उत्तर प्रदेश चुनाव: फिर हिंदुत्व की पिच पर लौट आई भाजपा, सभी नेता दे रहे इस मुद्दे को धार
राजनैतिक विश्लेषक एचडी शुक्ला कहते हैं कि भाजपा बीते कुछ समय तक तो विकास के मुद्दों की ही बात करती आई थी। वह कहते हैं अभी भी भाजपा के नेताओं के मंच से विकास की बात होती है। लेकिन भाजपा को इस बात का अंदाजा है कि सिर्फ विकास ही नहीं हिंदुत्व का सॉफ्ट एजेंडा अगर उसमें नहीं डाला जाएगा, तो राजनैतिक राह निश्चित तौर पर थोड़ी मुश्किल हो जाएगी...
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चचाजान, अब्बा जान, जिन्ना, मदरसा, अयोध्या, काशी और अब मथुरा। यह वे नाम हैं जो इस वक्त उत्तर प्रदेश की राजनीति में न सिर्फ चर्चा का विषय बने हुए हैं, बल्कि राजनीतिक मंच से इनका खुलकर इस्तेमाल भी किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही भाजपा की ओर से चुनावी जमीन को और मजबूत करने के लिए राजनैतिक पिच को तैयार किया जा रहा है। विपक्षी पार्टियों का कहना है कि भाजपा को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के परिणाम का अंदाजा हो गया है। यही वजह है कि अब वह अपने उसी पुराने ढर्रे पर आ रही है, जिसमें वह लगातार हिंदुत्व को आगे करके चुनाव लड़ती आ रही है।
तीन सांसदों ने किया मौर्य का समर्थन
उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य ने बुधवार को "अयोध्या और काशी में भव्य मंदिर निर्माण जारी है, मथुरा की तैयारी है" के साथ जब ट्वीट किया तो राजनैतिक हलकों में भाजपा के हिंदुत्व मुद्दे की मजबूत हो रही पिच के कयास लगाए जाने शुरू कर दिए गए। मथुरा की बात का जिक्र होते ही सिर्फ उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य ही नहीं बल्कि भाजपा के कई सांसदों ने अयोध्या, काशी के बाद मथुरा को चुनावी एजेंडे की राह पर ले जाना शुरू कर दिया। भाजपा सांसद हरनाथ सिंह हो या साध्वी निरंजन ज्योति या बाबा बालक नाथ इन सांसदों ने खुलकर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य के मथुरा वाले बयान को आगे बढ़ाया। तीनों सांसदों ने कहा कि निश्चित तौर पर अब मथुरा में भी हमें अयोध्या की तर्ज पर भव्य मंदिर निर्माण की ओर बढ़ना होगा।
चुनावों में बात मदरसों तक पहुंची
केशव प्रसाद मौर्य ने ही नहीं बल्कि योगी सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्री रघुराज सिंह भी बीते सप्ताह कुछ ऐसे ही बयान देकर चर्चा में आ गए थे। रघुराज सिंह ने कहा था कि अगर भगवान ने उन्हें मौका दिया तो पूरे देश के मदरसे बंद करा देंगे। सिंह का कहना था कि दरसल मदरसे आतंकियों को प्रशिक्षण देने के अड्डे बन चुके हैं। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए कहा था कि पहले उत्तर प्रदेश में महज ढाई सौ मदरसे होते थे। अब इनकी संख्या बढ़कर 22 हजार के करीब हो गई है। उन्होंने मदरसों पर हमला बोलते हुए कहा कि यहां पर जब आतंक की पढ़ाई होगी, तो आतंकी ही निकलेंगे। इसलिए इन्हें तो पूरी तरह से बंद कर दिया जाना चाहिए। हिंदू-मुस्लिम करते हुए योगी सरकार के मंत्री सिर्फ यहीं नहीं रुकते हैं। बल्कि वे यह तक कहते हैं कि केरल में इस्लामिक पाठ चल रहा है। इसलिए वहां की सरकार को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए।
विकास की बजाय हिंदू-मुस्लिम का राग
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को अयोध्या में कहा कि यह सूर्यवंश की राजधानी है। योगी आदित्यनाथ ने कहा प्रभु श्रीराम और धर्म अलग अलग नहीं हो सकते, यह तो एक दूसरे के पूरक हैं। योगी आदित्यनाथ और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों की काशी, मथुरा, अयोध्या और मदरसों की बात पर समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कहते हैं कि भाजपा को 2022 के चुनावों के परिणाम का अंदाजा है। शायद यही वजह है कि अब पार्टी हिंदू-मुस्लिम करने लगी है। अखिलेश यादव का कहना है कि उत्तर प्रदेश की जनता ने समझ लिया है कि चुनाव हिंदू-मुस्लिम के नाम पर नहीं हो सकते। इसलिए इन किसी मामलों में न पड़ते हुए विकास के एजेंडे को सामने रखेंगे और 2022 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनाएंगे।
पार्टी की लाइन लेंथ क्या है?
राजनैतिक विश्लेषक एचडी शुक्ला कहते हैं कि भाजपा बीते कुछ समय तक तो विकास के मुद्दों की ही बात करती आई थी। वह कहते हैं अभी भी भाजपा के नेताओं के मंच से विकास की बात होती है। लेकिन भाजपा को इस बात का अंदाजा है कि सिर्फ विकास ही नहीं हिंदुत्व का सॉफ्ट एजेंडा अगर उसमें नहीं डाला जाएगा, तो राजनैतिक राह निश्चित तौर पर थोड़ी मुश्किल हो जाएगी। यही वजह है कि भाजपा के ज्यादातर बड़े नेता अपनी रैलियों और जनसभाओं में न सिर्फ हिंदुत्व के सॉफ्ट एजेंडे को धीरे से जनता के बीच में सरका देते हैं, बल्कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में राजनीतिक पिच पर उसे मजबूत भी कर रहे हैं। वे कहते हैं आप पुरानी रैलियों को उठाकर देख लीजिए। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर गृहमंत्री तक अब्बा जान, जिन्ना, अयोध्या, मथुरा और काशी और अयोध्या में बन रहे राम मंदिर तक का जिक्र खुलकर करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है निश्चित तौर पर अयोध्या में बनने वाला राम मंदिर भाजपा की सरकार की उपलब्धियों में से एक है। क्योंकि भाजपा बीते कई दशकों से राम मंदिर मुद्दे को आगे रखकर के ही चुनाव लड़ती आई थी। इसलिए उनका राम मंदिर निर्माण का जिक्र करना लाजमी भी है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है जब आप चुनाव के दौरान सिर्फ राम मंदिर ही नहीं हिंदू-मुस्लिम की बात करना शुरू करते हैं तो अंदाजा लग जाता है कि पार्टी की लाइन लेंथ क्या है।
आस्था से जुड़ा मामला बताया
समाजवादी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी कहते हैं कि भाजपा ने पांच साल तक कोई काम नहीं किया, बल्कि समाजवादी पार्टी के किए गए कामों को अपना बताकर आगे बढ़ाया है। अब भाजपा के पास कोई एजेंडा नहीं है तो वह मंदिर-मस्जिद, हिंदू-मुस्लिम करने में लगी हुई है। लेकिन मुख्य मुद्दे से लोगों को भटका कर वोट नहीं लिए जा सकते हैं। इसलिए इस बार उत्तर प्रदेश की जनता ने पूरी तरीके से भाजपा की सरकार को हटाने का मन बना लिया है। इस पूरे मसले पर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी कहते हैं तुष्टिकरण की राजनीति करने वाले दलों को आज तकलीफ हो रही है कि भाजपा मंदिरों पर क्यों सवार रही है। क्यों अयोध्या, काशी, मथुरा का विकास कर रही है। त्रिपाठी के मुताबिक उनके लिए ये कभी चुनावी मसले रहे ही नहीं। यह सब आस्था से जुड़ा मामला है। हम सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के केंद्रों को सहेजने और संवारने का काम कर रहे हैं।