैं, अगर ऐसी बात है तो यह बाण प्रधानमंत्री को बहुत पहले ही छोड़ देना चाहिए था। यूपी में विशेषकर, छोटे एवं मध्यम स्तर के किसानों को 'आवारा पशुओं' ने भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर यही घोषणा चुनाव से पहले हुई होती तो उत्तर प्रदेश की अधिकांश ग्रामीण सीटों पर निश्चित तौर से भाजपा को इसका बड़ा फायदा मिलता।

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चुनाव में 'आवारा पशुओं' का मुद्दा अहम है

किसान राम किशन का कहना है, चुनाव में 'आवारा पशुओं' का मुद्दा अहम है। भले ही कोई भी क्षेत्र हो, वहां पर आवारा पशु खेती तबाह कर रहे हैं। रायनगर की गोशाला का कामकाज देखने वाले इमरान खान कहते हैं, यहां तो हमें जबरदस्त परेशानी झेलनी पड़ती है। दबंगों द्वारा धमकी दी जाती है कि अगर उनके वे पशु, जिन्होंने अब दूध देना छोड़ दिया है, उन्हें गोशाला में रखो। चूंकि गोशाला में 54 से ज्यादा गायें रखने की इजाजत नहीं है, इसलिए उन्हें मना करते हैं तो वे मारने को दौड़ते हैं। यहां पर सबसे बड़ी दिक्कत यही है कि लोग जानबूझकर अपने पशुओं को खुला छोड़ देते हैं। शिकायत देने का कोई नियम है नहीं। अगर दे दी तो सुनवाई नहीं होगी। दूसरा, उसके बाद दबंगों की ज्यादती झेलनी पड़ेगी। नतीजा, किसान परिवार को अपनी आंखों के सामने खेत खत्म होते हुए देखना पड़ता है। उत्तर प्रदेश में किसान ही नहीं, पूरा परिवार आवारा पशुओं से परेशान है। बच्चे, जितना समय स्कूल कालेज में बिताते हैं, उतना ही उन्हें खेतों में 'रखवाली' के लिए रहना पड़ता है।  

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सड़क हादसों में मारे जाते हैं आवारा पशु

करहल के बाईपास रोड पर सर्वेश यादव ने बताया, आवारा पशुओं ने खेती तबाह कर दी है। किसानों के मसले पर करण सिंह बोले, प्रदेश में गोशालाओं की स्थिति ठीक नहीं है। शाम होते ही वहां से पशुओं को निकाल दिया जाता है। चारा भी नहीं मिलता। सड़क हादसों में आवारा पशु मारे जाते हैं। किसान दिन में खेती करे और रात में आवारा पशुओं से खेत की रखवाली करे। उसके पूरे परिवार को खेती में ड्यूटी देनी पड़ती है। ऐसे में वह बीमार हो जाता है। गोशाला में गायों को हरा चारा भी नहीं मिलता है। केवल भूसा डाला जाता है।


कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र के किसानों का कहना था, उन्हें 'सरकारी सांड' की समस्या से जूझना पड़ रहा है। इसके लिए खेतों में 'मचान पै खाट' डालनी पड़ती है। नकुड़ में एक कोल्हू पर खड़े मौलवी कामिल ने कहा, आवारा पशुओं ने हालत खराब कर रखी है। यहां बात किसी धर्म या जाति की नहीं है, बल्कि किसान की है। आवारा पशु के सामने हिंदू हो या मुसलमान, वे तो सबके खेतों को चर जाते हैं। चुनाव में ये बहुत बड़ा मुद्दा है।

भले ही फसल का दाम न मिले लेकिन छुट्टा पशुओं को नहीं झेल सकते...  

थाना भवन विधानसभा क्षेत्र के गांव भैसानी इस्लामपुर के निकटवर्ती खेतों में मौजूद किसान नरेश और जयप्रकाश का कहना था, वे आवारा पशुओं से बहुत परेशान हैं। लोगों की फसलें गायों ने नष्ट कर दी हैं। लोग अपने घरों में सोते हैं, जबकि हमें खेतों में सोना पड़ रहा है। गन्ने की पेमेंट में देरी झेली जा सकती है, फसल का दाम सही न हो, ये नुकसान भी उठा सकते हैं, मगर आवारा पशु उनकी आंखों के सामने तैयार फसल को बर्बाद कर दें, ये नहीं देख सकते। प्रदेश में जो भी व्यक्ति खेती कर रहा है, वह चुनाव में वोट देते वक्त इस मुद्दे को अवश्य ध्यान में रखता है। छपरौली में किसान विधुर का कहना है, सरकार ने किसानों की तरफ ध्यान ही नहीं दिया। आवारा पशु ही खेत खा रहे हैं। किसान को तेज गर्मी, ठंड और बरसात में खेतों की रखवाली करनी पड़ती है।

10 मार्च के बाद खत्म हो जाएगी छुट्टा पशुओं की समस्या...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के उन्नाव में दो दिन पहले एक चुनावी रैली में कहा है, 10 मार्च के बाद छुट्टा पशुओं की समस्या से निजात दिलाने के लिए नई व्यवस्था बनाई जाएगी। 10 मार्च को वोटों की गिनती होगी। मोदी ने कहा, मेरे ये शब्द लिखकर रखिए, ये मोदी बोल रहा है और आपके आशीर्वाद के साथ बोल रहा है। जो पशु दूध नहीं देता है, उसके गोबर से भी आय हो, ऐसी व्यवस्था मैं आपके सामने खड़ी कर दूंगा। एक दिन ऐसा आएगा कि छुट्टा पशु जो हैं न, लोगों को लगेगा कि यार इसे भी बांध लो, इससे भी कमाई होने वाली है।



राजनीतिक जानकार एवं वरिष्ठ पत्रकार निर्मल यादव कहते हैं, वाकई उत्तर प्रदेश में आवारा पशु एक बड़ी समस्या बन गए हैं। चाहे किसी भी क्षेत्र में पता करें, किसानों के बीच ये मुद्दा है। वजह, इससे किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा है। उन्हें 24 घंटे के दौरान अलग-अलग शिफ्टों में ड्यूटी देनी पड़ती है। आवारा पशु केवल खेती ही तबाह नहीं करते, बल्कि वे लोगों को घायल भी कर देते हैं। सपा ने वादा किया है कि अगर वह सत्ता में आती है तो सांडों के हमले में मृत परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। पीएम की घोषणा तीसरे चरण के मतदान के दौरान आई है। अभी मतदान के चार चरण बाकी हैं। 10 मार्च को पता चलेगा कि पीएम की इस घोषणा का कितना असर हुआ है। हां, ये घोषणा चुनाव से पहले हुईं होती तो भाजपा को इसका फायदा मिल सकता था।

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