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Maharashtra: अनचाही बेटी से IAS बनने तक; महाराष्ट्र की अधिकारी संजीता महापात्रा के दृढ़ संकल्प की कहानी
Sun, 19 Jan 2025 05:29 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमरावती
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमरावती
Published by: पवन पांडेय
Updated Sun, 19 Jan 2025 05:29 PM IST
सार
महाराष्ट्र के अमरावती जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीता महापात्रा की कहानी उनके दृढ़ संकल्प को प्रदर्शित करती है। एक गरीब परिवार में जन्म होने के बाद तमाम मुश्किलों के बाद वे अब अपने माता-पिता की चहेती बन सकीं हैं।
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संजीता महापात्रा, आईएएस अधिकारी
- फोटो : X / @sanjita1609
विस्तार
एक अनचाही लड़की से आईएएस अधिकारी बनने तक, संजीता महापात्रा की कहानी, दृढ़ संकल्प और दृढ़ संकल्प के साथ बाधाओं को पार करने की है। संजीता महापात्रा मौजूदा समय में महाराष्ट्र में अमरावती जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं, जिन्होंने जिले में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है।
ओडिशा के राउरकेला में हुआ था जन्म
कुछ दिनों पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, संजीता महापात्रा ने बताया कि उनका जन्म ओडिशा के राउरकेला में एक गरीब परिवार में हुआ था, और उनके जन्म ने उनकी मां को निराश कर दिया था, जो अपनी बड़ी बहन के बाद एक लड़के की चाह रखती थीं। आईएएस अधिकारी ने कहा कि उनके परिवार ने उन्हें लगभग छोड़ दिया था, लेकिन उनकी बड़ी बहन के आग्रह पर उनके माता-पिता ने उन्हें रख लिया।
तमाम बाधाओं से भरा था आईएएस का बचपन
संजीता महापात्रा का बचपन उनके परिवार की खराब आर्थिक स्थिति के कारण बाधाओं से भरा था। उन्हें अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए सामाजिक संगठनों, शिक्षकों और छात्रवृत्ति पर निर्भर रहना पड़ा। मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल करने के बाद, उन्हें स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया में सहायक प्रबंधक के रूप में नियुक्त किया गया और इस दौरान, उन्होंने अपने माता-पिता को उनके गांव में एक घर बनाने में मदद की।
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'अब मेरी उपलब्धियों पर गर्व करते हैं माता-पिता'
वे बताती हैं कि उनके माता-पिता अब उनकी उपलब्धियों पर गर्व करते हैं। संजीता महापात्रा बचपन से ही आईएएस अधिकारी बनने की ख्वाहिश रखती थीं और अपने पति की प्रेरणा और समर्थन से उन्होंने 2019 में अपने पांचवें प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास कर ली। अमरावती जिला परिषद की सीईओ के रूप में, महापात्रा ने कहा कि वह स्वयं सहायता समूहों में महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती हैं और जिला परिषद स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना चाहती हैं। उन्होंने एसएचजी के उत्पादों के लिए एक खास बाजार बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है, उनकी ब्रांडिंग और पैकेजिंग से लेकर उनके लॉन्च तक।
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ओडिशा के राउरकेला में हुआ था जन्म
कुछ दिनों पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, संजीता महापात्रा ने बताया कि उनका जन्म ओडिशा के राउरकेला में एक गरीब परिवार में हुआ था, और उनके जन्म ने उनकी मां को निराश कर दिया था, जो अपनी बड़ी बहन के बाद एक लड़के की चाह रखती थीं। आईएएस अधिकारी ने कहा कि उनके परिवार ने उन्हें लगभग छोड़ दिया था, लेकिन उनकी बड़ी बहन के आग्रह पर उनके माता-पिता ने उन्हें रख लिया।
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तमाम बाधाओं से भरा था आईएएस का बचपन
संजीता महापात्रा का बचपन उनके परिवार की खराब आर्थिक स्थिति के कारण बाधाओं से भरा था। उन्हें अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए सामाजिक संगठनों, शिक्षकों और छात्रवृत्ति पर निर्भर रहना पड़ा। मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल करने के बाद, उन्हें स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया में सहायक प्रबंधक के रूप में नियुक्त किया गया और इस दौरान, उन्होंने अपने माता-पिता को उनके गांव में एक घर बनाने में मदद की।
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'अब मेरी उपलब्धियों पर गर्व करते हैं माता-पिता'
वे बताती हैं कि उनके माता-पिता अब उनकी उपलब्धियों पर गर्व करते हैं। संजीता महापात्रा बचपन से ही आईएएस अधिकारी बनने की ख्वाहिश रखती थीं और अपने पति की प्रेरणा और समर्थन से उन्होंने 2019 में अपने पांचवें प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास कर ली। अमरावती जिला परिषद की सीईओ के रूप में, महापात्रा ने कहा कि वह स्वयं सहायता समूहों में महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती हैं और जिला परिषद स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना चाहती हैं। उन्होंने एसएचजी के उत्पादों के लिए एक खास बाजार बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है, उनकी ब्रांडिंग और पैकेजिंग से लेकर उनके लॉन्च तक।