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चिंताजनक: जंक फूड से लाडलों को बचाएं, हर दसवां बच्चा मोटापे से जूझ रहा; कम वजनी से मोटे बच्चों की संख्या अधिक

Fri, 12 Sep 2025 05:44 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क/ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क/ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Fri, 12 Sep 2025 05:44 AM IST
सार

यूनिसेफ की वर्ल्ड न्यूट्रिशन रिपोर्ट बताती है कि दुनिया भर में अब हर दसवां बच्चा मोटापे से जूझ रहा है। यह आंकड़ा लगभग 18.8 करोड़ बच्चों का है। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब मोटापे से पीड़ित बच्चों की संख्या कम वजन वाले बच्चों से ज्यादा हो गई है।

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UNICEF report: Every tenth child suffering from obesity due to junk food and ultra-processed food
मोटापा की समस्या (फाइल) - फोटो : Freepik.com

विस्तार

क्या आपके बच्चे का खानपान सचमुच सुरक्षित और संतुलित है? आज दुनिया में बच्चों की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ भूख या कुपोषण नहीं रह गई, बल्कि जंक फूड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाने की वजह से बढ़ता मोटापा है। यह कुपोषण का नया चेहरा है।

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यूनिसेफ की ताजा रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अगर समय रहते कदम न उठाए गए तो हमारे बच्चे आने वाले वर्षों में मधुमेह, हृदय रोग और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के शिकार बन सकते हैं। पेरेंट्स को समय रहते सतर्क होकर बच्चों को ज्यादा से ज्यादा शारीरिक श्रम के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता है। यूनिसेफ की वर्ल्ड न्यूट्रिशन रिपोर्ट बताती है कि दुनिया भर में अब हर दसवां बच्चा मोटापे से जूझ रहा है। यह आंकड़ा लगभग 18.8 करोड़ बच्चों का है। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब मोटापे से पीड़ित बच्चों की संख्या कम वजन वाले बच्चों से ज्यादा हो गई है। 2000 से अब तक पांच से 19 वर्ष की आयु के कम वजन वाले बच्चों की संख्या 13% से घटकर 9.2% रह गई, लेकिन मोटापे से जूझ रहे बच्चों का अनुपात तीन गुना बढ़कर 9.4% हो गया।
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दुनिया में 39.1 करोड़ बच्चों में बढ़ते वजन की समस्या
दुनिया में 39.1 करोड़ बच्चे बढ़ते वजन की समस्या से जूझ रहे हैं। इनमें से आधे बच्चे मोटापे की श्रेणी में आते हैं। प्रशांत द्वीप समूह में स्थिति सबसे गंभीर है। नियू में 38, कुक आइलैंड्स 37 और नाउरू 33% बच्चे  मोटापे के शिकार हैं। अमेरिका और यूएई जैसे अमीर देशों में भी 21% बच्चे मोटापे से पीड़ित हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक मोटापा बच्चों को सिर्फ शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी प्रभावित करता है।


बच्चों की डाइट पर विज्ञापनों का दबाव
रिपोर्ट के अनुसार बच्चों की डाइट पर अब बाजार की ताकतें हावी हैं। चीनी, नमक और अस्वास्थ्यकर वसा से भरे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड व कोल्ड ड्रिंक उनके खानपान पर कब्जा कर चुके हैं। यूनीसेफ द्वारा किए गए 170 देशों के सर्वे में 75% युवाओं ने बताया कि उन्होंने पिछले हफ्ते जंक फूड व सॉफ्ट ड्रिंक के विज्ञापन देखे। 60% युवाओं ने स्वीकार किया कि इन विज्ञापनों से उनकी खाने की इच्छा और बढ़ गई। यही नहीं, संघर्ष या युद्ध-प्रभावित देशों के 68% युवाओं तक भी जंक फूड के विज्ञापन पहुंच रहे हैं।

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भारत-मैक्सिको की सकारात्मक पहल
भारत ने खाद्य पदार्थों में ट्रांस-फैट की मात्रा को घटाकर अधिकतम 2% तक सीमित कर दिया है। यह नियम खाने के तेल, वसा और उनसे बने उत्पादों पर लागू है। भारत ऐसा कदम उठाने वाला पहला मध्यम आय वाला देश बना है। भारत में सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) ने भी चेताया कि पैकेज्ड व फास्ट फूड में नमक और वसा की मात्रा, एफएसएसएआई की सीमा से कहीं ज्यादा है।

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