2050 तक देश का हर पांचवां आदमी होगा 'बुजुर्ग’, सभी के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं देना होगी बड़ी चुनौती
संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि 2050 तक पुरुषों की औसत जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) 74.5 वर्ष और महिलाओं की औसत जीवन प्रत्याशा 79.1 वर्ष तक हो सकती है...
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वर्ष 2011 में देश में 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के बूढ़े लोगों की संख्या 10.3 करोड़ थी। यह कुल आबादी की लगभग 8.6 फीसदी थी। बुजुर्गों की आबादी में तीन फीसदी प्रति वर्ष तक की वृद्धि हो रही है। अनुमान है कि 2050 तक देश में वृद्धों की संख्या 31.9 करोड़ (कुल का 19.5 फीसदी) हो जाएगी।
इस मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि बूढ़े लोगों में लगभग 75 फीसदी किसी न किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित होते हैं तो 40 फीसदी वृद्ध लोगों में एक या एक से अधिक प्रकार की दिव्यांगता आ जाती है जो उनका जीवन बेहद कठिन बना देती है। हर पांचवां वृद्ध (या कुल का 20 फीसदी) मानसिक रूप से पीड़ित हो जाता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इतनी विशाल बुजुर्ग आबादी के स्वास्थ्य की चिंता सरकार के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभर सकती है।
बुजुर्गों की संख्या में इस बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण यह है कि देश-दुनिया में स्वास्थ्य सुविधाओं में बढ़ोतरी हो रही है और लोग अपने खान-पान को लेकर भी ज्यादा सतर्क हो रहे हैं। इसलिए लोगों की औसत उम्र में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि 2050 तक पुरुषों की औसत जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) 74.5 वर्ष और महिलाओं की औसत जीवन प्रत्याशा 79.1 वर्ष तक हो सकती है। अगर 45 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों की बात करें तो 2050 तक देश की कुल आबादी में इनका हिस्सा बढ़कर 40 फीसदी तक पहुंच सकता है।
केरल, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु और पुडुचेरी जैसे अच्छी स्वास्थ्य सुविधाओं वाले राज्यों में बूढ़े लोगों की संख्या ज्यादा होगी, जबकि गरीब और पिछड़े राज्यों में इनकी संख्या अपेक्षाकृत कम रहेगी।
द लोंगिट्युडिनल एजिंग स्टडी ऑफ इंडिया (LASI) की 2020 रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि संपन्न राज्यों के घरों में घरेलू सामान पर ज्यादा खर्च किया जाता है, लेकिन गरीब राज्यों में घरेलू वस्तुओं पर काफी कम खर्च किया जाता है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात है कि कुल घर खर्च का आधा से भी कम हिस्सा खाने-पीने वाली चीजों पर खर्च किया जाता है। अगर यह हिस्सा बढ़े तो इससे घरों के लोगों के स्वास्थ्य पर बेहतर असर पड़ सकता है।
कुल बुजुर्गों में 77 फीसदी को हाइपरटेंशन, 74 फीसदी को दिल संबंधी कोई बीमारी, 83 फीसदी को डाइबिटीज और 72 फीसदी बुजुर्गों का फेफड़ों से संबंधित बीमारी का इलाज इसके पूर्व किया जा चुका था। बाद में भी इन बुजुर्गों ने इस तरह की बीमारी से खुद को पीड़ित बताया।
स्वास्थ्य सेवाओं का बहुत कम उपयोग
देश के 45 वर्ष या इससे अधिक उम्र के लोगों के घरों के सर्वे में यह बात सामने आई है कि अभी भी बहुत कम लोग स्वास्थ्य के लिए इंश्योरेंस की सुविधाओं का उपयोग करते हैं। इनमें 26.2 फीसदी लोग किसी कंपनी का हेल्थ इंश्योरेंस का उपयोग करते हैं, जबकि 20.7 फीसदी लोग राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का उपयोग कर रहे हैं। 2.4 फीसदी लोग सीजीएचएस की सेवा का उपयोग करते हैं तो 2.1 फीसदी लोग ईएसआईएस योजना का लाभ लेते हैं।
किस आयु वर्ग के कितने लोग
देश की कुल आबादी में 27 फीसदी हिस्सा 0-14 वर्ष के बच्चों का है। 61 फीसदी लोग कामकाजी आयु वर्ग (15-59 वर्ष) के बीच के हैं। इस समय यही आबादी देश की सबसे ब़ड़ी ताकत है, लेकिन लगभग 20 साल बाद इसी आबादी का बड़ा हिस्सा बूढ़ा हो जाएगा। वहीं शेष 12 फीसदी 60 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र के बूढ़े लोग हैं।
यह सर्वे सिक्किम को छोड़कर पूरे देश के 72,250 लोगों पर किया गया, जिनकी उम्र 45 वर्ष या उससे ज्यादा थी। इनमें 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के 31,464 लोग भी शामिल थे। इस रिपोर्ट को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बुधवार को जारी किया।
सर्वे के लिए सेंपल लेने के समय यानी वर्ष 2017-18 में देश के 38 फीसदी ग्रामीण घरों में खुले में शौच किया जाता था, शहरों में पांच फीसदी घरों में खुले में शौच किया जाता था। वृद्धजनों के लिए यह एक बड़ी समस्या है क्योंकि ज्यादातर बुजुर्ग दूर चलने, शौच करने में असमर्थ हो जाते हैं।
2017-18 में कुल बुजुर्गों में सात फीसदी किसी संगठित क्षेत्र से रिटायर हुए थे, जबकि इनमें केवल 6 फीसदी ही पेंशन योजना का लाभ ले रहे थे। यानी लगभग 94 फीसदी बुजुर्ग परिवार के लोगों की आय पर निर्भर रहते हैं।