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Hindi News ›   India News ›   Union Cabinet Expansion: PM Modi looking for leaders like Nehru Cabinet to ease 2024 General Election

कैबिनेट विस्तार: नेहरू मंत्रिमंडल जैसे चेहरों की तलाश में मोदी, '2024' को आसान बनाने की कवायद

Wed, 07 Jul 2021 04:46 PM IST
गौरव पाण्डेय जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 07 Jul 2021 04:46 PM IST
सार

मोदी मंत्रिमंडल के पहले विस्तार को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कोरोनाकाल के दौरान केंद्र सरकार को विपक्ष ही नहीं, बल्कि जनता की तरफ से भी बहुत कुछ ऐसा सुनना पड़ा है, जो सरकार की लोकप्रियता के मापदंडों पर खरा नहीं उतरता। 

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Union Cabinet Expansion: PM Modi looking for leaders like Nehru Cabinet to ease 2024 General Election
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

राजनीतिक मामलों के जानकार और जेएनयू के पूर्व प्रोफेसर डॉ. आनंद कुमार का कहना है, दरअसल इस मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जवाहर लाल नेहरू मंत्रिमंडल के सरदार पटेल, जीबी पंत और मोरारजी देसाई जैसे चेहरों को तलाश रहे हैं। मंत्रिमंडल विस्तार का उत्तर प्रदेश, पंजाब या किसी अन्य राज्य के विधानसभा चुनाव पर कोई असर पड़ेगा, ऐसी कोई संभावना नजर नहीं आती। पीएम मोदी और भाजपा को अब '2024' के लोकसभा चुनाव की राह आसान बनानी है। 

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ऐसे फेरबदल को सकारात्मक भाव से देखा जाता है
प्रो. आनंद कहते हैं, चूंकि मंत्रिमंडल, निर्णय लेने का सबसे बड़ा मंच होता है, इसलिए इसमें किसी भी तरह के छोटे बड़े फेरबदल को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे फेरबदल को सकारात्मक भाव से देखा जाता है। जिन्हें नई जिम्मेदारी मिलती है, वे अपनी काबिलियत का दावा करते हैं, जो खाली हाथ रह जाते हैं या जिनसे पद छीन लिया जाता है, वे अपनी नाराजगी जाहिर करते हैं। मंत्रिमंडल विस्तार में कई बातें देखी जाती हैं। 
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जैसे सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व मिला है या नहीं। आज धर्म न सही, लेकिन जाति का मोल तो है। प्रशासन और उद्योग जगत भी चाहते हैं कि उनका भी प्रतिनिधित्व रहे। अगर सरकार में सहयोगी दल भी हैं तो वे भी पर्याप्त कोटा चाहते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे अहम विभाग भी देखने पड़ते हैं कि वे सही दिशा में हैं या नहीं। महिला प्रतिनिधियों को मंत्रिमंडल में सम्मानजनक स्थान मिला या नहीं, ये भी गौर करने वाली बात है। 

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मोदी के बराबर के कद वाला तो कोई बचा नहीं है

कई प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल के दौरान यह देखा जाता था कि मंत्रिमंडल में उनके कद के बराबर कौन है। अगर ताकतवर प्रधानमंत्री हैं तो उन्हीं का नाम लेकर कहा जाता कि मंत्री तो एक ही है, बाकी तो दरबारी हैं। प्रो. आनंद कुमार कहते हैं, आज केंद्रीय मंत्रिमंडल में मोदी के कद के बराबर कोई नहीं है। जब तक अरुण जेटली या सुषमा स्वराज जैसे नेता रहे तो यह माना जाता था कि वे उस योग्यता के मापदंडों पर खरे उतरते हैं। आज मंत्रिमंडल में योग्यता का अभाव रहा है। यही वजह है कि पीएम मोदी को बड़ा फेरबदल करना पड़ रहा है। 

प्रो. आनंद कुमार कहते हैं कि कोरोना काल में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिनमें विभाग का मंत्री कोई दूसरा है और जवाब कोई अन्य मंत्री दे रहा है। रक्षा, कृषि और शिक्षा के मामलों में ऐसा कुछ देखने को मिला है। इससे सरकार की छवि खराब हुई है। विदेशी मामलों में अच्छे की अपेक्षा की थी, मगर यहां भी निराशा ही हाथ लगी। आनंद कुमार कहते हैं, यहां तक कि नेपाल के साथ भी अच्छे संबंध नहीं बन सके। एक दूसरे मंत्रालयों में जबरदस्त हस्तक्षेप रहा है। अब अयोग्य लोगों की छंटाई और योग्य लोगों को मंत्रिमंडल में मौका दिया जा रहा है।

जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहे हैं कई बड़े मंत्री 

राजनीतिक मामलों के जानकार प्रोफेसर प्रो. आनंद कुमार के अनुसार, मौजूदा सरकार में केंद्रीय मंत्रियों का इस्तीफा दर्शाता है कि वे पद की जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहे हैं। सरकार की ऐसी छवि बन गई थी कि विपक्ष ने उसे नीतिविहीन और दिशाहीन कहना शुरू कर दिया। देश में किसानों का मुद्दा अनसुलझा रहा। चीन के साथ तनातनी चलती रही। बैंक डूबने की खबरें आती रही। कोरोनाकाल में स्वास्थ्य को लेकर मोदी सरकार को लोगों का विरोध झेलना पड़ा। 

कोरोना की पहली व दूसरी लहर के दौरान व्यवस्था अच्छी नहीं रही। नतीजा, हर्षवर्धन से इस्तीफा ले लिया गया। मोदी का मुख्य एजेंडा था नई शिक्षा नीति, लेकिन निशंक उस पर कुछ अच्छा नहीं कर सके। उन्हें भी बाहर जाना पड़ा है। महंगाई पर जो हो रहा है, वह सबके सामने है। पहली बार सरकार लाचार दिख रही है। पीएम को नेहरू मंत्रिमंडल के सरदार पटेल, देसाई और पंत जैसे मंत्रियों की तलाश है। देखने वाली बात ये है कि उनकी तलाश पूरी होती है या नहीं।

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