{"_id":"619b89249dd97d6fbf26d985","slug":"unfortunate-return-of-agricultural-laws-for-40-years-farmers-have-been-demanding-reforms-ghanvat-still-has-hope","type":"story","status":"publish","title_hn":"कृषि कानूनों की वापसी: घनवट बोले- फैसला दुर्भाग्यपूर्ण, कानूनी पहलुओं को देखने के बाद ही सार्वजनिक करेंगे रिपोर्ट","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
कृषि कानूनों की वापसी: घनवट बोले- फैसला दुर्भाग्यपूर्ण, कानूनी पहलुओं को देखने के बाद ही सार्वजनिक करेंगे रिपोर्ट
Mon, 22 Nov 2021 05:48 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Mon, 22 Nov 2021 05:48 PM IST
सार
घनवट ने कहा कि मौजूदा कृषि प्रणाली उचित व पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि मैं सोचता हूं कि इस सरकार में कृषि सुधारों की इच्छाशक्ति है।
विज्ञापन
कृषि विशेषज्ञ अनिल घनवट
- फोटो : ANI
विस्तार
केंद्र सरकार द्वारा तीनों विवादित कृषि कानून वापस लेने के फैसले को कृषि विशेषज्ञ अनिल घनवट ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के सदस्य घनवट ने कहा कि किसान 40 सालों से कृषि सुधारों की मांग कर रहे थे। कानून वापस लेना अच्छा कदम नहीं है। घनवट ने कहा कि मौजूदा कृषि प्रणाली उचित व पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि मैं सोचता हूं कि इस सरकार में कृषि सुधारों की इच्छाशक्ति है। पूर्ववर्ती सरकार में राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं थी। उम्मीद करता हूं कि तीनों कृषि कानूनों पर विचार के लिए सभी राज्यों के विपक्षी व किसान नेताओं को शामिल करते हुए एक और कमेटी बनाई जाएगी।
विज्ञापन
कानूनी पहलुओं को देखकर जारी करेंगे रिपोर्ट
घनवट ने कहा कि विवादित कानूनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट जारी करने के सवाल पर घनवट ने कहा कि वे कानूनी पहलुओं को देखकर फैसला करेंगे। उन्होंने दावा किया कि समिति के दो अन्य सदस्यों ने उन्हें फैसला करने का अधिकार दे दिया है। घनवट ने कहा कि समिति ने सोमवार को तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के सरकार के निर्णय के संबंध में बैठक की। बैठक में हमने विस्तार से चर्चा की कि रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए या नहीं।
विज्ञापन
19 मार्च को सुप्रीम कोर्ट को सौंपी थी रिपोर्ट
समिति ने तीनों कृषि कानूनों का अध्ययन करने व उससे संबंधित पक्षकारों से परामर्श के बाद 19 मार्च को अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी थी। तब से यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। घनवट ने 1 सितंबर को प्रधान न्यायाधीश को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि वे इसे जनता के बीच जारी करें, इसकी सिफारिशों से मौजूदा किसान आंदोलन को खत्म कराने में मदद मिलेगी।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के दो अन्य सदस्य हैं कृषि लागत व मूल्य आयोग के पूर्व अध्यक्ष अशोक गुलाटी और कृषि अर्थविद प्रमोद कुमार जोशी। इन दोनों की टिप्पणी अभी प्राप्त नहीं हुई है। पीएम नरेंद्र मोदी ने लंबे किसान आंदोलन के बाद गुरु पर्व पर तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर दी है। संसद के शीत सत्र में इनसे संबंधित प्रस्ताव लाया जाएगा।