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उत्तर प्रदेश चुनाव: भाजपा ने उतार दिए इतने दिग्गज, पूर्व गवर्नर से लेकर सांसद तक, क्या है संदेश?

Sat, 15 Jan 2022 08:30 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Sat, 15 Jan 2022 08:30 PM IST
सार

भाजपा केंद्रीय नेतृत्व में बड़ी भूमिका निभाने वाले नेता का कहना है कि निश्चित तौर पर 2022 का चुनाव 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों के जनादेश का आधार होगा। इसी वजह से पार्टी जनता के बीच में उन चेहरों को उतारा है जो चुनाव जीतने के सबसे प्रबल दावेदार हैं...

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UP election 2022: In the list of candidates released by BJP, from former Governor to MPs, Chief Minister to Deputy Chief Minister will contestbthe election
भाजपा मुख्यालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भाजपा को इस बात का अंदाजा है कि 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों का संदेश आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों का एक बड़ा जनादेश होगा। यही वजह है कि पार्टी आलाकमान ने शनिवार को भाजपा के उम्मीदवारों की जो सूची जारी की है, उसमें बड़े से बड़े कद्दावर नेताओं को मैदान में उतार दिया गया है। इसमें पूर्व गवर्नर से लेकर सांसदों और मुख्यमंत्री से लेकर उपमुख्यमंत्री तक जनता के बीच पहुंच गए हैं।  

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भाजपा ने शनिवार को 107 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी। इसमें 105 नाम तो पहले और दूसरे चरण में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए हैं। जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का नाम पार्टी ने एक बड़ा संदेश और माहौल बनाने के लिए घोषित किया है। पार्टी ने शनिवार को घोषित किए गए उम्मीदवारों में जो बड़े नाम शामिल है, उसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, उत्तराखंड के पूर्व गवर्नर बेबी रानी मौर्य, पूर्व सांसद डॉ यशवंत, पूर्व सांसद चौधरी बाबूलाल और पूर्व सांसद भारतेंदु सिंह को मैदान में उतारा है। यह सभी वह बड़े नाम हैं जो भाजपा की ओर से बड़े फलक पर न सिर्फ नुमाइंदगी करते आए हैं बल्कि प्रदेश में भाजपा के बड़े नेताओं में शुमार भी किए जाते हैं।
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राजनीतिक विश्लेषक जेपी तोमर कहते हैं कि जो बड़े नाम पार्टी ने शनिवार को घोषित किए हैं उनमें कुछ नाम ऐसे हैं जो ना सिर्फ जातिगत समीकरणों को साधते हैं बल्कि दलित, पिछड़ा, अति पिछड़ा और पश्चिम उत्तर प्रदेश में जाटों को भी साधने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। उनका कहना है कि जिस तरीके से उत्तराखंड की पूर्व गवर्नर बेबी रानी मौर्य को आगरा ग्रामीण से पार्टी ने चुनावी मैदान में उतारा है वह निश्चित तौर पर एक बड़ा संदेश दे रहा है।
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भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक पार्टी ने जो नाम घोषित किए हैं, उन्हें महज कार्यकर्ता के तौर पर ही देखा गया। और उनकी जीत की संभावनाओं के साथ एक बड़े संदेश देने के लिहाज से चुनावी मैदान में उतारा गया है। भाजपा केंद्रीय नेतृत्व में बड़ी भूमिका निभाने वाले नेता का कहना है कि निश्चित तौर पर 2022 का चुनाव 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों के जनादेश का आधार होगा। इसी वजह से पार्टी जनता के बीच में उन चेहरों को उतारा है जो चुनाव जीतने के सबसे प्रबल दावेदार हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के प्रवक्ता बीएस चौधरी कहते है कि जिस तरह से भाजपा ने पहले और दूसरे चरण के साथ में गोरखपुर और प्रयागराज मंडल के दो टिकट जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या शामिल हैं, उनको भी घोषित कर दिया, तो इसका मतलब यह समझना चाहिए कि पार्टी ने मनोवैज्ञानिक तौर पर अपने वोटरों को एक संदेश दिया है। वे कहते हैं कि जब लोगों को मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री जैसे कद्दावर चेहरों के मैदान में उतरने का अंदाजा होता है तो चुनाव में एक गति आ जाती है। चौधरी कहते हैं इसका निश्चित तौर पर कुछ फायदा राजनीतिक पार्टियों को तो मिलता ही है। इस लिहाज से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या का नाम घोषित करके पार्टी ने पहले चरण से ही चुनावी बढ़त लेने की कोशिश जरूर की है।


राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो पार्टी ने जिस तरीके से 83 में 63 प्रत्याशी पुराने उतारे हैं और 20 प्रत्याशियों के टिकट काट दिए गए हैं उसका भी एक बड़ा संदेश है। और जो नए चेहरे उतारे गए उससे भी पार्टी भविष्य की राजनीति पर दांव लगाते हुए ही अपने मोहरे सेट कर रही है। राजनैतिक विश्लेषक जीडी शुक्ला कहते हैं कि अगर आप काटे गए बीस टिकटों का विश्लेषण करें तो पाएंगे उनमें से कुछ लोग तो पार्टी छोड़ कर चले गए। जबकि कुछ बड़े नाम बड़ी विधानसभा सीटों पर आ गए। इसलिए यह कहना कि बहुत बड़ी संख्या में पार्टी ने टिकटों को काट दिया है राजनीतिक तौर पर ठीक नहीं होगा। उनके मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उपमुख्यमंत्री केशव मौर्या और उत्तराखंड की पूर्व गवर्नर बेबी रानी मौर्य की सीटों को कामकाज के आधार पर कटी हुई सीटों के तौर पर न जोड़ें।

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