Unseasonal rains: बेमौसम बारिश से फिलहाल टला बिजली संकट, जून में तापमान बढ़ने के साथ ही घरों में होगी बत्ती गुल
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
विस्तार
फरवरी-मार्च में हुई जोरदार बारिश ने उत्तर भारत के राज्यों को गर्मी से राहत दी है। जबकि दूसरी तरफ इस बारिश ने राज्यों में बढ़ रही बिजली की डिमांड को भी काफी हद तक ठंडा किया है। बसंत ऋतु में हुई असामान्य बारिश से कुछ राज्यों में न सिर्फ बिजली की मांग घटी है, बल्कि इससे बिजली कंपनियों को आगामी महीनों के लिए कोयला इकठ्ठा करने के लिए समय मिल गया है। ऐसे में अब राज्यों में होने वाला बिजली संकट कुछ दिनों के लिए टल गया है। क्योंकि राज्यों ने इन दिनों में कोयले के स्टॉक को पूरा कर लिया है। हालांकि मौसम विभाग का अनुमान है कि अप्रैल-जून के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में गर्म हवा के थपेड़े सामान्य से ज्यादा होंगे। ऐसे में बिजली की मांग 200 गीगावॉट के स्तर को एक बार फिर पार कर जाएगी। इससे बिजली कंपनियों के साथ कोयले की स्टॉक कमी हो सकती है, जिससे बिजली संकट गहरा सकता है। मार्च के शुरुआती के शुरुआती 15 दिन में बढ़ते तापमान के कारण बिजली की मांग 205 गीगावॉट पहुंच गई थी।
जानकारी के अनुसार, मार्च के शुरुआती 15 दिन में बिजली की मांग 205 गीगावॉट पहुंच गई थी। जो एक अप्रैल 2023 को नए वित्त वर्ष की शुरुआत में 180 गीगावॉट रह गई है। इसके साथ ही ताप बिजली इकाइयों के पास भी कोयले का स्टॉक बढ़ा है। क्योंकि इन इकाइयों ने अपनी खपत कम कर दी है। जानकारों का कहना है कि पिछले साल मार्च में तापमान बढ़ना शुरू हो गया था। इसके विपरीत इस साल के तापमान में गिरावट देखी गई है। जिससे बिजली इकाइयों को राहत मिली है।
यह भी पढ़ें: Karnataka: हल्की बारिश में डूबा बेंगलुरु का नया मेट्रो स्टेशन, एक हफ्ते पहले ही पीएम मोदी ने किया था उद्घाटन
बिजली क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि इस महीने में मांग सुस्त है और ताप बिजली इकाइयों ने गर्मी के महीनों के लिए कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित करनी शुरू कर दी है और वे अपने पास कोयला जमा कर सकते हैं। कोल इंडिया ने ज्यादा उत्पादन किया है। इसके अलावा कुछ राज्यों ने आयातित कोयले के लिए बोली लगाई है, जिससे कोयले का स्टॉक बेहतर स्तर पर रहेगा। पिछले महीने के दौरान ताप बिजली संयंत्रों के पास 10 से 12 दिन के लिए कोयला था। मांग घटने से बिजली की औसत हाजिर कीमत भी अब पिछले दो सप्ताह में आधी होकर चार रुपये यूनिट रह गई है।
जून में फिर बढ़ सकती है बिजली की खपत
हालांकि बिजली इकाइयों के लिए ये राहत कम समय के लिए है। क्योंकि मौसम विभाग के हाल के अनुमान के मुताबिक अप्रैल-जून के दौरान देश के ज्यादातर इलाके में गर्म हवा के थपेड़े सामान्य से ऊपर रहेंगे। मौसम विभाग का कहना है कि बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब और हरियाणा में मौसम गर्म रहेगा। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि इस महीने के दूसरे सप्ताह से बिजली की मांग 200 गीगावॉट के स्तर को एक बार फिर पार कर जाएगी और उसके बाद से तापमान में फिर बढ़ोतरी होगी। इस साल की शुरुआत में ही केंद्र सरकार ने कोयले की मांग और आपूर्ति के मसले के समाधान के लिए कदम उठाए हैं।
उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून 2023 के दौरान देश में कोयले की कुल जरुरत 22.2 करोड़ टन रहने का अनुमान है। इससे 229 गीगावॉट बिजली की रिकॉर्ड मांग पूरी की जा सकेगी। घरेलू कोयले की उपलब्धता करीब 20.1 करोड़ टन रहने की उम्मीद है। जानकारों का कहना है कि इस कमी के चलते रोजाना एक से तीन लाख टन घरेलू कोयला कम पड़ेगा। ताप बिजली इकाइयों के पास इस समय रोजाना का औसत स्टॉक 3.5 करोड़ टन है।