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यूपी चुनावः पार्टी का चेहरा बनाने के लिए नेतृत्व तैयार, बस राजनाथ की हां का इंतजार
हिमांशु मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 08 Jun 2016 08:40 PM IST
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- फोटो : Getty Images
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केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह करो या मरो की स्थिति वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा का चेहरा हो सकते हैं। हालांकि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इसके लिए वह खुद तैयार होंगे या नहीं। पार्टी नेतृत्व राजनाथ के समक्ष इस आशय का प्रस्ताव पहले ही रख चुका है।
दरअसल पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि यूपी में मुलायम सिंह यादव-अखिलेश यादव और मायावती जैसे दिग्गज सियासी चेहरे के मुकाबले वह किसी गुमनाम या औसत व्यक्तित्व के नेता को आगे कर चुनाव मैदान में उतरे। फिर संगठन की कमान पिछड़ी जाति के केशव प्रसाद मौर्य को देने के बाद अगड़ी जातियों की अपने पक्ष में गोलबंद करने के लिए उसे किसी अगड़े और दमदार चेहरे की जरूरत है।
प्रदेश के सामाजिक समीकरण को साधने के लिए पार्टी ने जातिविशेष में असर रखने वाले कुछ अन्य पुराने चेहरों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने का फैसला किया है। पार्टी के अतिविशिष्ट सूत्र ने स्वीकार किया कि उत्तर प्रदेश में राजनाथ चुनावी चेहरा के लिए आलाकमान की न सिर्फ पहली पसंद हैं, बल्कि उनके समक्ष इस आशय का प्रस्ताव भी रखा जा चुका है।
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उक्त सूत्र ने कहा कि निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश में पार्टी सामूहिक नेतृत्व के बदले चेहरे के साथ चुनाव मैदान में होगी। चेहरा कद्दावर होगा, जिससे पहचान का संकट खड़ा होने की स्थिति पैदा ना हो। राज्य में सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लडने की स्थिति नहीं है।
गौरतलब है कि पार्टी के समक्ष प्रदेश की दूसरी पंक्ति के नेताओं में एक भी चेहरा ऐसा नहीं है जिसकी पूरे उत्तर प्रदेश में लोकप्रियता हो। यही कारण है कि इस बारे में कल्याण सिंह, स्मृति ईरानी सहित कई नेताओं को भी चुनावी चेहरा बनाने के कयास लगे हैं। जबकि वरुण गांधी, योगी आदित्यनाथ सहित कुछ और नेताओं के समर्थकों ने इसके लिए दावेदारी पेश की है।
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दरअसल पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि यूपी में मुलायम सिंह यादव-अखिलेश यादव और मायावती जैसे दिग्गज सियासी चेहरे के मुकाबले वह किसी गुमनाम या औसत व्यक्तित्व के नेता को आगे कर चुनाव मैदान में उतरे। फिर संगठन की कमान पिछड़ी जाति के केशव प्रसाद मौर्य को देने के बाद अगड़ी जातियों की अपने पक्ष में गोलबंद करने के लिए उसे किसी अगड़े और दमदार चेहरे की जरूरत है।
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प्रदेश के सामाजिक समीकरण को साधने के लिए पार्टी ने जातिविशेष में असर रखने वाले कुछ अन्य पुराने चेहरों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने का फैसला किया है। पार्टी के अतिविशिष्ट सूत्र ने स्वीकार किया कि उत्तर प्रदेश में राजनाथ चुनावी चेहरा के लिए आलाकमान की न सिर्फ पहली पसंद हैं, बल्कि उनके समक्ष इस आशय का प्रस्ताव भी रखा जा चुका है।
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उक्त सूत्र ने कहा कि निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश में पार्टी सामूहिक नेतृत्व के बदले चेहरे के साथ चुनाव मैदान में होगी। चेहरा कद्दावर होगा, जिससे पहचान का संकट खड़ा होने की स्थिति पैदा ना हो। राज्य में सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लडने की स्थिति नहीं है।
गौरतलब है कि पार्टी के समक्ष प्रदेश की दूसरी पंक्ति के नेताओं में एक भी चेहरा ऐसा नहीं है जिसकी पूरे उत्तर प्रदेश में लोकप्रियता हो। यही कारण है कि इस बारे में कल्याण सिंह, स्मृति ईरानी सहित कई नेताओं को भी चुनावी चेहरा बनाने के कयास लगे हैं। जबकि वरुण गांधी, योगी आदित्यनाथ सहित कुछ और नेताओं के समर्थकों ने इसके लिए दावेदारी पेश की है।
राजनाथ माने तो असम की तर्ज पर चुनाव संभव
अगर राजनाथ सिंह ने नेतृत्व का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया तो पार्टी यूपी में असम की तर्ज पर चुनाव मैदान में उतरेगी। बिहार में सामूहिक नेतृत्व में चुनावी समर में उतरने और करारी हार के बाद पार्टी ने असम में खेल राज्य मंत्री सर्वानंद सोनोवाल को चेहरा बनाया था। इस दौरान उन्हें मंत्री पद पर भी बनाए रखा गया था। राजनाथ की हां के बाद पार्टी उत्तर प्रदेश में भी यही फार्मूला अपना सकती है।
यूपी चुनाव में पार्टी नेतृत्व कई और कद्दावर नेताओं को अलग-अलग जिम्मेदारी देगी। ऐसे में चुनाव में हार या जीत दोनों ही स्थिति में किसी के समक्ष अंगुली उठाने का मौका नहीं होगा। बिहार के नतीजे आने के बाद पार्टी की बुजुर्ग सेना ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा निशाना साधा था। तब चुनावी रणनीति में किसी अन्य नेता की कोई भूमिका भी नहीं थी।