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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   up election 2022: After a tough test in first 2 phases, BJP will now challenge SP in Yadav voters stronghold

उत्तर प्रदेश चुनाव: कड़ी परीक्षा के बाद अब सपा को यादवों के गढ़ में चुनौती देगी भाजपा

Wed, 16 Feb 2022 03:00 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Wed, 16 Feb 2022 03:00 PM IST
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सार
भाजपा ने तीसरे चरण में अखिलेश यादव की करहल सीट से एसपी सिंह बघेल को उतारकर चुनाव को पेचीदा बना दिया है। हालांकि समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल सिंह यादव कहते हैं कि इस क्षेत्र की जसवंतनगर, करहल जैसी कुछ ऐसी सीटें हैं, जहां भाजपा या किसी दल को जीतने का सपना नहीं देखना चाहिए...
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up election 2022: After a tough test in first 2 phases, BJP will now challenge SP in Yadav voters stronghold
अखिलेश यादव - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

अब तक हुए दो चरणों के चुनाव में 2017 में भाजपा के लिए सबसे कठिन दूसरे चरण की मुस्लिम बहुल 55 सीटें थीं। इसमें उसे 38 पर सफलता मिली थी। इसके बाद के अगले दो चरणों में भाजपा का औसत ठीक-ठाक था। तीसरे चरण की 16 जिलों की 59 में से 49 सीटें मिली थीं। इस तरह से जाट बहुल, मुस्लिम बहुल के बाद भाजपा अब यादव गढ़ में समाजवादी पार्टी को चुनौती दे रही है। हालांकि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बहुत संभलकर प्रत्याशी उतारे हैं।



भाजपा ने तीसरे चरण में अखिलेश यादव की करहल सीट से एसपी सिंह बघेल को उतारकर चुनाव को पेचीदा बना दिया है। हालांकि समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल सिंह यादव कहते हैं कि इस क्षेत्र की जसवंतनगर, करहल जैसी कुछ ऐसी सीटें हैं, जहां भाजपा या किसी दल को जीतने का सपना नहीं देखना चाहिए। यहां की जनता नेता जी और समाजवादी पार्टी पर ही भरोसा करती है। जसवंतनगर से खुद शिवपाल सिंह यादव मैदान में हैं। 2017 में बसपा प्रमुख मायावती के हाथ दूसरे और तीसरे चरण में खाली रह गए थे। यह विधानसभा चुनाव मोदी लहर में हुआ था और इसमें समाजवादी पार्टी के भी कई बड़े नेता चुनाव हार गए थे।


इस बार भी इस क्षेत्र से कई वीआईपी प्रत्याशी हैं। फर्रुखाबाद से प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष, पूर्व केंद्रीय मंत्री की पत्नी लुईस खुर्शीद भी मैदान में हैं। कन्नौज से आईपीएस की नौकरी छोड़कर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे असीम अरुण की प्रतिष्ठिा दांव पर है। महाराजपुर से योगी सरकार के मंत्री सतीश महाना भी चुनाव मैदान में हैं।

उत्तर प्रदेश के तीन क्षेत्र को समेटता है तीसरा चरण

तीसरे चरण में अवध, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड की सीटें आती हैं। मैनपुरी, एटा, कासगंज, फिरोजाबाद और हाथरस में कुल 19 सीटें आती हैं और सभी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले हैं। जबकि कानपुर, कानपुर देहात, औरैया, फर्रुखाबाद, कन्नौज, इटावा के छह जिलों की 27 विधानसभा सीटें अवध क्षेत्र का हिस्सा हैं। झांसी, महोबा, हमीरपुर, ललितपुर, जालौन जिले की 13 विधानसभा सीटों में मतदान भी इसी चरण में 20 फरवरी को होगा। बुंदेलखंड में तो विपक्ष को 2017 में एक भी सीट हासिल नहीं हुई थी। तीसरे चरण की 16 में से 10 जिले में उसे मायूसी हाथ लगी थी। यादव बेल्ट में भाजपा ने परचम फहरा दिया था। इसमें एटा, इटावा, कन्नौज, मैनपुरी, फर्रुखाबाद, कानपुर देहात में समाजवादी पार्टी की जड़ें काफी मजबूत रही हैं। यादव बहुल जिले में 2012 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने जबरदस्त सफलता के झंडे गाड़े थे। इस बार सपा ने अपनी साइकिल को रफ्तार देने के लिए काफी कुछ मैनेज किया है। प्रत्याशियों को लेकर भी अखिलेश यादव ने संवेदनशीलता बरती है। तीसरे चरण में यादव, शाक्य, कुर्मी, लोध, कुशवाहा, कई सीटों पर प्रभावी भूमिका में रहते हैं।

सपा को ऑक्सीजन देने वाले कुछ मुद्दे

कांग्रेस पार्टी कानपुर, बिकरु गांव के विकास दुबे प्रकरण को हवा दे रही है। इस प्रकरण में मारे गए अमर दुबे की नव विवाहिता पत्नी खुशी दुबे जेल में है। खुशी दुबे के अपराध को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। कांग्रेस ने उनकी बहन को मैदान में उतारा है। अखिलेश यादव इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बुल्डोजर से जोड़कर तंज कस देते हैं। इस मुद्दे को ब्राह्मणों को लेकर योगी सरकार के रूख से जोड़ा जाता है। इसके सामानांतर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्र की रिहाई को मुद्दा बना रही हैं। आशीष मिश्र पर लखीमपुर खीरी में किसानों पर इरादतन गाड़ी चढ़ाने और उन्हें जानमाल का नुकसान पहुंचाने का आरोप है। हाथरस में दुष्कर्म पीडि़ता के शव को आधी रात को बिना परिवार की अनुमति से जला दिया गया था। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की पहल पर यह राष्ट्रीय मुद्दा बन गया था। इन मुद्दों को उठाकर विपक्ष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन की कलई खोलने में जुटा है। भाजपा अखिलेश के राज में सपा के आतंक का मुद्दा उठाकर मतदाताओं को लुभाने में लगी है।  

भाजपा के लिए क्यों अहम है तीसरा चरण

पिछले दो चरणों में मतदान का प्रतिशत कम रहा है। दोनों चरणों में 2022 का चुनाव भाजपा के थोड़ा कठिन माना जा रहा है। भाजपा के नेता भी यहां 2017 की स्थिति दोहराने का दावा नहीं कर पा रहे हैं। समाजवादी पार्टी और रालोद के नेताओं का कहना है कि चुनाव में जातिगत मुद्दे प्रमुखता से हैं। तीसरे चरण में भी हावी रहेंगे। जबकि भाजपा नेताओं का कहना है कि चुनाव जातिगत मुद्दे से बाहर आ गया है। इन दोनों तथ्यों का परीक्षण इसी तीसरे चरण में होना है। एक केंद्रीय मंत्री को पहले के दोनों चरणों में 65-70 सीटें मिलने का भरोसा है। सहारनपुर के एक भाजपा नेता के मुताबिक दो चरणों की 113 सीटों में 68-75 मिल जाएंगी। जबकि समाजवादी पार्टी और रालोद के नेता दोनों चरणों में 75-90 सीटें पाने का दावा कर रहे हैं। ऐसे में तीसरे चरण में सत्ता पक्ष या विपक्ष दोनों के हाथ में चुनावी लड्डू आाने की संभावना है। इस चरण के मतदान की स्थिति को एक तरह से संजीवनी देने वाली माना जा रहा है।

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