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सौन्दर्य उत्पाद के लिए पहली बार हुआ कन्नौज की सुगंध का इस्तेमाल
Sun, 28 Feb 2021 05:22 AM IST
देव कश्यप
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 28 Feb 2021 05:22 AM IST
सार
- वैज्ञानिकों ने फेस सीरम और सुगंध को लेकर नई तकनीक भी की विकसित।
- बाजार में घातक रसायनों से युक्त उत्पादों से लोगों को बचाने की कवायद।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
हर्बल और आयुर्वेद की आड़ में घातक रसायनों से युक्त सौन्दर्य उत्पादों के खिलाफ भारतीय वैज्ञानिकों ने नई तकनीक को विकसित किया है। करोड़ों रुपये के इस बाजार में लोगों तक प्रभावी चीज पहुंचाने के लिए वैज्ञानिकों ने पहली बार कन्नौज की सुगंध का इस्तेमाल किया है।
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इसके लिए बकायदा फेस सीरम और सुगंध को लेकर नई तकनीक को भी विकसित किया। इसका एक फायदा महिलाओं को संक्रमण से बचाना भी है। जानकारी के अनुसार केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय के कन्नौज स्थित सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र ने नई तकनीक विकसित की है, जिसे एमिल फार्मास्युटिकल्स को हस्तांतरित किया है।
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साइंटिफिक ऑफिसर ज्ञानेंद्र सिंह की निगरानी में प्राकृतिक फेस सीरम एवं सुगंध की नई तकनीक को विकसित किया है, जिस पर आयुथवेदा नामक आयुर्वेदिक सौंदर्य उत्पादों की श्रृंखला लॉन्च की है।
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हजारों करोड़ रुपये का है कारोबार
विशेषज्ञों के अनुसार, देश में सौंदर्य प्रसाधनों का हजारों करोड़ रुपये का कारोबार है। इनमें सबसे ज्यादा सौंदर्य उत्पाद रसायुक्त होते हैं, इनके दुष्प्रभावों के बाद हर्बल सौंदर्य उत्पादों का प्रचलन बढ़ा। लेकिन हर्बल के नाम पर बहुत कुछ बाजार में बेचा जाने लगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी घातक रसायनों से युक्त सौंदर्य उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने के लिए हाल ही में एक ड्राफ्ट भी तैयार किया है। इसे लेकर द इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट(आईएडीवीएल) भी कई सालों से देश भर में अभियान चला रहा है।
42 जड़ी बूटियों का किया जा रहा इस्तेमाल
अध्ययन को लेकर एमिल के कार्यकारी निदेशक डॉ. संचित शर्मा ने बताया कि औषधीय गुणों के सहारे कई तरह के संक्रमण से बचाने के लिए कन्नौज की सुगंध का इस्तेमाल किया है। भृंगराज, शिकाकाई, तुलसी, तिल, काफीबीन्स, पुदीना, सत्व, प्याज, एलोवेरा समेत कुल 42 जड़ी-बूटियों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। महिलाओं के आंतरिक अंगों की स्वच्छता और उन्हें संक्रमण से बचाना इसका उद्देश्य है। त्वचारोग विशेषज्ञ भी इस तकनीक में शामिल हैं।