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Mansukh Mandaviya: 'भारत के पास दिमागी और जन शक्ति की कमी नहीं, बल्कि...', कार्यक्रम में बोले स्वास्थ्य मंत्री

Sat, 02 Mar 2024 01:47 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Sat, 02 Mar 2024 01:47 PM IST
सार

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अगर आप दुनियाभर के चिकित्या विश्वविद्यालयों में जाते हैं तो आपको महर्षि सुश्रुत की मूर्ति लगी हुई दिखाई देती है। पूरी दुनिया उनसे प्रेरणा लेती है।

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Union Health Minister Mansukh Mandaviya say India is an able nation
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया - फोटो : एएनआई

विस्तार

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने एक संवाद कार्यक्रम में कहा कि भारत एक सक्षम राष्ट्र है। यहां कभी भी दिमागी शक्ति और जनशक्ति की कमी नहीं रही बल्कि इच्छा शक्ति की कमी रही है। इसे भी पीएम मोदी ने पूरा कर दिया है।

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क्या हमें इस गलती को सुधारने का अधिकार नहीं?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, 'अगर आप दुनियाभर के चिकित्या विश्वविद्यालयों में जाते हैं तो आपको महर्षि सुश्रुत की मूर्ति लगी हुई दिखाई देती है। पूरी दुनिया उनसे प्रेरणा लेती है। हमने अभी तक उनकी मूर्ति नहीं बनाई है, यह एक गलती है। लेकिन क्या हमें इस गलती को सुधारने का अधिकार नहीं है?'
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मैंने लोगो को बदल दिया
उन्होंने आगे कहा, 'राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के लोगो में एक ग्रीक देवता थे, मुझे इससे कोई परेशानी नहीं है, लेकिन क्या हमें अपने भगवान और विरासत का सम्मान नहीं करना चाहिए। मैं बस यह कहना चाहता हूं कि नई पीढ़ी हमारे पास मौजूद वैज्ञानिकों से प्रेरणा ले और इसलिए मैंने लोगो को बदल दिया है। प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ काम करना चाहिए। भारत एक सक्षम राष्ट्र है। यहां कभी भी दिमागी शक्ति और जनशक्ति की कमी नहीं रही, बल्कि इच्छा शक्ति की कमी रही है, जिसे पीएम मोदी ने पूरा कर दिया है।
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बेहतर होगा कि हम कीमतें न बढ़ाएं
मनसुख मंडाविया ने कहा, 'कोविड-19 के दौरान मैंने कंपनियों को पीएम मोदी के संदेश से अवगत कराया है कि यह दुनिया के साथ सहयोग करने का समय है और बेहतर होगा कि हम कीमतें न बढ़ाएं। भारतीय कंपनियों ने 150 देशों को दवाओं की आपूर्ति की है, लेकिन कीमत नहीं बढ़ाई है। किसी भी देश ने कभी शिकायत नहीं की है, हमने दुनिया को गुणवत्तापूर्ण और सस्ती दवा की आपूर्ति की है। जब वैक्सीन की कीमत 20-30 डॉलर थी, तब हमने इसे या तो वैक्सीन मैत्री पहल के तहत मुफ्त में या 2-3 डॉलर की न्यूनतम लागत पर आपूर्ति की। अब दुनिया को लगता है कि भारत एक ऐसा देश है जो मानव सेवा को प्राथमिकता देता है और जरूरत पड़ने पर दोस्त बनकर मजबूती से खड़ा रहता है।'
 
उन्होंने कहा, 'बिल गेट्स भारत में हैं और जब वह बोलते हैं तो यह पूरी दुनिया में एक धारणा बन जाती है। पिछले विश्व आर्थिक मंच पर मेरी उनसे मुलाकात हुई थी, जब हमने हाथ मिलाया था तो उन्होंने कहा था, बधाई हो, आपने अच्छा कोविड प्रबंधन और टीकाकरण अभियान चलाया है।'


संस्कृत भाषा में लिखी औषधियों के नाम को आयुर्वेद समझते हैं लोग
पतंजलि आयुर्वेद के एमडी आचार्य बालकृष्ण ने कहा, 'विदेशों में पहुंचने के बाद भी आयुर्वेद अपनी पहचान आयुर्वेद के रूप में स्थापित नहीं कर पाया है। बहुत से लोग आयुर्वेद की मूल बातें भी नहीं जानते हैं कि क्या यह चिकित्सा का विज्ञान है या यह एक भाषा है? कभी-कभी लोग संस्कृत भाषा में लिखी औषधियों के नाम को आयुर्वेद समझते हैं।'

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